बिजनेस स्टैंडर्ड - आयात शुल्क बढऩे की आस कम
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आयात शुल्क बढऩे की आस कम

दिलाशा सेठ / नई दिल्ली August 03, 2018

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद की पिछली बैठक में 100 से ज्यादा वस्तुओं पर कर घटाए जाने के बाद कारोबारी आयात शुल्क बढ़ाए जाने की मांग कर रहे हैं। वहीं ऐसा माना जा रहा है कि कम एकीकृत जीएसटी (आईजीएसटी) और आयात में बढ़ोतरी के बीच कोई संबंध नहीं है, जिससे यह मांग ठंडे बस्ते में चली गई है।   केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) के चेयरमैन एस रमेश ने पिछले सप्ताह कहा था कि घरेलू उद्योग को संरक्षण देने के लिए उपभोक्ता वस्तुओं पर आयात शुल्क बढ़ाने के सुझावों पर सरकार विचार करेगी। उद्योग जगत ने सरकार से मांग की थी कि सस्ते आयात से संरक्षण के लिए सीमा शुल्क में बढ़ोतरी की जाए।
 
पिछली बैठक में जीएसटी परिषद ने छोटे स्क्रीन के टेलीविजन, रेफ्रिजरेटर और वाशिंग मशीन जैसे सामानों पर कर घटाकर उन्हें 28 प्रतिशत से 18 प्रतिशत के कर ढांचे में शामिल करने का फैसला  किया था, जो 27 जुलाई से प्रभाव में आया है। जब किसी वस्तु का आयात किया जाता है तो आयातक उस पर एकीकृत जीएसटी का भुगतान करते हैं। लेकिन अगर वस्तुओं को घरेलू बाजार में बेचा जाता है तो आईजीएसटी रिफंडेबल है। आईजीएसटी दर राज्य जीएसटी और केंद्रीय जीएसटी के जोड़ के बराबर होता है। इसने विशेष अतिरिक्त शुल्क और काउंटरवेलिंग शुल्क की जगह ली है, जो पहले के अप्रत्यक्ष कर के दौर में लिया जाता था। 
 
उद्योगों का तर्क है कि जीएसटी दरों में कटौती से आयातकों के लिए आईजीएसटी दर भी कम हो जाएगा। वहीं विशेषज्ञ आईजीएसटी दर में कमी और आयात में बढ़ोतरी के बीच किसी सह संबंध को खारिज करते हैं। उनका तर्क है कि यह कुछ ऐसे मामलों में ही असर डाल सकता है जब आयातित सामान की मांग घरेलू सामान की तुलना में ज्यादा हो।  ईवाई में पार्टनर विपिन सप्रा ने कहा कि आईजीएसटी में कमी आने से आयात पर कोई असर नहीं पड़ेगा क्योंकि घरेलू बाजार के लिए जीएसटी दरें भी कम हो रही हैं। बहरहाल उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में ही असर पड़ सकता है जब आयातित सामान बनाम घरेलू सामान की मांग का मसला हो। उन्होंने कहा, 'दरें कम होने का घरेलू उद्योग पर असर तभी पड़ सकता है आयातित सामान की कीमत एक रुपये गिरने पर लोग उसकी तरफ आकर्षित हो जाएं, भले ही घरेलू सामान का दाम भी एक रुपये कम गिरा हो।' लेकिन इसका कोई अध्ययन नहीं हुआ है जिससे यह साबिज हो सके कि इसका असर घरेलू उद्योग पर पड़ता है। पीडब्ल्यूसी इंडिया में अप्रत्यक्ष कर के लीडर और पार्टनर प्रतीक जैन ने कहा कि कम आईजीएसटी का घरेलू उद्योग पर असर पड़ेगा, इसका कोई तुक नहीं बनता। उन्होंने कहा, 'यह मामला तभी बनता है अगर अंतिम उपभोक्ता सीधे उत्पाद का आयात कर रहा हो। लेकिन इसका कोई सीधा मतलब नहींं है।' उन्होंने कहा कि ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया है कि जीएसटी दरों में कटौती की वजह से सीमा शुल्क बढ़ाया जाए, जिससे कि एक समान कारोबार का अवसर मिल सके। जैन ने कहा, 'बहरहाल सरकार मेक इन इंडिया के एजेंडे को बढ़ाने के लिए आयात शुल्क में बढ़ोतरी कर सकती है।' 
 
डेलॉयट में पार्टनर एमएस मणि ने कहा कि जीएसटी में बढ़ोतरी होने पर सीमा शुल्क बढ़ाए जाने का कोई मामला नहीं है।  यह भी डर है कि उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स खासकर संगठित टीवी विनिर्माताओं की ओर से ग्रे मार्केट बढ़ सकता है। कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स ऐंड अप्लायंसेज मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (सीईएएमए) के प्रवक्ता रोहित कुमार सिंह का कहना है कि दोहरे जीएसटी कर ढांचे की वजह से ग्रे मार्केट बढ़ सकता है क्योंकि 68 सेंटीमीटर से ऊपर की टीवी पर 28 प्रतिशत कर जारी है। छोटी टीवी पर जहां 18 प्रतिशत सीमा शुल्क है, वहींं ज्यादातर टीवी पाट्र्स (सभी स्क्रीन आकार वाले) पर कर 5-10 प्रतिशत के बीच है। उन्होंने कहा कि साफतौर पर कीमतों का लाभ है, जिससे आगे ग्रे मार्केट आयात बढ़ सकता है। 
Keyword: GST, वस्तु एवं सेवा कर, जीएसटी,,
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