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आखिर क्या बताता पैन कार्ड की संख्या में हुआ इजाफा?

दिल्ली डायरी
ए के भट्टाचार्य /  July 25, 2018

केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने स्थायी खाता संख्या (10 अंकों वाला पैन) से जुड़ा नया आंकड़ा जारी किया है। यह नया आंकड़ा देश और उसकी जननांकीय स्थितियों के बारे में काफी कुछ बताता है। पैन नंबर आयकर विभाग द्वारा हर कर दाता को जारी किया जाता है। मार्च 2018 के अंत में कर दाताओं की 10 श्रेणियों में कुल 37.9 करोड़ पैन जारी किए जा चुके हैं। कुल पैन का 97.5 फीसदी यानी 36.9 करोड़ पैन व्यक्तिगत हैं। अन्य श्रेणियों में व्यक्तियों का संघ, व्यक्तियों की संस्था, कंपनी, फर्म, सरकार, हिंदू अविभाजित परिवार, कृत्रिम विधिक व्यक्ति, स्थानीय प्राधिकार या न्यास आदि शामिल हैं। यानी इनकी संख्या गत वित्त वर्ष के अंत तक कुल जारी पैन का महज 2.5 फीसदी है। 

 
इन आंकड़ों की तुलना मार्च 2017 के अंत में उपलब्ध आंकड़ों से करते हैं तो पता चलता है कि हाल के दिनों में पैन जारी करने की गति में जबरदस्त तेजी रही है।  इस एक वर्ष में पैन की तादाद 28 फीसदी बढ़ी है। यानी अप्रैल 2017 से मार्च 2018 के बीच करीब 8.5 करोड़ नए पैन जारी किए गए हैं। इनमें से 8.4 करोड़ पैन व्यक्तिगत थे। यानी हर महीने 70 लाख नए पैन धारक बने।  देश में व्यक्तिगत पैन धारकों की संख्या को देश की कुल आबादी के सापेक्ष रखकर देखना होगा। एक अनुमान के मुताबिक देश की आबादी करीब 1.3 अरब है। राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण के 68वें दौर के आधार पर अगर माना जाए कि कुल आबादी का 36 फीसदी काम करता है तो देश की श्रम करने योग्य आबादी करीब 47 करोड़ होनी चाहिए। श्रम शक्ति के 45 फीसदी या कहें करीब 20.7 करोड़ लोग कृषि कार्य में लगे होंगे और उनमें से अधिकांश आय कर दायरे से बाहर होंगे। उनके पास पैन नहीं होगा। सवाल यह है कि ऐसे में 36.9 करोड़ लोगों को पैन जारी होने का क्या अर्थ है? क्या कर दायरा बढ़ाने के लिए ज्यादा पैन जारी करने से कई ऐसे लोगों ने भी पैन कार्ड ले लिए हैं जो वास्तव में करदाता हैं ही नहीं। 
 
शायद यही वजह है वर्ष 2017-18 में केवल 6.84 करोड़ कर रिटर्न भरे गए जो देश के कुल पैन धारकों का बमुश्किल 18 फीसदी थे। वर्ष 2016-17 में 5.43 करोड़ रिटर्न दाखिल किए गए थे जबकि मार्च 2017 के अंत में व्यक्तिगत पैन धारकों की संख्या 28.6 करोड़ थी। यह सच है कि कर रिटर्न में यह इजाफा पैन धारकों की संख्या में इजाफे के अनुरूप ही है। परंतु कुल पैन धारकों की तुलना में अत्यंत कम रिटर्न दाखिल होने का परीक्षण अवश्य किया जाना चाहिए। पता लगाया जाना चाहिए कि मसला केवल अनुपालन का है या पैन लेने का कोई और भी उद्देश्य है।
 
पैन कार्ड की तादाद में इस व्यापक इजाफे की वजह यह भी हो सकती है कि हमारा तंत्र बिना पूरी जांच परख के जारी कराए गए गलत पैन नंबरों की पड़ताल करने में नाकाम रहा हो। ऐसी कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं जहां कोई व्यक्ति एक से अधिक पैन कार्ड रखता हो। यह एक बड़ी चूक है। पैन धारकों को अपने पैन नंबर आधार के साथ जोडऩे के लिए प्रेरित करने की एक वजह यह भी थी कि आयकर विभाग अपने डेटा बेस में से नकली आंकड़े छांट सके। फिर भी 12 मार्च 2018 तक केवल 16.8 करोड़ पैन कार्ड ही आधार से जुड़े थे। यह उस समय तक जारी 36.5 करोड़ की संख्या से तकरीबन आधा था।
 
हालांकि बीते एक साल में व्यक्तिगत पैन कार्ड धारकों के लैंगिक अनुपात में सुधार हुआ है। मार्च 2017 के अंत तक व्यक्तिगत पैन धारक पुरुष थे और शेष महिलाएं। मार्च 2018 तक पैन धारकों में पुरुषों की हिस्सेदारी घटकर 65 प्रतिशत हो गई। महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़कर 35 फीसदी हो गई। यह हमारी श्रम शक्ति में महिलाओं की कम भागीदारी की समस्या को भी उजागर करता है। अनुमान के मुताबिक कामकाजी उम्र की महिलाओं में केवल 27 फीसदी ही काम करती हैं। परंतु यह स्पष्टï है कि पैन के लिए महिलाओं का बढ़ता नामांकन श्रम शक्ति में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का प्रतीक है। 
 
एक सवाल यह भी है कि क्या नवंबर 2016 में हुई नोटबंदी के चलते भी पैन कार्ड धारकों की संख्या में इजाफा हुआ है? 8 नवंबर 2016 को जब 86 फीसदी प्रचलित नकदी बंद करने की घोषणा की गई, उसके तत्काल बाद पैन धारकों की संख्या में इजाफा नहीं हुआ। मार्च 2016 में पैन कार्ड धारकों की अनुमानित संख्या 24.6 करोड़ थी जो मार्च 2017 तक मात्र 16 फीसदी बढ़कर 28.5 करोड़ हुई। मार्च 2017 के बाद के 12 महीनों में इनकी संख्या 29 फीसदी बढ़कर 36.9 करोड़ हो गई। ऐसा लगता है कि आयकर विभाग ने पैन कार्ड का आवंटन बढ़ाने के लिए जो अभियान चलाया, उसने नोटबंदी के बाद के महीनों में गति पकड़ी। अब जब सरकार पैन कार्ड के दोहराव और नकलीपन की समस्या से उबर जाएगी तभी असली तस्वीर उबरकर सामने आएगी। तब आने वाले वर्षों में इन पैन कार्ड धारकों द्वारा दाखिल किए जाने वाले कर रिटर्न में इजाफा देखने को मिलेगा। 
Keyword: PAN, card, income tax, CBDT, आयकर विभाग कराधान,
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