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इस मॉनसून में कराएं डेंगू बीमा जरूर

संजय कुमार सिंह /  July 29, 2018

दिल्ली में स्वतंत्र पेशेवर (फ्रीलांसर) के तौर पर काम करने वाली 38 साल की श्वेता मेहता को पिछले साल डेंगू हो गया था। पहले तो उन्होंने कुछ दिन तक बहिरंग रोगी विभाग (ओपीडी) में सामान्य मरीज की तरह इलाज कराया, लेकिन बाद में उन्हें तीन दिन के लिए अस्पताल में भर्ती होना पड़ गया। उनके पास किसी तरह का स्वास्थ्य बीमा कवर नहीं था और चूंकि वे फ्रीलांसर थीं यानी किसी संस्था से नहीं जुड़ी थीं, इसलिए उनके पास कर्मचारी स्वास्थ्य बीमा भी नहीं था। अस्पताल ने छुट्टïी देते वक्त जब उनके सामने 55,000 रुपये का बिल रखा तो उनके होश उड़ गए। यह बिल उन्हें बहुत भारी पड़ा क्योंकि यह पूरा बिल उन्हें अपनी जेब से ही भरना पड़ा था। 

 
दिल्ली नगर निगम की एक रिपोर्ट बताती है कि 2017 में केवल दिल्ली में ही करीब 9,300 लोग डेंगू की चपेट में आ गए थे। इस बार भी मॉनसून की दस्तक होने के साथ ही अस्पतालों में डेंगू के मरीजों के भर्ती होने की खबरें आने लगी हैं। अगर आपको हर साल फैलने वाली इस बीमारी से खुद को बचाना है तो कम से कम एक सस्ती सी डेंगू बीमा पॉलिसी तो आपको खरीद ही लेनी चाहिए।  डेंगू के इलाज में आम तौर पर 35,000 रुपये से 80,000 रुपये तक खर्च हो सकते हैं। फिलहाल दो बीमा कंपनियां डेंगू के लिए खास बीमा कवर मुहैया करा रही हैं - अपोलो म्यूनिख और डीएचएफएल प्रमेरिका। डेंगू पॉलिसी में सबसे खास बात यह है कि इसमें अस्पताल में भर्ती होने का खर्च ही कवर नहीं होता बल्कि ओपीडी मरीज के तौर पर उपचार कराने पर भी पूरा खर्च बीमा कंपनी उठाती है। अगर आप सामान्य बीमा पॉलिसी लेते हैं तो आपको अस्पताल में भर्ती होने पर ही बीमा का फायदा मिलेगा यानी अस्पताल में भर्ती होने पर ही बीमा कंपनी खर्च उठाएगी और उसके लिए भी कम से कम 24 घंटे के लिए भर्ती रहना जरूरी है। 
 
डेंगू कवर से जो अतिरिक्त लाभ मिलता है, वह उसी वक्त पता चल जाता है, जब कोई मरीज ओपीडी में इलाज कराने जाता है। डेंगू बीमा में ओपीडी में होने वाले सभी खर्च कवर किए जाते हैं, जिनमें मेडिकल जांच, दवाएं और डॉक्टर का परामर्श शुल्क भी शामिल होता है। कवरफॉक्स में निदेशक (स्वास्थ्य, जीवन एवं रणनीतिक पहल) महावीर चोपड़ा कहते हैं, 'डेंगू होने पर मुश्किल से 12-15 फीसदी लोग ही इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती होते हैं। बाकी सभी ओपीडी मरीज के तौर पर ही अपना इलाज कराते हैं और सामान्य स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी में ओपीडी का खर्च कवर ही नहीं होता।' किसी खास बीमारी के लिए जो बीमा पॉलिसी होती हैं, उनमें प्रीमियम तय करने का तरीका भी कुछ अलग होता है। अगर डेंगू के लिए बीमा लिया जाए तो सभी ग्राहकों के लिए प्रीमियम बराबर ही रहता है, चाहे उनकी उम्र कुछ भी हो। बीमा पॉलिसी का नवीकरण कराने पर भी प्रीमियम में किसी तरह की कमीबेशी नहीं होती और पहले जितना प्रीमियम ही वसूला जाता है। इसके उलट सामान्य स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी में प्रीमियम उम्र से जुड़ा होता है और हर साल प्रीमियम में कुछ इजाफा हो सकता है। सामान्य स्वास्थ्य बीमा में हर पांच साल बाद प्रीमियम में अच्छी खासी बढ़ोतरी हो जाती है। 
 
डेंगू बीमा जैसी पॉलिसियों में प्रतीक्षा अवधि भी बहुत कम होती है। अपोलो म्यूनिख हेल्थ इंश्योरेंस में मुख्य कार्य अधिकारी एंटनी जैकब का कहना है, 'इन पॉलिसियों में प्रतीक्षा अवधि बहुत कम होती है और महज 15 दिन की होती है। प्रतीक्षा अवधि यह सुनिश्चित करने के लिए होती है कि पॉलिसी खरीदते समय ग्राहक को डेंगू का संक्रमण तो नहीं हो चुका था। यह पॉलिसी सभी श्रेणियों के लोगों के लिए उपलब्ध होती है और उन लोगों को भी मिल जाती है, जिन्हें सामान्य मेडिक्लेम पॉलिसी देने से इनकार कर दिया गया है।' ऐसी बीमा पॉलिसी खरीदने से पहले बीमाधारक को किसी तरह की स्वास्थ्य जांच भी नहीं करानी पड़ती। बीमा खरीदने से पहले फॉर्म भरते समय स्वास्थ्य के बारे में हलफनामा देना भर काफी होता है। ये स्थिर लाभ योजनाएं होती हैं। पॉलिसीबाजार डॉट कॉम में प्रमुख (उत्पाद एवं नवाचार) वैद्यनाथन रमानी का कहना है, 'अगर आपको डेंगू बता दिया गया है तो स्थिर लाभ वाली इन योजनाओं में आपको बीमा की पूरी राशि मिल जाएगी चाहे आप अस्पताल में भर्ती हों या नहीं और मेडिकल बिल दें या नहीं।'
 
डेंगू बीमा पॉलिसी लेने का एक और फायदा है। आपकी मुख्य मेडिक्लेम पॉलिसी में नो क्लेम बोनस बनता रहता है क्योंकि आप उसमें दावा ही नहीं करते। डीएचएफएल प्रमेरिका लाइफ इंश्योरेंस में प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्य अधिकारी अनूप पब्बी कहते हैं, 'ये पॉलिसी उन लोगों के लिए आदर्श होती हैं, जो छोटे-मोटे दावे के चक्कर में अपनी मेडिक्लेम पॉलिसी में जमा नो क्लेम बोनस पर कोई असर नहीं पडऩे देना चाहते।' मगर ऐसी पॉलिसी में कुछ नुकसान भी होते हैं। सबसे बड़ा नुकसान तो यही है कि अगर आपको डेंगू के अलावा कोई और बीमारी निकली तो पॉलिसी आपके लिए बेकार है क्योंकि आपको इलाज का खर्च नहीं मिलेगा। फिर भी यह पॉलिसी कारगर है और मेडिक्लेम पॉलिसी रखने वाले भी अतिरिक्त बीमा के लिए इसे खरीद सकते हैं क्योंकि इसमें खर्च बहुत मामूली होता है और बीमार होने पर ओपीडी का खर्च भी मिल जाता है।
Keyword: insurance, accident, dengue,,
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