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400 अरब डॉलर से नीचे आएगा मुद्रा भंडार!

अनूप रॉय / मुंबई July 27, 2018

भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 400 अरब डॉलर के नीचे आने की संभावना है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यह कोई चिंता का विषय नहीं है।  कुल मिलाकर भंडार में बढ़ोतरी पोर्टफोलियो प्रवाह की वजह से होता है और अब यह प्रवाह उल्टा हो गया है। इसकी वजह से मुद्रा पर दबाव बन रहा है। विशेषज्ञों और अर्थशास्त्रियोंं का कहना है कि ऐसे में केंद्रीय बैंक रुपये के बचाव के लिए संचित भंडार में से धन जारी कर सही दिशा में है। भारत का विदेशी मुद्रा भंडार अप्रैल के मध्य में बढ़कर 426 अरब डॉलर के उच्च स्तर पर पहुंच गया था। रिजर्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक उसके बाद से यह 20 जुलाई को समाप्त सप्ताह में घटकर 405 अरब डॉलर पर पहुंच गया। इसके साथ ही 10-11 अरब डॉलर आरबीआई के फॉरवर्ड पोजिशन में है, जिसका इस्तेमाल बाजार में हस्तक्षेप के लिए किया जा सकता है। 
 
पोर्टफोलियो प्रवाह की वजह से भंडार जमा हुआ था। स्थानीय इक्विटी और ऋण में डॉलर मुद्रा का प्रवाह होने पर रिजर्व बैंक इस प्रïवाह को खरीदता है, जिससे स्थानीय मुद्रा बहुत मजबूत न हो।  सितंबर 2017 की शुरुआत मेंं पहली बार भंडार 400 अरब डॉलर पर पहुंचा था और रिजर्व बैंंक ने अपने भंडार में जनवरी 2017 के बाद 40 अरब डॉलर जोड़ा था। यह 27 अरब डॉलर के करीब ऋण और इक्विटी में पोर्टफोलियो प्रवाह की वजह से हुआ था। इस कैलेंडर वर्ष में पोर्टफोलियो प्रवाह की उल्टी चाल शुरू हुई है। लेकिन ऐसा नहीं हुआ कि अचानक निकासी हुई हो। इक्विटी व ऋण की निकासी 7 अरब डॉलर रही, जबकि सिर्फ ऋण क्षेत्र की 6 अरब डॉलर की हिस्सेदारी रही। 
 
इस समय भी केंद्रीय बैंक आक्रामक रूप से हस्तक्षेप कर रहा है क्योंकि चीन ने डॉलर के मुकाबले अपनी मुद्रा का अवमूल्यन कर दिया है और भारत सहित सभी देशों की मुद्रा का अवमूल्यन हुआ है। लेकिन मुद्रा भंडार में हाल में आई गिरावट का यह मतलब नहीं है कि यह स्थिति जारी रहेगी। मुद्रा गिरने पर देश आकर्षक निवेश केंद्र बनता है।  एचएसबीसी इंडिया के फिक्स्ड इनकम, ग्लोबल मार्केट के प्रमुख मनीष वाधवा ने कहा, 'पिछले 6 महीने में इक्विटी व ऋण में भारत से एफपीआई आउटफ्लो करीब 6.5 अरब रुपये हुआ है और रिजर्व बैंक द्वारा करीब 25-26 अरब डॉलर के हस्तक्षेप का असर भंडार में गिरावट के रूप में नजर आ रहा है। ऐसे में गिरावट नजर आ  सकती है। उभरते बाजारों में स्थिरता आ रही है, जिसका भारत पर सकारात्मक असर हो सकता है।' 
 
वाधवा ने कहा, 'कारोबार का तनाव, फेड की कार्रवाई, जिंस बाजार खासकर तेल, उभरते बाजारोंं की मुद्रा खासकर युआन प्रमुख कारक हैं, जिन पर नजर रखने की जरूरत है। तेल के ज्यादा दाम की वजह से भारत के चालू खाते पर असर होगा लेकिन रुपये में हाल की गिरावट की वजह से प्रवाह बहाल होगा क्योंकि निवेशकों के लिए संपत्तियां आकर्षक बनेंगी। दरअसल रिजर्व बैंक के हस्तक्षेप से मुद्रा बाजार में स्थिरता रही है।' लेकिन अगर रिजर्व बैंक अपना भंडार बढ़ाता है या इसे आगे और गिरने से रोकता है तो केंद्रीय बैंक के पास कई और विकल्प हैं। उदाहरण के लिए वह पूंजी नियंत्रण लागू कर सकता है। लेकिन निवेश केंद्र के हिसाब से उन कदमों का देश पर नकारात्मक असर पड़ेगा। केंद्रीय बैंंक तेल विपणन कंपनियों के साथ डॉलर स्वैप सुविधा शुरू कर सकता है, जैसा कि 2013 में हुआ था। इसके तहत तेल कंपनियां रिजर्व बैंक से सीधे डॉलर प्राप्त करती हैं और बाद में वापस कर देती हैं। इसमें बाजार में हस्तक्षेप नहीं किया जाता है और रिजर्व बैंक के बहुत ज्यादा हस्तक्षेप की जरूरत खत्म हो जाती है। 
 
बहरहाल इस समय बेहतरीन राह यह लगती है कि जमा योजनाओं से डॉलर जुटाया जाए जैसा कि 2013 में किया गया था। उस समय रिजर्व बैंक ने प्रवासी भारतीयों से या डॉलर में सॉवरिन बॉन्ड जारी कर करीब 32 अरब डॉलर जुटाए थे। लेकिन यह विकल्प अभी दूर है और ऐसा तभी किया जा सकता है जब स्थिति नियंत्रण में नजर आए।  भारतीय स्टेट बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री सौम्यकांति घोष ने कहा, 'अगर हम ऐसा करते हैं तो हमें मजबूती की स्थिति में करना होगा न कि कमजोर स्थिति में। इस स्थिति में एनआरआई जमा से बाजार में घबराहट की स्थिति आएगी। हमारा भंडार 10 साल में 100 अरब डॉलर से ऊपर आया। यहां तक कि अगर यह अब 10-15 अरब डॉलर गिर भी जाता है तो यह चिंता का विषय नहीं होगा।' घोष के मुताबिक भंडार की कोई भी मात्रा मुद्रा संकट खत्म करने के लिए पर्याप्त नहीं है और अगर भंडार कम होता है तो उसके सिर्फ उसके आंकड़े का कोई मतलब नहीं है।  
 
तमाम अर्थशास्त्रियों का यह भी कहना है कि आने वाले दिनों में जब अमेरिका चीन कारोबारी तनाव घटेगा तो स्थिति नियंत्रण में आ जाएगी। ईरान तेल संकट पहले ही सुधार के संकेत दे रहा है। यह रुपये के लिए बेहतर होगा और निश्चित रूप से पोर्टफोलियो प्रवाह बहाल होगा। 
Keyword: RBI, money, विदेशी मुद्रा भंडार,
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