बिजनेस स्टैंडर्ड - ‘2017 में 50 लाख नौकरियों का सृजन’
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‘2017 में 50 लाख नौकरियों का सृजन’

इंदिवजल धस्माना / नई दिल्ली 07 23, 2018

नौकरियों पर बहस

एएसके डब्ल्यूए के मुताबिक गैर कृषि क्षेत्र में मिलीं 50 लाख नौकरियां
नए आंकड़े सीएमआईई की तरह निराशाजनक या घोष ऐंड घोष की तरह अति आशावादी नहीं

बिजनेस स्टैंडर्ड ‘2017 में 50 लाख नौकरियों का सृजन’संपत्ति प्रबंधन फर्म एएसके वेल्थ एडवाइजर्स की रिपोर्ट ने नौकरियों के सृजन को लेकर बहस और तेज कर दी है। एएसके के मुताबिक देश में गैर कृषि क्षेत्र में 2017 में करीब 50 लाख नौकरियों का सृजन हुआ है, जो अर्थव्यवस्था का करीब 50 प्रतिशत है। यह आंकड़े सीएमआईई (सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडिया इकोनॉमी) के 2017 में 20 लाख नौकरियों के सृजन के अनुमान से ज्यादा है, लेकिन घोष ऐंड घोष (भारतीय स्टेट बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री सौम्यकांति घोष और भारतीय प्रबंध संस्थान बेंगलूर के प्रोफेसर पुलक घोष) के अनुमान से बहुत कम है। ईपीएफ ग्राहकों के आंकड़ों के आधार पर घोष ऐंड घोष ने 2017-18 में गैर कृषि क्षेत्र में सिर्फ औपचारिक क्षेत्र में 70 लाख नौकरियों के सृजन का अनुमान लगाया था। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कहा था कि कि सितंबर 2017 और मई 2018 के बीच 9 महीनों के दौरान 45 लाख नए ग्राहक ईपीएफओ से जुड़े हैं, जिनमें से 77 प्रतिशत 28 साल से कम उम्र के हैं। एसके का अनुमान उतना शानदार नजर नहीं आता, जो प्रधानमंत्री ने पेश किया था। एएसके वेल्थ एडवाइजर्स के मैनेजिंग पार्टनर सोमनाथ मुखर्जी ने कहा, ‘रोजगार का वास्तविक सृजन इतना खराब भी नहीं है कि साल में नौकरियों का सृजन 20 लाख है। परंपरागत रोजगार सर्वे के मुताबिक सिर्फ गैर कृषि क्षेत्र में औपचारिक नौकरियों का सृजन 50 से 70 लाख होने की उम्मीद जताई गई है, जैसा कि ईपीएफओ के आंकड़ों से पता चलता है।’ 

नए अध्ययन में रोजगार के अनुमान के लिए तीन अलग स्रोतों का इस्तेमाल किया गया है। इसमें वाणिज्यिक रियल एस्टेट क्षेत्र में रोजगार के आंकड़े लिए गए हैं, जिससे शहरी कार्यालयों में रोजगार के सृजन का पता चलता है। बहरहाल मुखर्जी ने कहा कि ज्यादातर नई नौकरियों का सृजन गैर कार्यालयी ज्यादा रोजगार वाले क्षेत्रों जैसे विनिर्माण क्षेत्र में फैक्टरियों में, निर्माण स्थलों, रिटेल क्षेत्र, हॉस्पिटलिटी, शिक्षा और चिकित्सा सुविधाओं में हुआ है। इस क्षेत्र का अनुमान लगाने के लिए एएसके ने श्रम ब्यूरो के रोजगार के तिमाही अनुमान का इस्तेमाल किया है। 

आखिर में उद्योग संगठनों से आंकड़े लिए गए हैं, जिससे लोगों को मिलने वाले रोजगार का अनुमान लगाया जा सके। संगठनों से ‘ऑन द गो (ओटीजी’ के आंकड़े लिए गए हैं, जिनमें ई कॉमर्स, ट्रांसपोर्ट, लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउस क्षेत्र शामिल है। न स्रोतों का इस्तेमाल कर एएसके ने अनुमान लगाया है कि शहरी कार्यालयों में 2017 में 9 लाख लोगों को रोजगार मिला है। गैर कार्यालय क्षेत्रों में 30 लाख नौकरियों का सृजन हुआ है। वहीं अनुमान के मुताबिक करीब 10 लाख नौकरियों का सृजन ओटीजी क्षेत्रों में हुआ है।

यह पूछे जाने पर कि अगर श्रम ब्यूरो तिमाही आंकड़े रोक देता है तो एएसके गैर कार्यालयी रोजगार का अनुमान कैसे लगाएगा, मुखर्जी ने कहा कि वे ईपीएफओ पेरोल सर्वे के आंकड़े इस्तेमाल करेंगे, लेकिन तभी, जब इसमें स्थिरता आ जाए। र्व मुख्य सांख्यिकीविद टीसीए अनंत की अध्यक्षता में बनी समिति तिमाही सर्वे की समीक्षा कर रही है। मुखर्जी ने कहा कि इस समय ईपीएफओ पेरोल सर्वे में बहुत दोहराव है। इसे स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि ईपीएफओ ने कर्मचारियों को खुद को ईपीएफओ में पंजीकृत कराने के लिए तमाम कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि इसकी वजह से आंकड़े बढ़ गए हैं। उन्होंने कहा कि जहां तक घोष ऐंड घोष द्वारा दिए गए आंकड़ों का सवाल है, यह बढ़ा चढ़ाकर दिखाए गए हैं। साथ ही स्थिति उतनी भी खराब नहीं है, जैसा सीएमआईई ने दिखाया है। 
Keyword: संपत्ति प्रबंधन, फर्म, एएसके वेल्थ एडवाइजर्स, भारतीय स्टेट बैंक, Bank, सौम्यकांति घोष,
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