बिजनेस स्टैंडर्ड - जीएसटी : नई रिटर्न प्रक्रिया से कारोबारियों को राहत!
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जीएसटी : नई रिटर्न प्रक्रिया से कारोबारियों को राहत!

इंदिवजल धस्माना और प्रियदर्शिनी माजी / नई दिल्ली 07 31, 2018

सरलीकृत रिटर्न प्रक्रिया

►  बड़े व्यवसायी को फिलहाल साल में 25 रिटर्न भरने पड़ते हैं
►  नई व्यवस्था पर अमल होने से यह संख्या घटकर 13 रह जाएगी

बिजनेस स्टैंडर्ड जीएसटी : नई रिटर्न प्रक्रिया से कारोबारियों को राहत!यदि प्रस्तावित सरलीकृत रिटर्न प्रक्रिया को 6 महीने के अंदर लागू किया जाता है तो व्यवसायियों और पेशेवरों के लिए राह कुछ हद तक आसान हो जाएगी। इससे रिटर्न दाखिल करने की संख्या पहले की तुलना में काफी घट जाएगी। हालांकि करदाताओं को लगातार इनवॉइस अपलोड करने और इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा करने के लिए बिक्री के साथ खरीद रसीदों के मिलान पर ध्यान देने की जरूरत होगी। कई लोगों का कहना है कि यह करदाताओं के लिए बोझिल प्रक्रिया होगी क्योंकि मौजूदा समय में वह स्वयं ही क्रेडिट दावों को प्रमाणित करते हैं।

जीएसटी के तहत मौजूदा योजना में करदाता को महीने में तीन रिटर्न और एक सालाना रिटर्न दाखिल करने करने की जरूरत होती है जिसके साथ उन्हें एक साल में कुल 37 बार रिटर्न भरने पड़ते हैं। काफी हो-हंगामे और विचार-विमर्श के बाद जीएसटी परिषद ने एक इनपुट रिटर्न को समाप्त किया है। इसके अलावा एक इनपुट-आउटपुट रिटर्न को भी हटाया गया है और उसकी जगह समरी इनपुट-आउटपुट रिटर्न बरकरार रहेगा। फिलहाल बड़े व्यवसायी महीने में दो रिटर्न और एक सालाना रिटर्न या साल में 25 रिटर्न भरते हैं।

छोटे व्यवसायियों को महीने में एक रिटर्न - समरी इनपुट आउटपुट रिटर्न- और तिमाही में एक सप्लाई रिटर्न भरने की जरूरत होती है। इस तरह से कुल मिलाकर उन्हें साल में 17 रिटर्न भरने पड़ते हैं। इसकी जगह सरकार द्वारा पेश किए गए सरलीकृत रिटर्न के मसौदे में यह प्रस्ताव रखा गया है कि बड़े व्यवसायी को एक मासिक रिटर्न और एक सालाना रिटर्न भरना होगा। इस तरह से उसे साल में 13 रिटर्न भरने होंगे जो मौजूदा 25 रिटर्न की तुलना में काफी कम हैं। छोटे व्यवसायियों को केवल तिमाही रिटर्न भरना होगा। लेकिन इन करदाताओं को इस विकल्प पर साल के शुरू में ही अमल करना होगा।

मौजूदा समय में, 1.5 करोड़ रुपये के सालाना कारोबार वाले व्यवसायियों को छोटे व्यवसायी की श्रेणी में रखा गया है। सरलीकृत रिटर्न प्रक्रिया पर अमल होने के बाद 5 करोड़ रुपये के सालाना कारोबार वाले व्यवसायी को छोटे व्यवसायी के तौर पर समझा जाएगा। कुल तीन तरह के तिमाही रिटर्न होंगे। एक निर्माताओं या सेवा प्रदाताओं के लिए और दो अन्य रिटर्न व्यापारियों के लिए होंगे। सिर्फ उपभोक्ता को व्यवसाय की आपूर्ति (बी2सी) से जुड़े कारोबारियों को ‘सहज’ फॉर्म भरने और बी2सी और बी2बी (बिजनेस टु बिजनेस) आपूर्ति, दोनों के लिए ‘सुगम’ फॉर्म सौंपना होगा।

हालांकि खरीदारों को अपने इनवॉइस लगातार अपलोड करने और विक्रेता इनवॉइस का रिकॉर्ड रखने की जरूरत होगी। ऐसा इसलिए है क्योंकि आपूर्तिकर्ताओं द्वारा अगले महीने की 10 तारीख तक अपलोड किए गए बिलों पर ही इनपुट टैक्स क्रेडिट उपलब्ध होंगे। इसके अलावा व्यवसायी को अगले महीने की 20 तारीख तक मासिक आधार पर कर चुकाने होंगे। क्लियर टैक्स के मुख्य कार्याधिकारी अर्चित गुप्ता का कहना है, ‘जहां तक लेनदेन की रिपोर्टिंग का सवाल है तो नई व्यवस्था में करदाताओं को राहत मिलेगी। लेकिन उन्हें बिल लगातार अपलोड करने होंगे।’

Keyword: GST, input tax credit, claim, बी2सी, बी2बी,
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