बिजनेस स्टैंडर्ड - एसबीआई ने अपनी जमा दरें बदलीं
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एसबीआई ने अपनी जमा दरें बदलीं

अभिजित लेले / मुंबई 07 30, 2018

भारतीय स्टेट बैंक

दीर्घावधि थोक दरों में 5 से 60 आधार अंकों की बढ़ोतरी
अल्पावधि थोक जमा दरों में 25 से 45 आधार अंकों की कटौती
1 अगस्त को मौद्रिक नीति की घोषणा करेगा आरबीआई

बिजनेस स्टैंडर्ड एसबीआई ने अपनी जमा दरें बदलींमौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की 3 दिवसीय बैठक के पहले दिन आज देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने अपनी दीर्घावधि जमा दरों में मामूली बढ़ोतरी की घोषणा की। एसबीआई ने साथ ही अल्पावधि थोक जमा दरों (एक करोड़ रुपये से 10 करोड़ रुपये) में 25 से 45 आधार अंकों की कटौती कर दी। दीर्घावधि थोक जमा दरों में 5 से 60 आधार अंकों की बढ़ोतरी की गई है। एक आधार अंक एक फीसदी अंक का 100वां हिस्सा होता है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) 1 अगस्त को अपनी मौद्रिक नीति की घोषणा करेगा। 

चूंकि एसबीआई ने अपनी दरें बढ़ाई हैं और उसमें कटौती भी की है, इसलिए कोई स्पष्ट संकेत नहीं हैं। इसके अलावा एक तथ्य यह भी है कि बैंक के पास पर्याप्त अल्पावधि तरलता है लेकिन दीर्घावधि में वह नकदी की समस्या से जूझ रहा है। आमतौर पर जमा दर में बढ़ोतरी उधारी दर समायोजन के बाद होती है लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं लगता है। एसबीआई ने जुलाई में सीमांत लागत आधारित उधारी दर (एमसीएलआर) 8.25 फीसदी पर बरकरार रखी थी।

एसबीआई के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि तरलता की स्थिति और कुछ जमाओं की परिपक्वता को ध्यान में रखते हुए सावधि जमा की दरों में बदलाव किया गया है। उन्होंने दावा किया कि बैंक में तरलता की स्थिति बेहतर है। नई जमा दरें सोमवार से ही लागू हो गईं। पिछले कुछ दिनों से बैंकिंग प्रणाली में तरलता में काफी कमी आ गई है और एसबीआई की दरों में बदलाव इसका संकेत हो सकता है। बैंकिंग व्यवस्था में तरलता की स्थिति 6 सदस्यीय एमपीसी के लिए अहम कारक होगी।

केयर रेटिंग्स के मुताबिक 21 जुलाई को शुद्ध नकदी घाटा 257.66 अरब रुपये था जो 25 जुलाई को 4 महीने के उच्चतम स्तर 714.11 अरब रुपये पर पहुंच गया। सप्ताह के उत्तरार्ध में इसमें कुछ सुधार आया और यह 387.99 अरब रुपये पर आ गया। लगातार तीसरे सप्ताह बैंकिंग प्रणाली में नकदी की तंगी में चल रही है। बैंकिंग व्यवस्था में ज्यादा टिकाऊ नकदी डालने के लिए मई से आरबीआई ने शेयर बाजार से 300 अरब रुपये के बॉन्ड खरीदे हैं।

इस बात की संभावना है कि बैंकिंग प्रणाली में नकदी बनाए रखने के लिए केंद्रीय बैंक आने वाले दिनों में ऐसी कई और खरीद कर सकता है। लेकिन जब तक व्यवस्था में नकदी की स्थिति सामान्य होती है तब तक बैंकों को अपनी जमा दरों में बेहतर समायोजन करना होगा।एसबीआई ने एक करोड़ रुपये तक खुदरा जमा पर एक साल से लेकर दो साल से कम समय तक दर 6.7 फीसदी कर दी है। पहले यह 6.65 फीसदी थी। दो साल से लेकर 3 साल से कम समय के लिए इसे 10 आधार अंक बढ़ाकर 6.75 फीसदी किया गया है। 

Keyword: एसबीआई, मौद्रिक नीति समिति, एमपीसी, आरबीआई, Banking, केयर रेटिंग्स,
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