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अधिमास से स्वर्ण खरीद का ह्रास, गिरी मांग

दिलीप कुमार झा / मुंबई August 02, 2018

चालू कैलेंडर वर्ष की दूसरी तिमाही के दौरान भारत में स्वर्ण मांग आठ प्रतिशत तक घटी है। रुपये के अवमूल्यन के साथ-साथ अधिमास की वजह से उपभोक्ताओं की ओर से खरीदारी में कमी के कारण स्वर्ण मांग में यह गिरावट आई है। इस अवधि को अशुभ माना जाता है।  स्वर्ण खनिकों की शीर्ष वैश्विक संस्था - विश्व स्वर्ण परिषद (डब्लूजीसी) ने 2018 की अप्रैल-जून तिमाही के दौरान भारत में कुल स्वर्ण मांग 187.2 टन रहने का अनुमान जताया है जो पिछले साल की समान तिमाही में 202.6 टन थी। 2018 की दूसरी तिमाही में आभूषण क्षेत्र की सोने की मांग आठ प्रतिशत गिरकर 147.9 टन हो गई जबकि पिछले वर्ष इस तुलनात्मक अवधि में यह 161 टन थी। वहीं दूसरी ओर इसकी निवेशक मांग इस समीक्षा अवधि के दौरान 41.6 टन से पांच प्रतिशत गिरकर 39.3 टन पर आ गई है। हालांकि जनवरी-जून 2018 के बीच पहली छमाही में भारत की स्वर्ण मांग छह प्रतिशत गिरकर 338.7 टन दर्ज की गई है जो पिछले साल समान अवधि में 363.3 टन थी।
 
विश्व स्वर्ण परिषद (भारत) के प्रबंध निदेशक सोमसुंदरम पीआर ने कहा कि दूसरी तिमाही में भारत की स्वर्ण मांग 187.2 टन थी, जो 2017 की दूसरी तिमाही की तुलना में आठ प्रतिशत कम रही। उस दौरान उपभोक्ता जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) से पहले अग्रिम खरीदारी करने में लगे हुए थे। बढिय़ा अक्षय तृतीया और शादी-विवाह के सीजन ने तिमाही की शुरुआत में मांग को बढ़ा दिया था लेकिन अशुभ माने जाने वाले अधि मास की शुरुआत और अंतरराष्टï्रीय कीमतों में नरमी केबावजूद भारतीय रुपये के बढ़ते मूल्य ने इस तिमाही को सीमित दायरे में रखा।
 
दिलचस्प बात यह है कि वैश्विक स्वर्ण मांग में सभी क्षेत्रों की ओर से गिरावट आई है। हालांकि प्रौद्योगिकी क्षेत्र अपवाद है जिसमें चालू कैलेंडर वर्ष की दूसरी तिमाही यानी अप्रैल-जून के दौरान दो प्रतिशत की मामूली उछाल आई है। ग्लोबल एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) में आश्चर्यजनक रूप से 46 फीसदी की गिरावट के कारण 2018 की अप्रैल-जून तिमाही में सोने की कुल वैश्विक मांग चार प्रतिशत गिरकर 964.3 टन दर्ज की गई जबकि पिछले साल समान अवधि में यह 1007.5 टन थी। अमेरिका के साथ बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव की वजह से चीन और ईरन में मजबूत होती मांग को तुर्की, भारत और यूरोप ने संतुलित कर दिया क्योंकि यहां स्थानीय दाम ऊंचे बने रहे। वैश्विक दामों में गिरावट के बावजूद रुपये के अवमूल्यन की वजह से भारत में सोना सीमित दायरे में रहा।
 
सोमसुंदरम ने कहा कि कृषि आय को बढ़ाने के लिए सरकारी प्रयास, दूसरी छमाही में बढिय़ा मॉनसून और त्यौहारी सीजन मांग के लिए अच्छे शगुन हैं। उनका अनुमान है कि पूरे साल की स्वर्ण मांग 700 से 800 टन के दायरे में रहेगी। पिछले एक दशक के दौरान भारत में सोने की औसत मांग तकरीबन 850 टन रहने का अनुमान जताया जाता है। हालांकि साल की पहली छमाही में भी सोने की मांग 2017 की समान अवधि और 10 सालों के औसत से क्रमश: छह प्रतिशत और 13 प्रतिशत कम है लेकिन संगठित व्यापार और डिजिटल उत्पादों के क्षेत्र में स्पष्टï सुदृढ़ सकारात्मकता नजर आती है।
 
उधर, विश्व स्वर्ण परिषद का अनुमान है कि चालू कैलेंडर वर्ष की दूसरी तिमाही में भारत का शुद्ध सराफा आयात आश्चर्यजनक रूप से 34 प्रतिशत गिरकर 162.5 टन रह सकता है जबकि पिछले साल समान अवधि में यह 245.9 टन था। हालांकि 2018 की अप्रैल-जून तिमाही में देश में कच्चे सोने का आयात मामूली रूप से दो प्रतिशत की गिरावट के साथ 69.2 टन दर्ज किया गया है जबकि पिछले साल समान अवधि में यह 70.8 टन था। यह दर्शाता है कि आगामी त्यौहारी मांग से कुछ महीने पहले भारत में सोने की रिफाइनरीज ने बढिय़ा प्रदर्शन किया है।
 
तिमाही के दौरान समय-समय पर ऊंची कीमतों का लाभ उठाते हुए उपभोक्ताओं ने या तो अपने पुराने गहने देकर नए गहने लिए या फिर उन्हें बेचकर नकद पैसा लिया। हालाांकि भारत में सोने की भावी मांग चालू सीजन के दौरान मॉनसून की बारिश पर निर्भर करेगी जो हाल के कुछ हफ्तों में कमजोर पडऩा शुरू हो गया है। 
Keyword: gold,सराफा बाजार, आभूषण,
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