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अमेरिकी उत्पादों पर चीनी शुल्क

रॉयटर्स / पेइचिंग August 03, 2018

चीन ने आज अमेरिका से आयातित 60 अरब डॉलर कीमत के उत्पादों पर अतिरिक्त शुल्क लगाने की घोषणा की। इन उत्पादों में तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) से लेकर विमान तक शामिल हैं। चीन ने संकेत दिया है कि वह अमेरिका के साथ लंबे खिंचने वाले व्यापार युद्ध में पीछे नहीं हटेगा।  चीन के वित्त मंत्री ने अमेरिका से आयातित 5,207 उत्पादों पर अतिरिक्त शुल्क की घोषणा की है। यह शुल्क 5 फीसदी से लेकर 25 फीसदी तक है। चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने एक अलग बयान में कहा कि इन्हें लागू करने का समय अमेरिका की कार्रवाई पर निर्भर करेगा। ट्रंप प्रशासन ने चीन से आयात होने वाले 200 अरब डॉलर के उत्पादों पर 25 फीसदी शुल्क लगाने का प्रस्ताव रखकर इस सप्ताह चीन पर व्यापार रियायतें देने को लेकर दबाव बढ़ाया था। इस पर चीन ने कहा है कि अमेरिका के शुल्क बढ़ाने पर वह भी शुल्क बढ़ाएगा। चीन ने अमेरिका से कहा है कि वह सोच-समझकर कदम उठाए और विवाद को हल करने के लिए बातचीत की मेज पर आए। 

 
अमेरिका और चीन ने जुलाई में एक-दूसरे के 34 अरब डॉलर के माल पर शुल्क लागूू कर दिए हैं। अमेरिका के जल्द ही चीन के 16 अरब डॉलर के अन्य उत्पादों पर और शुल्क लागू किए जाने के आसार हैं। इस पर चीन पहले ही कह चुका है कि वह भी अमेरिका से आयातित इतनी ही कीमत के उत्पादों पर शुल्क बढ़ाएगा।  चीन के पलटवार पर व्हाइट हाउस और अमेरिकी वाणिज्य विभाग के प्रतिनिधियों को कुछ सवाल भेजे गए, लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, 'अमेरिकी पक्ष बार-बार उद्यमों और उपभोक्ताओं के हितों के खिलाफ मुश्किल हालात पैदा कर रहा है।' इसमें कहा गया है, 'चीन को अपने लोगों की प्रतिष्ठा और हितों की रक्षा के लिए आवश्यक जवाबी कदम उठाने होंगे।'
 
अमेरिका के जिन उत्पादों को निशाना बनाने की योजना बनाई गई है, उनमें कृषि एवं एलएनजी जैसे विभिन्न कृषि और ऊर्जा उत्पाद शामिल हैं। अमेरिका से चीन में हर साल करीब 12 अरब डॉलर का तेल आता है, लेकिन यह स्तर आगे बढ़ सकता है। इसकी वजह यह है कि चीन देश में धुंध से निपटने के लिए कोयले के इस्तेमाल को घटाने की योजना बना रहा है। चीन के निशाने पर अमेरिका के जो अन्य उत्पाद हैं, उनमें सेमीकंडक्टर, कुछ हेलिकॉप्टर, लघु से मझोले आकार के विमान, कंडोम, बीफ, इस्पात उत्पाद और कॉफी शामिल हैं।  वहीं भारत के वाणिज्य मंत्रालय ने कहा है कि सरकार ने अमेरिका पर जवाबी शुल्क लागूू करने में देरी करने की योजना बनाई है ताकि विवादों को हल करने का समय मिल सके। अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के इस्पात और एल्युमीनियम पर शुल्क बढ़ाने से दोनों देशों के रिश्तों में तल्खी आई है।
Keyword: india, america, china, trade,,
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