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फसल तैयार होने के बाद के काम में हो सकता है मनरेगा का विस्तार

संजीव मुखर्जी / नई दिल्ली 07 22, 2018

मनरेगा

केंद्र सरकार ने फसल तैयार होने के बाद के कामों जैसे मार्केट यार्ड, शेड्स की छटनी व ग्रेडिंग, कम्युनिटी मार्केट प्लेस का विस्तार आदि में मनरेगा के इस्तेमाल की योजना बनाई
इस दिशा में सावधानी से बढ़ा जा रहा है, क्योंकि मनरेगा के तहत मजदूरों को निजी कृषि श्रमिकों के रूप में इस्तेमाल की अनुमति नहीं है
सरकार मनरेगा सूची में अर्ध कुशल श्रमिकों में भी शामिल करने पर विचार कर रही है

बिजनेस स्टैंडर्ड फसल तैयार होने के बाद के काम में हो सकता है मनरेगा का विस्तारफसल तैयार होने के पहले और बाद के कामों में टिकाऊ परिसंपत्तियां तैयार करने में मनरेगा के विस्तार की सरकार की कवायद से संदेह पैदा हो गया है। इससे अनुमान लगाया जा रहा है कि बड़ी निजी जमीनों में कृषि श्रमिकों का इस्तेमाल सरकारी खजाने पर बोझ डालकर होगा। अगर ऐसा होता है तो इससे इस अधिनियम का पूरा आधार कमजोर हो जाएगा, जिसके लिए यह बनाया गया था।

हालांकि अभी भी वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों को भरोसा है कि ऐसा कोई कदम नहीं उठाया जाएगा, जिससे कि सस्ते निजी कृषि श्रमिक उपलब्ध कराए जाएं। मनरेगा के तहत ऐसी गतिविधियों को शामिल किया जाएगा, जिससे फसल तैयार होने के बाद मिलने वाली सुविधाओं जैसे बाजार यार्ड, गांव स्तर और खेत के स्तर पर छोटी प्रसंस्करण इकाइयां जैसे ग्रेडिंग और शॉर्टिंग आदि की व्यवस्था की जा सकेगी। 

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सुझाव दिया था कि मनरेगा श्रमिकों का इस्तेमाल खेतों की चहारदीवारी बनाने के लिए किया जाए, लेकिन यह भी वरिष्ठ अधिकारियों ने उचित नहीं पाया। इसका भी यही आधार था कि इससे सब्सिडी वाले श्रमिकों का इस्तेमाल निजी जमीन पर हो सकता है। 

मनरेगा के विस्तार को लेकर अधिकारियों ने कहा कि कृषि से संबंधित कार्यो का कुल विस्तार मनरेगा के बजट के 80 प्रतिशत तक पहुंच सकता है, जो अभी 67 प्रतिशत है। इस तरह की तमाम गतिविधियां पहले ही मनरेगा के तहत चल रही हैं, जबकि अगले चरण का मकसद किसानों आमदनी बढ़ाने की संभावनाओं का विस्तार करना है। 

इस महीने की शुरुआत में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में उच्चाधिकार प्राप्त समिति ने राजधानी में बैठक की थी, जिसका मकसद वह रास्ता निकालना था, जिससे कि मनरेगा का इस्तेमाल ऐसे काम में किया जा सके, जिससे कि किसानों की खेती की लागत में कमी आए और पानी व अन्य इनपुट के प्रभावी इस्तेमाल से उत्पादन में बढ़ोतरी हो। यहां तक कि इसमें खेतों की चहारदिवारी करने का काम भी शामिल ता जिससे कि जंगली पशुओं से फसल बचाई जा सके।

समिति ने पटना, भोपाल, हैदराबाद, गुवाहाटी और नई दिल्ली में 5 क्षेत्रीय कार्यशालाएं आयोजित करने का भी फैसला किया था जिसमें विशेषज्ञों, किसानों व किसानों के प्रतिनिधि और अन्य हिस्सेदार भाग लेंगे। इसमें चर्चा की जोगी कि मनरेगा से कृषि गतिविधियों को बेहतर तरीके से जोडऩे की और कौन ले विकल्प हैं। क्षेत्रीय बैठकें 15 अगस्त तक पूरी होंगी। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘अगर निजी जमीन पर किसी गतिविधि की अनुमति दी जाती है तो छोटे व सीमांत किसानों जैसे बांस लगाने, पपीता लगाने, केला लगाने जैसे कामों में श्रमिकों को लगाया जाएगा, जिसे अधिनियम में अनुमति है।’ 

Keyword: पटना, भोपाल, हैदराबाद, गुवाहाटी, MGNREGA, job, crop harvesting,
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