बिजनेस स्टैंडर्ड - संयंत्रों में कोयले की किल्लत, आयात की पैरवी
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संयंत्रों में कोयले की किल्लत, आयात की पैरवी

श्रेया जय / नई दिल्ली 07 22, 2018

कीमतें आसमान पर

नीलामी के तहत पेशकश की गई कोयले की मात्रा 30 लाख टन

बिजनेस स्टैंडर्ड संयंत्रों में कोयले की किल्लत, आयात की पैरवीसरकार की ओर से कोयले के रिकॉर्ड उत्पादन के दावे के बावजूद बिजली संयंत्रों को कोयले की आपूर्ति घटती हुई नजर आ रही है। कोयले की कम आपूर्ति की भरपाई के लिए बिजली मंत्रालय ने बिजली उत्पादकों को भंडारण के लिए कोयले का आयात करने को कहा है। सूत्रों ने कहा कि बिजली मंत्रालय प्रधानमंत्री कार्यालय को कोयला आपूर्ति में कमी के मामले पर विचार करने के लिए निवेदन कर सकता है। 

बिजली मंत्रालय की ओर से तैयार किए गए एक नोट में कोयले की 100 प्रतिशत मांग की आपूर्ति दीर्घावधि ईंधन आपूर्ति समझौते (एफएसए) के तहत करने के नियम में बदलाव का प्रस्ताव किया गया है। इसमें कहा गया है कि ज्यादा मांग को देखते हुए कोयले का उत्पादन बढ़ाया जाना चाहिए। बिजनेस स्टैंडर्ड द्वारा देखे गए नोट के मुताबिक संयंत्र को कोयले की आपूर्ति का न्यूनतम स्तर भी बढ़ाकर मांग का 100 प्रतिशत किए जाने का प्रस्ताव किया गया है। इस समय विभिन्न संयंत्रों के लिए यह 75 से 90 प्रतिशत तक है। 

अलग से लिखे गए एक पत्र में बिजली मंत्रालय ने कहा है कि अगर घरेलू आपूर्ति पर्याप्त नहीं है तो सभी ताप बिजली संयंत्र आयातित कोयले का भंडार बनाएं। 4 जुलाई 2018 को लिखे गए पत्र में कहा गया है, ‘यह पाया गया है कि 2018-19 के दौरान बिजली संयंत्रों में कोयले का स्टॉक जून 2018 में 153 लाख टन था, जो 9 दिन तक संयंत्र चलाने के लिए पर्याप्त है।’ 

बिजली मंत्रालय की बैठक के बाद एक फैसला किया गया कि बिजली संयंत्रों को साल 2018-19 के शेष महीनों में सभी संयंत्रों में कोयले का स्टॉक सामान्य करने के लिए कोयले के आयात का आकलन किया जाए। आयातित कोयले के दाम 110 डॉलर प्रति टन पहुंच गए हैं, जो 5 साल का उच्चतम स्तर है। भारतीय बिजली संयंत्रों के लिए आयात का सामान्य मूल्य 45-60 डॉलर प्रति टन पड़ता है। 

बहरहाल कोयला मंत्रालय अभी इस बात पर बना हुआ है कि आपूर्ति में सुधार हुआ है। राज्य सभा में 20 जुलाई को लिखित जवाब में पीयूष गोयल ने कहा, ‘अप्रैल 2018 में कोल इंडिया लिमिटेड ने बिजली संयंत्रों को 400.7 लाख टन कोयला बिजली संयंत्रों को भेजा है, जो अप्रैल 2017 में 351.6 लाख टन आपूर्ति की तुलना में 14 प्रतिशत के करीब ज्यादा है। 19.10.2017 में कोयले के स्टॉक का स्तर 73 लाख टन था, जो 30.04.2018 को 158.9 लाख टन हो गया।’

बड़े बिजली संयंत्रों को कोयले की आपूर्ति की स्थिति 12-15 दिन की अवधि के स्तर से कम है। वहीं कोल इंडिया को निजी बिजली उत्पादकों को स्पेशल फॉरवर्ड ई- ऑक्शन (एसएफईए) के तहत पेशकश वाले कोयले के दाम बढ़े हैं, जिसकी मात्रा पिछली 2 तिमाही के दौरान कम हुई है। एसएफईए की शुरुआत 2016 में निजी उत्पादकों को  खुले बाजार में कोयले की ज्यादा उपलब्धता के लिए की गई थी, जो कोल इंडिया से दीघार्ïवधि खरीद समझौता नहीं करते। साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड लिमिटेड और महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड दो प्रमुख एसएफईए आपूर्तिकर्ता हैं। बिजली उत्पादकों ने आरोप लगाया है कि इन दो खदानोंं से आपूर्ति कम हूई है। साथ ही एमसीएल ने बीते कुछ महीनों में कोयला खत्म होने व बार बार श्रमिक असंतोष होने की स्थिति का सामना किया है। 

कोयला मंत्रालय की वेबसाइट पर उपलब्ध ताजा आंकड़ों के मुताबिक नवंबर 2017 में 310 लाख टन की पेशकश के बाद एसईएफए के तहत कोयले की आपूर्ति घटकर मई 2018 में 35 लाख टन रह गई। उल्लिखित अवधि में कोयले का मूल्य 81 प्रतिशत बढ़ा है। एसएफईए के तहत कोयले का अधिसूचित पेशकश मूल्य 955 रुपये टन (जी-11 श्रेणी के कोलये का मूल्य) रहा है। पिछली सर्दियों में कीमतें अधिसूचित मूल्य से 19.15 प्रतिशत ज्यादा थीं। 

सीआईएल ने एसएफईए के तहत 2018-19 में 420 लाख टन कोयले की पेशकश की। यह पिछले साल एसएफईए के तहत पेशकश के बराबर है, लेकिन 2016-17 के 634.4 लाख टन की तुलना में 34 प्रतिशत कम है। एसोसिएशन आफ पॉवर प्रोड्यूसर्स ने केंद्रीय कोयला व रेल मंत्री पीयूष गोयल को लिखे पत्र में कहा है, ‘कुल मात्रा में बड़ी गिरावट की वजह एसईसीएल और एमसीएल द्वारा की गई कोयले की पेशकश में गिरावट है।’ 

संगठन ने यह भी आरोप लगाया है कि  एसईसीएल की एसएफईए के तहत आपूर्ति 2017-18 में गिरकर 86 लाख टन हो गई, जो 2016-17 में 266.2 लाख टन थी, वहीं एमसीएल से कोयला आपूर्ति इस अवधि के दौरान 97.6 लाख टन से गिरकर 21 लाख टन हो गई। 

Keyword: बिजली मंत्रालय, संयंत्र, सरकार, एफएसए, coal,
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