बिजनेस स्टैंडर्ड - नाखुश फर्मों की बढ़ती फेहरिस्त
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नाखुश फर्मों की बढ़ती फेहरिस्त

विवेट सुजन पिंटो और अर्णव दत्ता / मुंबई/नई दिल्ली 07 29, 2018

जीएसटी का असर

बिजनेस स्टैंडर्ड नाखुश फर्मों की बढ़ती फेहरिस्तवस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद के 21 जुलाई को कर की दरों में बदलाव के हाल के चरण से अजीब स्थिति पैदा हो गई है। इस बार जीएसटी का लाभ ग्राहकों को देने की इच्छुक कंपनियों की संख्या पिछले चरण से भी कम है। नवंबर, 2017 में जीएसटी दरों में संशोधन के समय मुख्य रूप से खाद्य उत्पादक कंपनियां जीएसटी का फायदा आगे देने में अनिच्छुक थीं, लेकिन इस बार सैनिटरी नैपकिन निर्माता, टीवी विनिर्माता और यहां तक कि पेंट उत्पादक कंपनियों ने कहा है कि जीएसटी का फायदा आगे देना व्यावहारिक नहीं है। 

इन श्रेणियों में मौजूद फर्मों के पास इस प्रतिरोध की अपनी-अपनी वजहें हैं। देश की अग्रणी सैनिटरी नैपकिन निर्माता मसलन जॉनसन ऐंड जॉनसन, प्रॉक्टर ऐंड गैंबल, किंबर्ली क्लार्क आदि का प्रतिनिधित्व करने वाले फेमिनिन ऐंड इन्फेंट हाइजिन एसोसिएशन (एफआईएचए) ने कहा है कि छूट वाली सूची में इसे शामिल किए जाने से शायद ही इच्छित नतीजे मिलेंगे। एफआईएचए ने कहा, जीएसटी से सैनिटरी नैपकिन को छूट के मामले में भारत में इसकी विनिर्माता कंपनियों को इनपुट टैक्स क्रेडिट नहीं मिलेगा। इसके परिणामस्वरूप नुकसान की भरपाई की खातिर कंपनियां उपभोक्ताओं को इसका लाभ नहीं दे पाएंगी। 

सरकार ने सैनिटरी नैपकिन निर्माताओं से लागत का ब्योरा मांगा है, लेकिन कंपनियों का तर्क है कि इसे छूट वाली सूची में शामिल किए जाने से निर्यातकों को लाभ होगा। नोबेल हाइजीन के प्रबंध निदेशक कमल जौहरी ने कहा, सैनिटरी नैपकिन बनाने में इस्तेमाल इनपुट पर हम 18 फीसदी जीएसटी चुकाते हैं। तैयार उत्पादों पर 12 फीसदी जीएसटी से हमें इनपुट टैक्स की भरपाई करने में मदद मिलती, जो यहां उपलब्ध नहीं है। इससे स्थानीय तौर पर सैनिटरी नैपकिन बनाना अव्यावहारिक हो जाएगा और आयात में मजबूती आएगी। इस बीच, टीवी विनिर्माताओं ने कहा है कि 68 सेंटीमीटर आकार तक के छोटे टीवी पर जीएसटी का फायदा देने का कोई मतलब नहीं बनता। कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स ऐंड अप्लायंसेज मैन्युफैक्चररर्स एसोसिएशन (सीईएएमए) के प्रवक्ता रोहित कुमार ने कहा, 26 इंच वाला टीवी क्षेत्र कुल टीवी बाजार का 8-10 फीसदी से ज्यादा नहीं है। वहीं 32 से 43 इंच वाला टीवी कुल टीवी बाजार का करीब दो तिहाई है और ज्यादातर कंपनियों के लिए अहम है। उन्होंने कहा, मध्यम आय वाले ज्यादातर भारतीय घरों में 32 से 43 इंच वाला टीवी है और ज्यादातर टीवी इसी क्षेत्र में पेश होते हैं। उन्होंने कहा, 43 इंच वाले टीवी पर 10 फीसदी जीएसटी का विस्तार बेहतर होता।

सीईएएमए ने पिछले हफ्ते इस बारे में सरकार के सामने अपना पक्ष रखा था। इसने टीवी के कलपुर्जे पर आयात शुल्क बढ़ाने की जरूरत को रेखांकित किया था क्योंकि जीएसटी की दरोंं में कटौती से देश में आयात बढ़ेगा। एशियन पेंट्स ने कहा कि जीएसटी में 10 फीसदी की कटौती का फायदा आगे देने के मामले में उसे आकलन करना होगा। पहली तिमाही के नतीजे की घोषणा के समय कंपनी ने कहा, हमें इसका फायदा देना होगा, लेकिन इसका आकलन हमें करना है कि यह कब से हो सकता है। कंसाई नैरोलक के प्रबंध निदेशक एच एम भारूका ने कहा, इनपुट लागत में इजाफे के बाद भी कंपनी जीएसटी का फायदा ग्राहकों को देगी। नवंबर में जीएसटी में 13 फीसदी की कटौती का लाभ ग्राहकों न देने के मामले में खाद्य कंपनियां सरकार की जांच के दायरे में हैं। पिछले हफ्ते हार्डकैसल रेस्टोरेंट के बाद जुबिलैंट फूडवक्र्स सेफगाड्र्स महानिदेशालय से नोटिस पाने वाली दूसरी कंपनी हो गई, जिसने कर कटौती का लाभ ग्राहकों को नहींं दिया।

Keyword: GST, वस्तु एवं सेवा कर, जीएसटी,,
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