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प्रवर्तक बन पाएंगे आम शेयरधारक

बीएस संवाददाता / मुंबई July 24, 2018

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड ने प्रवर्तकों को सार्वजनिक शेयरधारकों के तौर पर दोबारा वर्गीकृत किए जाने के संबंध में तीन चरण वाली प्रक्रिया का प्रस्ताव मंगलवार को रखा। पहले चरण में संबंधित प्रवर्तक या कंपनी को स्टॉक एक्सचेंज में आवेदन कर दोबारा वर्गीकरण का अनुरोध करना होगा। अगले चरण में यह अनुरोध कंपनी के निदेशक मंडल के पास जाएगा। इसके बाद बोर्ड अपनी सिफारिशें देगा और इसे शेयरधारकों के सामने रखा जाएगा। तीसरे व आखिरी चरण में प्रस्ताव आम बैठक में शेयरधारकों के सामने रखा जाएगा और इसे सामान्य वोटिंग के जरिए मंजूरी हासिल करनी होगी। संबंधित प्रवर्तक को ऐसे प्रस्ताव पर वोट देने की अनुमति नहीं दी जाएगी। साथ ही प्रवर्तक के अनुरोध पर विचार के लिए बोर्ड बैठक की तारीख और शेयरधारकों की बैठक के बीच थोड़ा वक्त होगा।
 
सेबी ने एक चर्चा पत्र में कहा है, ऐसे चरणों से सुनिश्चित हो पाएगा कि सभी हितधारकों के हितों को संरक्षित करने के लिए पर्याप्त नियंत्रण व संतुलन का इस्तेमाल हुआ। इस मसले पर कोटक कमेटी और प्राइमरी मार्केट एडवाइजरी कमेटी की सिफारिशों के आधार पर चर्चा पत्र जारी किए गए हैं। न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता के नियम लागू करते समय पुनर्वर्गीकरण का मामला महत्वपूर्ण हो गया था। 25 फीसदी न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता के नियमों के अनुपालन के लिए कुछ इकाइयों ने खुद को सामान्य शेयरधारक के तौर पर पुनर्वर्गीकृत कर लिया था ताकि नियमों का अनुपालन हो जाए।
 
सेबी ने ऐसे पुनर्वर्गीकरण के लिए पात्रता मानदंड तय किए हैं ताकि सुनिश्चित हो कि सामान्य शेयरधारक बनने वाले प्रवर्तक सूचीबद्ध इकाई पर प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष तौर पर नियंत्रण न रख पाए और इस तरह से प्रवर्तक का तमगा हटा ले। इन शर्तों में से कुछ इस प्रकार हैं - प्रवर्तक समूह किसी सूचीबद्ध इकाई में कुल वोटिंग का 10 फीसदी से ज्यादा नहीं रख पाएगा, प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तरीके से सूचीबद्ध इकाई की गतिविधियों पर नियंत्रण नहीं रख पाएगा और इसे कोई विशेष अधिकार नहीं होगा या बोर्ड में प्रतिनिधित्व नहीं होगा।
 
सेबी ने गैर-अनुपालन वाली इकाइयों या इरादतन चूककर्ताओं इस पुनर्वर्गीकरण से दूर रखने का प्रस्ताव रखा है। इसके अलावा नियामक ने कहा  है कि पुनर्वर्गीकरण की अनुमति उन इकाइयों को मिलेगी जिन्होंने न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता के नियमों का अनुपालन किया है। अगर कंपनी का प्रबंधन पेशेवर कर रहे हों तो इस मामले में सेबी ने कहा है कि उन्हें सूचीबद्ध इकाई माना जा सकता है, जिसके कोई प्रवर्तक नहीं हैं। सेबी ने कहा, किसी सूचीबद्ध इकाई को बिना प्रवर्तक वाली सूचीबद्ध इकाई माना जा सकता है अगर पुनर्वर्गीकरण या अन्य वजहों से इस इकाई के कोई प्रवर्तक न हों।
 
सेबी ने अपने प्रस्ताव में कहा है, किसी शेयरधारक के पुनर्वर्गीकरण की अनुमति स्टॉक एक्सचेंज ही दे पाएगा। इस बीच, अगर कोई आम शेयरधारक खुद को प्रवर्तक के तौर पर पुनर्वर्गीकृत करना चाहता हो तो इसे नियामक के प्रस्ताव के मुताबिक खुली पेशकश लानी होगी। नियामक ने उन सूचीबद्ध इकाइयों को छूट देने का प्रस्ताव किया है जहां दिवालिया कार्यवाही शुरू की गई हो। बाजार नियामक ने इस प्रस्ताव पर 16 अगस्त तक सार्वजनिक टिप्पणी आमंत्रित की है, इसके बाद नियमों को अंतिम रूप दिया जाएगा।
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