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संरक्षणवाद के खिलाफ बनेगा मोर्चा

बीएस संवाददाता / नई दिल्ली July 23, 2018

प्रधानमंत्री 10वें ब्रिक्स (ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका) सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए 25 जुलाई को दक्षिण अफ्रीका जा रहे हैं। उम्मीद है कि इस सम्मेलन में ब्रिक्स देश डॉनल्ड ट्रंप के संरक्षणवाद के खिलाफ एकजुट होंगे। इसके अलावा बैठक में व्यापक वित्तीय एकीकरण और निवेश को लेकर चर्चा हो सकती है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया कि हाल ही में ब्यूनस आयर्स में में जी-20 के वित्त मंत्रियों की बैठक में इस दिशा में कदम उठाने का फैसला किया गया था। उन्होंने कहा कि सम्मेलन के बाद 27 जुलाई को संयुक्त घोषणा पत्र जारी होगा, जिसमें बढ़ते संरक्षणवाद की आलोचना के साथ वित्तीय बाजार के व्यापक एकीकरण पर चर्चा हो सकती है। 

ब्रिक्स के वाणिज्य मंत्रियों की 8वीं बैठक इस महीने की शुरुआत में दक्षिण अफ्रीका में हुई थी, जिसमें लगातार तीसरे साल बढ़ते वैश्विक संरक्षणवाद पर चिंता जताई गई थी। इसमें ज्यादा चिंता अमेरिका के कदमों को लेकर व्यक्त की गई, जो चीन का सबसे बड़ा कारोबारी साझेदार और भारत के लिए सबसे बड़ा निर्यात केंद्र है।  इससें विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के साथ कुछ मसलों पर गतिरोध खत्म करने को लेकर भी चर्चा हुई, जिसमें सदस्य देशों के बीच मूल्य वर्धित कर बढऩे पर पहली बार कराया गया अध्ययन शामिल है। 
 स्थानीय मुद्रा में सीधे निवेश और लेन देन के माध्यम से कारोबार के निपटान के विशेष मानक पर भी चर्चा होगी। वित्त मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा, ‘पिछले साल भर से वित्तीय क्षेत्र के नियामकों के बीच संचार बढ़ा है। हम इसे बनाए रखने पर विचार कर रहे हैं। इसमें ब्रिक्स इंटर बैंक कोऑपरेशन मैकेनिज्म की अहम भूमिका है।’ 

ये देश ‘ब्रिक्स इन्वेस्टमेंट फैसेलिटेशन’ पर भी आगे की बातचीत करेंगे, जिसके तहत सदस्य देशों के बीच निवेश को सुविधा मुहैया कराई जाएगी। दिल्ली के एक कारोबार विशेषज्ञ ने कहा, ‘दिलचस्प है कि भारत और चीन निवेश सुविधा प्रदान करने के मसले पर अलग अलग छोर पर खड़े हैं। चीन जहां डब्ल्यूटीओ में निवेश को लेकर कारोबारी सुविधा समझौते पर जोर दे रहा है वहीं भारत का कहन है कि ऐसा कोई कदम आम सहमति से ही उठाया जाना चाहिए।’

सेवाओं के कारोबार पर गरमागरम बहस हो सकती है क्योंकि इस क्षेत्र में भारत उदार मानकों का पक्षधर है, वहीं अन्य देशों की राय अपने बाजार के मुताबिक है. हाल ही में सेवाओं के कारोबार को लेकर इन देशों ने ब्रिक्स फोकल प्वाइंट का गठन किया है, जिससे सेवाओं के कारोबार पर प्राथमिक सूचनाओं का आदान प्रदान किया जा सके। 

वरिष्ठ सूत्रों ने कहा कि भारत और चीन के बीच कारोबार को लेकर द्विपक्षीय बातचीत भी हो सकती है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के फैसले से दोनों देशों के कारोबार पर असर पड़ा है। अमेरिका द्वारा शुल्क लगाए जाने को लेकर दोनों देश डब्ल्यूटीओ में करीब आए हैं। लेकिन चीन ने जहां भारत के तमाम उत्पादों पर शुल्क कम कर दिया है, वहीं भारत को इस पर पूरी तरह से प्रतिक्रिया देना बाकी है। साथ ही भारत ने चीन से सोलर सेल के आयात पर सेफगार्ड शुल्क लगाने की धमकी दी है। 

दोनों देशों ने 1 जुलाई को अपनी प्रतिबद्धता के तहत आयात शुल्क घटा दिया है, जिससे एशिया प्रशांत कारोबार समझौता (एपीटीए) के तहत कारोबार आसान बनाया जा सके। चीन ने जहां 8,500 वस्तुओं पर कर घटा दिया है, वहीं नई दिल्ली ने 3,142 वस्तुओं पर शुल्क कम कर दिया है। बहरहाल शुल्क कम किए जाने के बावजूद कारोबार की राह में बाधाएं बहुत ज्यादा हैं, खासकर उन सामानों पर जो गैर शुल्क वाली श्रेणी में हैं। फेडरेशन आफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन के महासचिव अजय सहाय ने कहा, ‘चीन की अर्थव्यवस्था सरकार की ओर से संचालित है औ्र ज्यादातर आयात सरकारी कंपनियों के ऑर्डर पर होता है। बाजार तक पहुंच, खासकर कृषि जिंसों और दवाओं का मसला अभी भी बना हुआ है। इनका समाधान किए जाने की जरूरत है।’ 
Keyword: ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, ब्रिक्स, prime minister, bricks, ब्यूनस आयर्स,
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