बिजनेस स्टैंडर्ड - काले धन पर सरकार की सफाई
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काले धन पर सरकार की सफाई

दिलाशा सेठ और अर्चिस मोहन / नई दिल्ली 07 24, 2018

2013 से 2017 के बीच बदलाव, 80.2 प्रतिशत की कमी आई

साल    गैर बैंक (ऋण और जमा) आंकड़े करोड़ डॉलर में
बिजनेस स्टैंडर्ड काले धन पर सरकार की सफाई 2017    52.2
2016    80.0
2015    144.7
2014    223.4
2013    264.8

स्विट्जरलैंड के बैंकों में भारतीयों का काला धन बढऩे की खबरों से चौतरफा हमलों में घिरी सरकार ने आज दावा किया कि 2017 में स्विस बैंकों में भारतीयों के काले धन में पिछले साल के मुकाबले करीब 35 फीसदी की कमी आई और 2014 में मोदी सरकार बनने के बाद यह 80 फीसदी घटा है।  वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने राज्य सभा में कहा, '2014 में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की सरकार बनने के बाद से 2017 के अंत तक स्विस बैंकों में जमा राशि में 80 फीसदी की कमी आई है।' केंद्रीय बैंकों की अंतरराष्ट्रीय संस्था बैंक फॉर इंटरनैशनल सेटलमेंट्स (बीआईएस) के आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने इन खबरों से इनकार किया कि स्विस बैंकों में भारतीयों द्वारा जमा कराई जाने वाली राशि में 50 फीसदी बढ़ोतरी हुई है। पिछले महीने स्विस नैशनल बैंक के हवाले से यह दावा किया गया था। 

वित्त मंत्रालय के तहत आने वाले केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने भी कहा कि स्विस नैशनल बैंक के आंकड़ों की अक्सर गलत व्याख्या की जाती है क्योंकि इसमें गैर जमा देनदारी, स्विस बैंकों की भारत में स्थित शाखाओं के कारोबार और अंतरबैंक लेनदेन और बाकी देनदारियों को भी शामिल किया जाता है। गोयल ने कहा कि सरकार ने स्विस बैंकों से 4,000 तरह की सूचनाएं मांगी थीं और इसके आधार पर सरकार कार्रवाई करेगी। 2017 में गैर बैंक जमा राशि 52.4 करोड़ डॉलर रह गई जो 2016 में 80 करोड़ डॉलर और 2014 में 223.4 करोड़ डॉलर थी। 

सीबीडीटी ने भारत में स्विट्जरलैंड के राजदूत आंद्रेस बॉम के एक पत्र भी दिखाया जिसमें कहा गया है कि भारतीयों द्वारा स्विस बैंकों में जमा राशि को काला धन नहीं माना जा सकता है। बॉम ने पत्र में कहा है कि मीडिया रिपोर्टों में आंकड़ों की सही व्याख्या नहीं की गई है। इसी कारण भ्रामक सुर्खियां और विश्लेषण किया गया है। आम धारणा यह है कि अगर किसी भी भारतीय ने स्विट्जरलैंड में पैसा जमा कर रखा है तो वह काला धन होगा। उन्होंने कहा कि भारतीयों की जमा राशि की पहचान का सही जरिया बीआईएस द्वारा जारी आंकड़े हैं। 2016 और 2017 के बीच स्विट्जरलैंड के बैंकों की भारतीय गैर बैंकों के प्रति ऋण और जमा के रूप में देनदारी 44 फीसदी घटी है। 

राज्य सभा में प्रश्नकाल के दौरान तृणमूल कांग्रेस के सुखेंदु शेखर रॉय ने विदेशों में भारतीयों द्वारा जमा कराई गई राशि पर सवाल पूछा। वित्त मंत्री से संतोषजनक उत्तर नहीं मिलने पर तृणमूल के सदस्यों ने सदन के बीचोंबीच आकर हंगामा किया। इस पर सभापति एम वेंकैया नायडू को सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।  रॉय के पूरक सवाल पूछने से पहले गोयल ने इस बारे में इंडियन नैशनल लोक दल के सदस्य राम कुमार कश्यप के सवालों का जवाब दिया था। विपक्ष के कई सदस्यों ने जानना चाहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वादे के मुताबिक स्विस बैंकों में जमा काले धन से देश लोगों के खातों में 15 लाख रुपये कब आएंगे। गोयल ने इसे नजरअंदाज किया लेकिन रॉय के सवालों से वह घिर गए। रॉय ने कहा कि दो दशक से अधिक समय के दौरान भारत ने स्विट्जरलैंड के साथ कई समझौते किए हैं। उन्होंने कहा कि दोहरे कराधान से बचने का समझौता 29 दिसंबर, 1994 को लागू किया गया था और उसके बाद 2011 और 2018 में भी समझौते हुए। 

रॉय ने कहा, 'पिछले 24 साल के कई समझौते लागू किए गए। मैं यह जानना चाहता हूं कि स्विट्जरलैंड से अब तक भारतीयों का कितने काले धन मिला है। कितने मामलों में कार्रवाई शुरू की गई है और लोगों के खाते में 15 लाख रुपये कब जाएंगे।' इस पर वित्त मंत्री ने कहा कि रॉय के पास कुछ जानकारी हो सकती है जो सरकार के पास नहीं है। अगर उन्हें काले धन के बारे में कोई भी जरानकारी है तो उन्हें यह सरकार को देनी चाहिए ताकि सरकार इस पर कार्रवाई कर सके। इस पर विपक्षी सदस्यों खासकर तृणमूल के सदस्यों ने आपत्ति जताई। सभापति ने भी वित्त मंत्री को सवाल का जवाब देने को कहा। इस पर गोयल से जवाब देते नहीं बना और तृणमूल के सदस्य सदन के बीचोंबीच काला धन वापास लाओ के नारे लगाने लगे। इस पर सभापति ने कुछ देर के लिए सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी। 
Keyword: Switzerland, black money, bank,,
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