बिजनेस स्टैंडर्ड - कटौती के तरीकों पर आपत्ति!
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कटौती के तरीकों पर आपत्ति!

दिलाशा सेठ / नई दिल्ली 07 22, 2018

कर कटौती का मामला

प्रक्रिया का पालन नहीं करने का विपक्ष ने लगाया आरोप
जीएसटी दर में कटौती के तरीके से विपक्षी दल नाराज
कर कटौती के फैसले में फिटमेंट कमेटी को किया गया नजरअंदाज
एजेंडे से बाहर के मुद्दों पर किया गया विचार
अधिकारियों ने भी जताई थी इस पर आपत्ति

बिजनेस स्टैंडर्ड कटौती के तरीकों पर आपत्ति!नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव औंधे मुंह गिरने के एक दिन बाद ही शनिवार को वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद ने कई वस्तुओं पर कर की दरों में जो कटौती की, उसका अंदाजा कई दिनों से लगाया जा रहा था। लेकिन कटौती का तरीका हैरत में डालने वाला था क्योंकि किसी भी वस्तु की कर दर में कमी या बढ़ोतरी का प्रस्ताव फिटमेंट समिति को भेजा जाता है और उस पर अधिकारी विचार-विमर्श करते हैं। लेकिन इस बार पूरी प्रक्रिया को नजरअंदाज करते हुए वित्त मंत्री पीयूष गोयल की अध्यक्षता में हुई परिषद की बैठक में सीधे दर कटौती का फैसला ले लिया गया। अधिकारियों ने इस पर आपत्ति दर्ज कराई और विपक्ष ने सरकार की तीखी आलोचना की। 

बैठक के बाद जैसे ही रेफ्रिजरेटर, टेलीविजन, वॉशिंग मशीन पर कर घटाने का ऐलान हुआ तो अधिकारियों ने कहा कि पहले प्रस्ताव को फिटमेंट समिति के पास भेजा जाना चाहिए था। कर कटौती की मांगें हमेशा इस समिति के पास ही जाती हैं। समिति में राज्यों और केंद्र के अधिकारी होते हैं जो इससे राजस्व पर पडऩे वाले असर की जांच करते हैं और फिर इसे परिषद की बैठकों में रखते हैं।

एक अधिकारी ने कहा, ‘यह पहला मौका था, जब बैठक में एजेंडे से बाहर के मुद्दे उठाए जा रहे थे। कुछ अधिकारियों ने इस तरह दरों में कटौती पर आपत्ति भी जताई और मामले को फिटमेंट समिति के पास भेजने की राय दी।’ उन्होंने कहा कि कुछ वस्तुओं की दरों में कटौती से राजस्व पर पड़ने वाले प्रभाव के बारे में कुछ अध्ययन किया गया था लेकिन यह पर्याप्त नहीं था।

परिषद की बैठक में रेफ्रिजरेटर, वॉशिंग मशीन, छोटी स्क्रीन वाले टीवी सेट, इत्र, सौंदर्य प्रसाधन और वैक्यूम क्लीनर सहित 100 से अधिक वस्तुओं पर जीएसटी घटाने का फैसला किया गया। फिटमेंट समिति ने पेंट, वार्निश और सीमेंट की दरों में कटौती का अध्ययन किया था, लेकिन इसकी सिफारिश नहीं की थी क्योंकि उसे लगता था कि इन पर कर घटाने से राजस्व पर बड़ा प्रभाव पड़ सकता है। इसीलिए इसे बैठक के एजेंडा में शामिल ही नहीं किया गया था। लेकिन पेंट और वार्निश पर कर की दर 28 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी कर दी गई। इसके अलावा 18-20 दूसरी वस्तुओं के बारे में भी मौके पर ही फैसला किया गया। उन्हें दोपहर बाद ही बैठक के एजेंडा में शामिल किया गया था।

जीएसटी दर कम करने के फैसले में राजनीति भी

फैसलों में राजनीति भी थी क्योंकि अंतिम क्षणों में उत्तर प्रदेश की ओर से अनुरोध आने पर 500 रुपये से 1,000 रुपये कीमत वाले जूते-चप्पल पर दर घटाकर 5 फीसदी कर दी गई। अब 28 फीसदी की कर श्रेणी में 40 से कम वस्तुएं ही रह गई हैं। वित्त सचिव हसमुख अढिया का हाल तक मानना था कि जीएसटी राजस्व स्थिर होने के बाद ही सरकार दरों में व्यापक बदलाव पर विचार करेगी। कुछ सप्ताह पहले उन्होंने एक साक्षात्कार में कहा था, ‘हम अभी कोई बड़ा बदलाव नहीं करने जा रहे हैं। इसके लिए पहले राजस्व को स्थिर होने की जरूरत है।’ मगर दरों में इस बार व्यापक बदलाव कर दिया गया। करों में कटौती 27 जुलाई से लागू होगी और इससे राजस्व में सालाना 80-90 अरब रुपये का नुकसान होने का अनुमान है।

विपक्षी पार्टियों की राज्य सरकारों के वित्त मंत्री इस हरकत से खासे खफा भी नजर आए। पंजाब के वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल बैठक बीच में ही छोडक़र चले गए। उन्होंने बिज़नेस स्टैंडर्ड से कहा, ‘सरकार चुनाव की तैयारी करने लगी है और जल्दबाजी में काम कर रही है। यही वजह है कि उसने उन वस्तुओं पर भी दर कम करने में तत्परता दिखाई, जो एजेंडा में नहीं थीं।’ उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया निष्पक्ष और लोकतांत्रिक होनी चाहिए।स्वास्थ्य कारणों से बैठक में शामिल नहीं हुए केरल के वित्त मंत्री थॉमस आइजक भी परिषद में लिए गए फैसलों से नाराज थे। उन्होंने कर कटौती को दुर्भाग्यपूर्ण और अलोकतांत्रिक बताया और कहा कि विलासिता वाली वस्तुओं पर कटौती का विरोध क्यों नहीं किया गया। उन्होंने ट्वीट किया, ‘सबसे दुर्भाग्यपूर्ण यह है कि जीएसटी परिषद ने एजेंडा वितरित किए बिना टीवी और फ्रिज जैसी वस्तुओं पर दर 28 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी कर दी। यह अलोकतांत्रिक और गैर बराबरी वाला फैसला है।’

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