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गैस विवाद पर ट्रिब्यूनल के आदेश को चुनौती देगी सरकार

शाइन जैकब / नई दिल्ली August 03, 2018

पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आज कहा कि सरकार गैर रिसाव विवाद मामले में रिलायंस इंडस्ट्रीज के पक्ष में अंतरराष्टï्रीय मध्यस्थता अदालत के फैसले के खिलाफ दिल्ली उच्च न्यायालय में अपील करेगी। अंतरराष्टï्रीय मध्यस्थता अदालत ने ओएनजीसी के परिचालन वाले क्षेत्र से कथित तौर पर गैस निकाले जाने के लिए रिलायंस इंडस्ट्रीज के खिलाफ 1.55 अरब डॉलर के दावे को खारिज कर दिया था।  उद्योग संगठन सीआईआई द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान संवाददाताओं से बातचीत करते हुए प्रधान ने कहा, 'सरकार निश्चित तौर पर मध्यस्थता अदालत के फैसले के खिलाफ ऊपरी अदालत में अपील दायर करेगी। इसे उच्च न्यायालय में दायर की जाएगी।' एक तीन सदस्यीय ट्रिब्यूनल ने केजी बेसिन में सरकारी कंपनी ओएनजीसी के ब्लॉक के समीप मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली कंपनी एवं उसके साझेदारों द्वारा अवैध तरीके से गैस उत्पादन संबंधी सरकार के दावे को खारिज कर दिया। ट्रिब्यूनल के सदस्यों में सिंगापुर के मध्यस्थता चैम्बर के प्रमुख लॉरेंस बू, सरकार के प्रतिनिधि, सरकार के प्रतिनिधि एवं सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश जीएस सिंघवी और आरआईएल के मध्यस्थ ब्रिटिश हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश बरनार्ड एडेर शामिल थे।
 
कथित तौर पर रिसाव वाले गैस के उत्खनन के लिए सरकार द्वारा 1.55 अरब डॉलर का जुर्माना लगाए जाने के बाद आरआईएल ने मध्यस्थता अदालत की ओर रुख किया था। मध्यस्थता अदालत ने पिछले सप्ताह अपने फैसले में कहा था कि ओएनजीसी के क्षेत्र से अपने क्षेत्र में आने वाले किसी भी गैस का रिलायंस उत्पादन कर सकती है और उसे बेच सकती है। ऐसा करने के लिए उसे सरकार की पहले से अनुमति लेने की जरूरत नहीं है।  रूस की प्रमुख तेल कंपनी रोसनेफ्ट ने ओवीएल, एग्जॉनमोबिल और जापान के एक कंसोर्टियम के खिलाफ 1.4 अरब डॉलर का मामला दायर किया है। आरोप है कि सेखलिन-1 परियोजना में 30 फीसदी हिस्सेदारी रखने वाले इन कंपनियों ने शाव्यो नॉर्थ ब्लॉक के समीप से गैस उत्पादन कर रही हैं जिसका अधिग्रहण 2012 में रूस की इस कंपनी ने किया था। दिलचस्प है कि शेखलिन-1 में रोसनेफ्ट की हिस्सेदारी करीब 20 फीसदी है।
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