बिजनेस स्टैंडर्ड - कम रह सकता है जीएसटी संग्रह
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कम रह सकता है जीएसटी संग्रह

नितिन सेठी और ईशान बख्शी / नई दिल्ली 07 30, 2018

जीएसटी संग्रह

सूचना के अधिकार कानून के तहत वित्त मंत्रालय से जुटाए गए आंकड़ों से मिला यह संकेत
राजस्व में संभावित कमी का राजकोषीय लक्ष्य पर पड़ सकता है असर
लक्ष्य से 517 अरब रुपये की कमी का है अनुमान

बिजनेस स्टैंडर्ड कम रह सकता है जीएसटी संग्रहचालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (सीजीएसटी) का संग्रह 504 अरब रुपये रहा। इसके अलावा केंद्र सरकार को एकीकृत जीएसटी (आईजीएसटी) से भी करीब 424 अरब रुपये मिले। तिमाही आधार पर कर संग्रह में 10 फीसदी वृद्घि के हिसाब से आकलन करें तो केंद्र को बजट लक्ष्य 6,039 अरब रुपये से करीब 517 अरब रुपये कम मिलेंगे। यह अनुमान इस पर आधारित है कि आईजीएसटी संग्रह को केंद्र और राज्यों के बीच बराबर-बराबर बांटा जाएगा। बिज़नेस स्टैंडर्ड ने सूचना के अधिकार के तहत यह जानकारी जुटाई है। 

राजस्व में इस संभावित कमी का 2018-19 के लिए केंद्र के राजकोषीय लक्ष्य पर प्रभाव पड़ सकता है जिसे सरकार ने 6,242 अरब रुपये पर रहने का अनुमान लगाया है। इस संभावित कमी का अनुमान जून में वित्त सचिव हसमुख अढिया द्वारा केंद्रीय कर अधिकारियों को भेजे एक पत्र में जताई गई आशंका को देखते हुए व्यक्त किया गया है। इस पत्र में अढिया ने राज्य जीएसटी (एसजीएसटी) के तहत दाखिल रिटर्न की तुलना में सीजीएसटी के तहत दाखिल रिटर्न की कम संख्या को लेकर चिंता जताई थी। 

517 अरब रुपये की कमी का यह अनुमान सकल सीजीएसटी और आईजीएसटी, रिफंड और आईजीएसटी पूल से विवरण समेत विभिन्न आंकड़ों पर आधारित है। तिमाही आधार पर राजस्व में 10 प्रतिशत की वृद्धि के अनुमान को ध्यान में रखते हुए केंद्र का सकल सीजीएसटी संग्रह वित्त वर्ष 2019 के लिए 2,337 अरब रुपये बैठता है जबकि आईजीएसटी संग्रह 6,869 अरब रुपये पर अनुमानित है। 

वर्ष के अंत में अनसेटल्ड आईजीएसटी के तौर पर 500 अरब रुपये की रकम बनाए रखने की सरकार की योजना के तहत शेष 6,369 अरब रुपये की रकम केंद्र और राज्यों के बीच समान रूप से विभाजित होगी और केंद्र को अन्य 3,184.5 अरब रुपये हासिल होंगे। इससे वित्त वर्ष 2019 के अंत में केंद्र का कुल संग्रह रिफंड को छोड़कर 6,039 अरब रुपये के लक्ष्य की तुलना में 5,522 अरब रुपये रहेगा। कोटक इंस्टीट्ïयूशनल इक्विटीज के अर्थशास्त्री शुभदीप रक्षित ने कहा, 'मौजूदा जीएसटी दर को देखते हुए, केंद्र सरकार के लिए वित्त वर्ष 2019 के बजट अनुमानों को पूरा करना चुनौतीपूर्ण होगा। हमारा मानना है कि कम जीएसटी संग्रह से जीएफडी/जीडीपी' में लगभग 20-25 आधार अंक की कमी आने की आशंका है। हमें मुख्य रूप से दो चीजों पर नजर रखने की जरूरत होगी। पहला,  क्या अनुपालन और मासिक दर में सुधार आएगा, और दूसरा, केंद्र और राज्यों के बीच आईजीएसटी के निपटान।' 

आंकड़ों के अनुसार केंद्र का कुल संग्रह (रिफंड को छोड़कर) 487 अरब रुपये पर 504 अरब रुपये की सकल आंकड़े की तुलना में कम है। लेकिन पूरे वर्ष के अनुमान के लिए पहली तिमाही के कुल संग्रह का इस्तेमाल करना समस्या पैदा कर सकता है। रिफंड में तिमाही दर तिमाही बदलावों का आकलन करना कठिन है, क्योंकि पूर्ववर्ती अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था से असर बरकरार है। आरटीआई आंकड़ों से पता चला है कि 2018-19 की पहली तिमाही के लिए सीजीएसटी से रिफंड 17 अरब रुपये पर था, जो दिसंबर 2017 से मार्च 2018 की अवधि के 19 अरब रुपये की तुलना में कम है। अपने 2018-19 के बजट में केंद्र ने सीजीएसटी में 13.7 प्रतिशत की वृद्घि निर्धारित की। लेकिन पहली तिमाही के लिए कर संग्रह उम्मीद से कम रहा जिससे केंद्र को अब अगली तीन तिमाहियों में प्रत्येक तिमाही में कर संग्रह में 20 प्रतिशत तक का सुधार लाने की जरूरत होगी।  

इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर कहती हैं, 'मासिक जीएसटी संगह के शुरुआती आंकड़े  पर वित्त वर्ष 2019 के लिए केंद्र सरकार के बजट अनुमान को पूरा करने के लिए जरूरी आंकड़े की तुलना में कम औसत का पता लगाने के लिए विचार किए जाने की जरूरत होगी। हालांकि हमें उम्मीद है कि ई-वे बिल के लाभ के साथ साथ वर्ष की दूसरी छमाही में खपत में सुधार से यह सुनिश्चित हो जाएगा कि बजट अनुमानों और वास्तविक संग्रह के बीच अंतर सीमित होगा।' 

आरटीआई के जरिये हासिल आंकड़ों में कर राजस्व में अनुमानित गिरावट की बात जीएसटी से संबंधित आंकड़े में कुछ सकारात्मक रुझानों के बावजूद कही गई है। पहला सकारात्मक रुझान यह है कि मार्च 2018 के अंत में कुल 128 अरब रुपये आईजीएसटी के तहत रिफंड के रूप में दिए गए। तुलनात्मक रूप से वित्त वर्ष 2019 की पहली तिमाही के अंत में कुल रिफंड 169 अरब रुपये पर दर्ज किया गया है। ऐक्सिस बैंक में मुख्य अर्थशास्त्री सौगत भट्टाचार्य का कहना है, 'यदि आईजीएसटी के रिफंड निर्यात क्रेडिट हैं तो इससे संकेत मिलता है कि निर्यात क्रेडिट रिफंड अब आसान बनाए गए हैं।' दूसरा, आईजीएसटी के तहत संग्रह के रुझान से ई-वे बिल के क्रियान्वयन के बाद संग्रहण में तेजी का संकेत मिला है। 
Keyword: इक्रा, मुख्य अर्थशास्त्री, अदिति नायर, जीएसटी, axis bank, GST, ICRA, Rating agency,
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