बिजनेस स्टैंडर्ड - जरूरत पड़े तो स्वास्थ्य बीमा कवर को करें ‘रिस्टोर’
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जरूरत पड़े तो स्वास्थ्य बीमा कवर को करें ‘रिस्टोर’

प्रियदर्शिनी माजी /  07 22, 2018

स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी

बिजनेस स्टैंडर्ड जरूरत पड़े तो स्वास्थ्य बीमा कवर को करें ‘रिस्टोर’अपने हिसाब से एकदम सटीक स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी खरीदना किसी के लिए भी बहुत उलझन भरा काम हो सकता है। अगर सही पॉलिसी का चुनाव करना है तो आपके पास तमाम पॉलिसियों से जुड़ी पुख्ता जानकारी होना जरूरी है ताकि आप जरूरी सहूलियत देने वाली पॉलिसी अपने लिए खरीद सकें।

किसी भी बीमा पॉलिसी का सबसे अहम हिस्सा उसकी राशि होती है यानी बीमा की कुल रकम कितनी है। बीमा कंपनियों का कहना है कि स्वास्थ्य बीमा के तहत किए जाने वाले महज 1-2 फीसदी दावे ही 3 लाख रुपये से अधिक के होते हैं और करीब 80 फीसदी दावे 60,000 से लेकर 80,000 रुपये के बीच के होते हैं। यह पढ़ने के बाद आपके जेहन में यह सवाल जरूर उठ रहा होगा कि अगर केवल 1-2 फीसदी दावे ही 3 लाख रुपये से अधिक रकम के होते हैं तो रिस्टोर का विकल्प क्यों अपनाया जाए? रिस्टोर पर भरोसा करने के बजाय अधिक राशि का कवर देने वाली बीमा पॉलिसी पर ही अंगुली क्यों न रखी जाए?

इसकी वजह भी जान लीजिए। किसी भी सामान्य स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी के तहत उतनी ही राशि का कवर यानी बीमा लाभ मिलता है, जितनी राशि का बीमा कराया जाता है। लेकिन अगर कोई गंभीर बीमारी हो जाए तो इसकी कमियां सामने आती हैं। गंभीर बीमारी की सूरत में इस बात की पूरी आशंका रहती है कि अस्पताल में पहली बार भर्ती होने पर ही समूचा बीमा कवर खर्च हो जाए। इसी मौके पर रिस्टोर का विकल्प आपके काम आता है।

स्टार हेल्थ ऐंड अलाइड इंश्योरेंस के कार्यकारी निदेशक एवं मुख्य विपणन अधिकारी आनंद रॉय कहते हैं, ‘रिस्टोर या रिफिल सुविधा वाली स्वास्थ्य बीमा योजना की खासियत यह है कि अगर किसी साल बीमा कवर की बुनियादी राशि खर्च हो जाती है तो कमोबेश पूरा कवर वापस भी आ जाता है।’

कहने का मतलब यह है कि बीमा पॉलिसी वर्ष शुरू होते ही अगर बीमाधारक के बीमा कवर की पूरी राशि खर्च हो गई तो भी रिस्टोर विकल्प वाले धारक के खाते में बीमा कवर की राशि फिर आ जाती है। अगर उसी वर्ष में एक बार फिर जरूरत पड़े तो वह उस राशि का दोबारा इस्तेमाल कर सकता है। मान लीजिए कि आपने 10 लाख रुपये कवर वाला बीमा कराया है। दुर्घटना होने या बीमार होने पर आपके इलाज में 8 लाख रुपये खर्च हो जाते हैं और बीमा कंपनी उस खर्च के दावे का भुगतान भी कर देती है। यहां तक तो तब सही है, लेकिन उसी साल आपको किसी अन्य वजह से अस्पताल में भर्ती होना पड़े और 5 लाख रुपये का खर्च आए तो क्या होगा? सामान्य स्वास्थ्य बीमा में बीमा कंपनी आपको 2 लाख रुपये ही देगी। लेकिन अगर आपने अपनी पॉलिसी में रिस्टोर का विकल्प चुन रखा है तो आपको इलाज पर खर्च हुए पूरे 5 लाख रुपये मिल जाएंगे।

