बिजनेस स्टैंडर्ड - जेएसडब्ल्यू स्टील अगले चरण के विकास के लिए तैयार
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जेएसडब्ल्यू स्टील अगले चरण के विकास के लिए तैयार

टी ई नरसिम्हन /  July 22, 2018

बाजार मूल्यांकन के लिहाज से देश की सबसे बड़ी इस्पात कंपनी जेएसडब्ल्यू स्टील कारोबार विस्तार के अगले चरण की तरफ बढ़ रही है। अगले 30 महीनों में कंपनी ने 450 अरब रुपये के पूंजीगत व्यय की योजना तैयार की है। अधिक कारोबार, बेहतर उत्पाद मिश्रण और अपेक्षाकृत नए बाजारों में कदम रखने से कंपनी को कारोबार विस्तार में मदद मिल सकती है। इन सभी उपायों से जेएसडब्ल्यू के शेयर (शेयर एनएसई के निफ्टी में दवा कंपनी ल्यूपिन की जगह लेने जा रही है) को अपना मौजूदा प्रदर्शन बरकरार रखने में मदद मिल सकती है। बीएसई के बेंचमार्क सेंसेक्स में 7 प्रतिशत तेजी और अपनी प्रतिस्पर्धी कंपनियों के खस्ताहाल प्रदर्शन के मुकाबले जेएसडब्ल्यू का शेयर 2018 में अब तक 17 प्रतिशत तक चढ़ा है। 

कारोबार 

सबसे पहले जेएसडब्ल्यू 2020 तक सालाना क्षमता बढ़ाकर 2.5 से 3.0 करोड़ टन करना चाहती है। कंपनी इसके लिए महाराष्ट्र में दौल्वी और कर्नाटक के विजयनगर संयंत्रों में विस्तार करेगी, साथ ही विदेशी बाजारों में 1 करोड़ टन अतिरिक्त क्षमता भी बढ़ाएगी। कंपनी के संयुक्त प्रबंध निदेशक और समूह वित्त प्रमुख वी एस शेषगिरि राव कहते हैं, ‘अगर देश में 2030 तक कुल 30 करोड़ टन इस्पात उत्पादन के लक्ष्य में कंपनी 15 से 16 प्रतिशत हिस्सेदारी बरकरार रखना चाहती है तो कंपनी को नए संयंत्रों से 1.2 करोड़ टन अतिरिक्त उत्पादन की जरूरत होगी। यह उत्पादन ओडिशा में दक्षिण कोरिया की कंपनी पोस्को की जमीन पर हो सकता है।’ इससे प्रति टन 40 अरब रुपये लागत आएगी, जिससे कुल 480 अरब रुपये लागत आएगी।

राव का कहना है कि विदेश में विस्तार की रणनीति अमेरिका, यूरोप और अन्य देशों द्वारा संरक्षणवाद को बढ़ावा देने के आधार पर तैयार की गई है। पहले जेएसडब्ल्यू ने विदेशी बाजारों में कभी इस्पात उत्पादन नहीं किया और इसके बजाय मूल्य वद्र्धन के तरीकों पर अधिक जोर दिया। हालांकि हाल में ही कंपनी ने एक 30 लाख टन क्षमता वाला संयंत्र खरीदने के लिए 50 करोड़ डॉलर निवेश करने की घोषणा की है। भारत में 10 लाख टन क्षमता वाले संयंत्र की स्थापना पर 1 अरब डॉलर लागत आएगी, जबकि एक मौजूदा संयंत्र के विस्तार पर 60 करोड़ डॉलर खर्च आएगा। 

राव कहते हैं, ‘पूंजी आवंटन दृष्टिïकोण से यह तर्कसंगत लगता है, क्योंकि जेएसडब्ल्यू को निवेशित पूंजी पर उतना ही प्रतिफल मिलता है। सस्ती दरों पर गैस की उपलब्धता और कबाड़ की उपलब्धता परिचालन खर्च के लिए फायदेमंद है।’ विश्लेषकों का कहना है कि यह नीति कारगर मालूम होती है और विकास के ऐसे अवसरों का लाभ उठाने के लिए जेएसडब्ल्यू का बहीखाता मजबूत दिख रहा है। 

मूल्य वर्धन 

कुल पूंजीगत व्यय में करीब 60 अरब रुपये मूल्य वद्र्धन के लिए डाउनस्ट्रीम और बैकवर्ड इंटीग्रेशन के लिए रखे गए हैं। इन मामलों में मार्जिन 8000 से 9,000 रुपये प्रति टन होता है। राव ने कहा कि उत्पाद मिश्रण अनिश्चितता कम करने में मददगार साबित होगा। जेएसडब्ल्यू का मानना है कि मूल्य वर्धित उत्पाद अगले दो से तीन साल में राजस्व में करीब 65 प्रतिशत (57 प्रतिशत) योगदान दे सकते हैं। एक दशक पहले यह करीब 30 से 35 प्रतिशत था। मूल्य वद्र्धित उत्पादों से जेएसडब्ल्यू को मार्च तिमाही में जेएसडब्ल्यू को बाजार के अनुमान से थोड़ा आगे रहने में मदद मिली थी। एसबीआई कैप्स के विश्लेषकों का कहना है कि 10,172 रुपये के अनुमान के मुकाबले प्रति टन ब्याज, कर, मूल्य ह्रास आदि पूर्व (एबिटा) 10,374 करोड़ रुपये था। सालाना आधार पर मांग में 7 से 7.5 प्रतिशत वृद्धि की उम्मीद है। माना जा रहा है कि जेएसडब्ल्यू अपनी बढ़ती हिस्सेदारी बरकरार रखेगी या इसमें इजाफा कर सकती है। हालांकि अमेरिका, यूरोप और तुर्की की तरफ से आयात पाबंदी की वजह से वैश्विक स्तर पर 8 से 9 करोड़ इस्पात की उपलब्धता जायका खराब कर सकती है। घरेलू कंपनियों को कुछ सुरक्षा जरूर मिली हुई है, लेकिन सरकार की इस्पात नीति में किसी प्रतिकूल बदलाव या वैश्विक स्तर पर कीमतों में गिरावट से जेएसडब्ल्यू और अन्य इस्पात उत्पादकों पर असर पड़ सकता है। कुछ दूसरे लोगों के अनुसार जेएसडब्ल्यू के लिए एक दूसरा जोखिम इसके बहीखाते पर दबाव का हो सकता है। 

हालांकि राव इसे लेकर निश्चिंत लग रहे हैं। जेएसडब्ल्यू बॉन्ड आदि के माध्यम से करीब 250 अरब रुपये जुटाना चाहती है, जबकि शेष रकम नकद जमा राशि से आएगी। पिछले साल जेएसडब्ल्यू पूंजीगत व्यय के लिए जेएसडब्ल्यू ने 90 अरब रुपये जुटाए थे और आगे भी यह रकम जुटाना जारी रखेगी। राव का कहना है कि तीसरे साल के अंत तक यह रकम बढक़र करीब 270 अरब रुपये हो जाएगी। मार्च के अंत तक कर्ज और एबिटा अनुपात 2.67 और डेट एवं इक्विटी अनुपात 1.24 था। रॉव कहते हैं, ‘हमारा डेट एवं एबिटा अनुपात 3.75 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा जबकि डेट-इक्विटी अनुपात भी 1.75 को पार नहीं करेगा।’
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