बिजनेस स्टैंडर्ड - खेतों में फैला तो मंंडी में सिकुड़ा सोयाबीन
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खेतों में फैला तो मंंडी में सिकुड़ा सोयाबीन

सुशील मिश्र / मुंबई 07 24, 2018

बुआई 10 फीसदी बढ़ी, हाजिर बाजार में गिरावट

सोयाबीन का रकबा पिछले साल से 10 फीसदी बढ़ा
खरीफ सीजन में सोयाबीन का सामान्य रकबा है 112.51 लाख हेक्टेयर
औसतन 94.21 लाख हेक्टेयर में होती है सोयाबीन की बुआई
अब तक 93.97 लाख हेक्टेयर रकबे में हो चुकी है बुआई

बिजनेस स्टैंडर्ड खेतों में फैला तो मंंडी में सिकुड़ा सोयाबीनदेश के कई हिस्सों में मॉनसून की बेरुखी के कारण चालू खरीफ सीजन फसलों की बुआई भले ही बेहतर न हो लेकिन सोयाबीन का रकबा बेहतर बुआई को दर्शाता है। दूसरी फसलों की अपेक्षा सोयाबीन फायदे की उम्मीद बढऩे के कारण किसानों ने इस साल सोयाबीन की बुआई को प्राथमिकता दी है। पिछले साल की अपेक्षा सोयाबीन की बुआई करीब 10 फीसदी अधिक हो चुकी है। बेहतर बुआई के कारण सोयाबीन की कीमतें भी प्रभावित होना शुरू हो गई है। उत्तर भारत में मॉनसून कमजोर पड़ने की आशंकों के कारण सोयाबीन में तेजी ताजा बुआई आंकड़ों के साथ धुलना शुरू हो गई।

कमोडिटी रिपोर्ट के मुताबिक सोयाबीन का रकबा बढऩे के साथ सोया खली की मांग कमजोर पडऩे के कारण पेराई मिलों की मांग कम हुई है जिससे कीमतें दबाव में आ गई है। हाजिर बाजार में सोयाबीन के दाम गिरकर 3,340 रुपये प्रति क्विंटल पहुंच गए जबकि वायदा बाजार एनसीडीईएक्स में सोयाबीन के दाम गिरकर 3,350 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। सोया खली 300 रुपये गिरकर 2,800 रुपये प्रति टन हो गई। तिलहन कारोबारी शिव सिंह का कहना है कि पिछले सप्ताह तक मिलों की तरफ से खरीदी जमकर हो रही थी जो अब कमजोर पड़ गई है। पिछले साल की अपेक्षा बुआई अधिक होने की खबरें आ रही हैं जिससे पेराई मिलों को लग रहा है कि स्टॉक करने की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि दाम इससे ज्यादा नहीं बढऩे वाले हैं जबकि स्टॉक करने में खर्च ज्यादा है। 

सोयाबीन उत्पादक प्रमुख राज्य मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान में बारिश अच्छी होने के कारण तिलहन की बुआई बेहतर हुई है जिसमें सबसे अधिक सोयाबीन की बुआई हुई। मध्य प्रदेश में बारिश होने के कारण सोयाबीन के रकबे में सुधार हुआ। ताजा सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश में सोयाबीन का रकबा पिछले साल की अपेक्षा 10 फीसदी बढ़कर 94 लाख हेक्टेयर पहुंच गया। केंद्रीय कृषि मंत्रालय के मुताबिक खरीफ सीजन में सोयाबीन का सामान्य रकबा 112.51 लाख हेक्टेयर है जिसमें से औसतन 94.21 लाख हेक्टेयर में सोयाबीन की बुआई होती है।

इस साल अभी तक 93.97 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बुआई हो चुकी है जिसके आधार पर कृषि मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि चालू सीजन में करीब-करीब सोयाबीन की बुआई पूरी हो चुकी है। सबसे ज्यादा बुआई मध्य प्रदेश में 44.41 लाख हेक्टेयर में हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक राज्य में 40.12 लाख हेक्टेयर में सोयाबीन की बुआई हुई थी। कुल तिलहन फसलों की बुआई को देखा जाए तो मध्य प्रदेश में 46.47 लाख हेक्टेयर में तिलहन फसलों की बुआई हुई है जबकि पिछले साल राज्य में 19 जुलाई तक राज्य में तिलहन फसलों की बुआई 44.13 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में हुई थी। 

सोयाबीन सहित सभी तिलहन फसलों की सबसे बेहतर बुआई महाराष्ट्र में हुई है। केंद्रीय कृषि मंत्रालय और महाराष्ट्र कृषि मंत्रालय के बुआई आंकड़ों के मुताबिक राज्य में 19 जुलाई तक 32.12 लाख हेक्टेयर में सोयाबीन की बुआई हुई जबकि पिछले साल इसी अवधि तक 30 लाख हेक्टेयर में सोयाबीन की बुआई हुई थी और राज्य में सोयाबीन का औसत रकबा 26.80 लाख हेक्टेयर एवं सामान्य रकबा 35.84 लाख हेक्टेयर है।

केंद्रीय कृषि मंत्रालय के अनुसार राज्य में तिलहन फसलों की बुआई 33.76 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है। पिछले साल इस समय तक महाराष्ट्र में तिलहन फसलों की बुआई 32.76 लाख हेक्टेयर में हुई थी जबकि राज्य में खरीफ सीजन के दौरान तिलहन का औसत रकबा 28.42 लाख हेक्टेयर बताया जा रहा है। सरकारी आंकड़ों से साफ है कि राज्य में सोयाबीन की बुआई औसत रकबे को पार कर चुकी है। 

मध्य प्रदेश के अलावा राजस्थान में भी सोयाबीन सहित दूसरे तिलहन फसलों की बुआई औसत से अधिक हो चुकी है। राजस्थान में सोयाबीन की बुआई 9.45 लाख हेक्टेयर में हुई। पिछले साल इसी अवधि तक राज्य में 7.86 लाख हेक्टेयर में सोयबीन की बुआई हुई थी। खरीफ सीजन के दौरान राज्य में सोयाबीन का औसत रकबा 8.32 लाख हेक्टेयर और सामान्य रकबा 10.79 लाख हेक्टेयर माना जाता है। कुल तिलहन फसलों का रकबा भी पिछले साल की अपेक्षा अधिक है इस साल अभी तक राज्य में तिलहन फसलों का रकबा 16.37 लाख हेक्टेयर पहुंच चुका है।

महाराष्ट्र कृषि मंत्रालय के अधिकारियों की मानी जाए तो राज्य में तिलहन की बुआई लक्ष्य के करीब पहुंच चुकी है। अभी भी बुआई चालू है जिसको देखते हुए उम्मीद की जा रही है कि तिलहन फसलों की बुआई औसत रकबे को पार कर जाएगी। इसकी सबसे प्रमुख वजह न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में बढ़ोतरी है। चालू खरीफ सीजन में सोयाबीन का एमएसपी बढ़ाकर 3,399 रुपये प्रति क्विंटल किया गया है जो पिछले खरीफ सीजन मेंं 3,050 रुपये प्रति क्विंटल था। 

Keyword: agri, farmer, crop, monsoon, nutrela,,
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