अगर आपने अपने पूरे परिवार के लिए फ्लोटर स्वास्थ्य बीमा लिया है तो रिस्टोर विकल्प लेना और भी कारगर साबित होगा। इसकी वजह यह है कि परिवार के किसी सदस्य के इलाज पर अगर बीमा की पूरी रकम खर्च हो गई तो भी रिस्टोर विकल्प होने पर उतनी ही राशि वापस आ जाती है और किसी अन्य सदस्य के इलाज में उसका इस्तेमाल किया जा सकता है। 

सिग्ना टीटीके हेल्थ इंश्योरेंस के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्याधिकारी संदीप पटेल कहते हैं, ‘फ्लोटर पॉलिसी में अगर रिस्टोर विकल्प जोड़ लिया जाए तो परिवार के अलग-अलग सदस्य भी इसका फायदा उठा सकते हैं। इसकी वजह यह है कि एक बार खर्च हो चुकी बीमित राशि रिस्टोर विकल्प के तहत फिर से खाते में जुड़ जाती है।’ लेकिन इस बात का ध्यान रखना होगा कि धारक को दोबारा मिलने वाले बीमा कवर की राशि का इस्तेमाल नए दावे के लिए किया जाएगा, पहले वाले दावे के लिए नहीं। पटेल कहते हैं, ‘रिस्टोर विकल्प का इस्तेमाल उन बीमारियों के इलाज के लिए नहीं किया जा सकता है जिनका दावा पहले किया जा चुका हो।’ इसका मतलब यह है कि कोई पॉलिसीधारक अगर मधुमेह के इलाज के लिए बीमा का दावा कर चुका है तो रिस्टोर बीमा के जरिये आई रकम का इस्तेमाल फिर से मधुमेह के इलाज के लिए नहीं किया जा सकता।

विशेषज्ञों के मुताबिक यही शर्त रिस्टोर योजना की सबसे बड़ी खामी है। इसे खामी इसलिए बताया जा रहा है क्योंकि कोई भी व्यक्ति नई बीमारी के कारण अस्पताल कम ही जाता है। उसे पुरानी बीमारी दोबारा उभरने के कारण अस्पताल में भर्ती कराए जाने की आशंका अधिक रहती है। ऐसा हुआ तो उसे रिस्टोर योजना का फायदा ही नहीं मिल पाता है। स्वास्थ्य बीमा के मामले में हरेक कंपनी अलग-अलग कवर राशि प्रदान करती है। लेकिन कुछ पॉलिसियों में मामूली बीमारियों को भी शामिल कर लिया जाता है।

स्टार हेल्थ की फैमिली फ्लोटर योजना में रिस्टोर का विकल्प भी होता है और रिचार्ज का विकल्प भी। अगर आपकी पॉलिसी में ‘रिचार्ज’ का विकल्प है तो उसे उन बीमारियों के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है, जिनके लिए पहले ही दावा किया जा चुका है। इसके उलट ‘रिस्टोर’ के विकल्प को केवल उन बीमारियों के लिए ही इस्तेमाल किया जा सकता है, जिनके लिए पहले दावा नहीं किया गया है।

बीमा कवर की जो राशि रिस्टोर विकल्प के जरिये वापस आई है, अगर उसका इस्तेमाल बीमा वर्ष में नहीं होता है तो उसे अगले बीमा वर्ष में ले जाने की सुविधा नहीं मिलती। इस तरह रिस्टोर विकल्प ‘नो क्लेम बोनस’ की तरह काम नहीं करता, जिसे इस्तेमाल नहीं होने पर अगले बीमा वर्ष में ले जा सकते हैं। पटेल कहते हैं, ‘कुल बोनस या बोनस बूस्टर का हिसाब निकालते समय रिस्टोर की गई किसी भी बीमा राशि को शामिल नहीं किया जाएगा।’

ज्यादातर बीमा कंपनियां अधिक बीमा राशि वाली पॉलिसियों में ही रिस्टोर विकल्प चुनने की सुविधा देती हैं। यह विकल्प आम तौर पर उन्हीं पॉलिसियों में होता है, जिनमें बीमा राशि 3 लाख रुपये या उससे ज्यादा होती है। रॉय का कहना है, ‘बीमाधारक को अपनी जरूरत के हिसाब से यदि रिस्टोर लाभ की बंदिशों से चिंता होती है तो वह बीमा राशि बढ़ाने के लिए कह सकता है।’

Keyword: बीमा पॉलिसी, स्वास्थ्य बीमा, बीमा लाभ, स्टार हेल्थ ऐंड अलाइड इंश्योरेंस,
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