बिजनेस स्टैंडर्ड - जीएसटी के पहले साल ग्राहकों पर ध्यान
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जीएसटी के पहले साल ग्राहकों पर ध्यान

पार्थसारथि शोम /  July 19, 2018

सरकार ने जीएसटी में ग्राहकों की सहूलियत के लिए जो भी कदम उठाए उनकी सफलता बहुत हद तक अधिकारियों की सक्षमता पर निर्भर थी। विस्तार से बता रहे हैं पार्थसारथि शोम 

 
वस्तु एवं व्यापार कर (जीएसटी) के क्रियान्वयन का पहला वर्ष पूरा होने के बाद इसके प्रदर्शन को लेकर कई आलेख लिखे गए। परंतु इस दौरान एक विषय कमोबेश अछूता रहा। वह यह कि केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) के चेयरमैन और विभागीय अधिकारियों के बीच 1 जुलाई, 2017 से 15 जून, 2018 के बीच हुए 50 संवादों में सरकार का उपभोक्ताओं पर ध्यान देना उजागर हुआ है। जीएसटी के जटिल ढांचे को देखते हुए यह आसान नहीं था। जीएसटी में बदलाव की प्रक्रिया को कारोबारियों और आम जनता दोनों के लिए कष्टï रहित बनाने के क्रम में अधिकारियों से कहा गया कि वे जीएसटी सेवा केंद्रों पर कारोबारियों से चर्चा करके करदाताओं की दिक्कत को समझें और उन्हें तत्काल हल करने का प्रयास करें।  अगर किसी मामले को आगे बढ़ाना जरूरी हो तो उसे फीडबैक ऐंड ऐक्शन रूम (एफएआर) भेजा जाए ताकि वे उचित कदम उठाया जा सके। इस प्रक्रिया में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग का इस्तेमाल भी शामिल था।
 
व्यापारियों और उपभोक्ताओं के बीच जीएसटी के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए आयोजित कार्यक्रमों, संगोष्ठिïयों, कार्यशालाओं आदि के कमजोर स्तर को लेकर भी चिंता जताई गई। आयुक्तों से कहा गया कि वे उन अधिकारियों की पहचान करें जिन्हें प्रशिक्षित करने की आवश्यकता है, ताकि उन्हें समस्याओं के निराकरण के लिए सक्षम बनाया जा सके। अधिकारियों और कर्मचारियों की जानकारी को अद्यतन करने के लिए उन्हें प्रशिक्षित करना और जीएसटी मास्टर क्लास की रिकॉर्डिंग देखने की भी अनुशंसा की गई। आयुक्तों और अन्य अधिकारियों से कहा गया कि वे स्वयं रिटर्न भरें ताकि उन्हें अनुभव हो सके कि करदाताओं को दिक्कत कहां आ रही है।
 
ऐंड्रॉयड और आईओएस के लिए जीएसटी रेट फाइंडर नामक ऐप शुरू किया गया। इसे डाउनलोड करके हर वस्तु और सेवा की जीएसटी दर देखी जा सकती है। जीएसटी परिषद की 23वीं बैठक में कुछ वस्तुओं की जीएसटी दर कम की गई। चेयरमैन ने तत्काल यह संकेत दिया कि अंशधारकों को हर निर्णय की तुरंत जानकारी दी जाए। उन्होंने उद्योग जगत के व्यक्तियों को इस बारे में लिखा और अधिकारियों से अनुरोध किया कि वे इसका लाभ आपूर्तिकर्ताओं से लेकर खरीदारों तक को मिलना सुनिश्चित करें। 
 
एक धारणा यह बनी कि एक तय सीमा से नीचे के लोगों पर से अनुपालन का बोझ कम किया जाए ताकि वे स्वेच्छा से पंजीयन करा सकें। सूक्ष्म, लघु और मझोले उद्यम क्षेत्र तथा कारोबार के क्लस्टर समूहों पर खास ध्यान देने की बात हुई और इसे लेकर प्रेस विज्ञप्तियां जारी की गईं। निर्यातकों को प्राथमिकता दी गई। निर्यात संबंधी एक समिति बनाई गई जिसमें केंद्र और राज्य सरकारों के सदस्य नियुक्त किए गए ताकि वे जीएसटी कानून के पालन से जुड़ी कठिनाइयों पर नजर डाल सकें। निर्यातकों के बीच के भ्रम को दूर करना सबसे आवश्यक था। उदाहरण के लिए बॉन्ड/ लेटर ऑफ अंडरटेकिंग के अधीन होने वाले निर्यात जिनमें एकीकृत जीएसटी का भुगतान नहीं होता था चाहे वे विनिर्माता हों, व्यापारी या सेवा प्रदाता। निर्यात पर एकीकृत जीएसटी का रिफंड 10 अक्टूबर 2017 से शुरू हुआ। 
 
सीमाशुल्क की बात करें तो निर्यात के मामले में आईजीएसटी रिफंड के लिए इंडियन कस्टम्स इलेक्ट्रॉनिक डेटा इंटरचेंज (ईडीआई) सिस्टम्स (आईसीईएस) शुरू हो गया। निर्यातकों को तत्काल अंतरिम राहत देने के लिए व्यवस्था की गई। निर्यातकों को रिफंड का उचित दावा करने में मदद के लिए उन्हें बिना देरी किए जरूरी फॉर्म भरने को कहा गया। इनको निर्यात केंद्र पर मौजूदा सीमा शुल्क अधिकारी मंजूरी देते। इस विषय में एक विस्तृत परिपत्र  जारी किया गया। जानकारी के मुताबिक मुंबई जोन 2 में एक लाख से अधिक लंबित दावों को सफलतापूर्वक निपटाया गया। तीन सप्ताह के भीतर लंबित मामलों की संख्या शून्य हो गई। 
 
वर्ष 2017 के आखिर से लेकर वर्ष 2018 तक प्रयास चलते रहे। मुख्य आयुक्तों से कहा गया कि वे रिफंड के दावों की मंजूरी की बारीकी से निगरानी करें। इसमें निर्यात पर दिया जाने वाला आईजीएसटी रिफंड भी शामिल है। उन्हें तय समय सीमा में रिपोर्ट पेश करने को कहा गया। इसके बाद 23 फरवरी, 2018 के परिपत्र में आईजीएसटी रिफंड पर जरूरी कदमों की बात की गई। ये रिफंड इनवॉयस का मिलान न होने से अथवा अन्य गलतियों की वजह से लंबित थे। आईसीईएस में एक व्यवस्था विकसित की गई जिसका काम था सीमा शुल्क अधिकारियों को रिफंड के दावे निपटाने में मदद करना। 
 
सीबीआईसी ने ऐसे लंबित रिफंड के मामलों के निपटान की गति तेज कर दी। इसके लिए विशेष अभियान चलाए गए। 15 से 19 मार्च, 2018 के बीच निर्यात रिफंड पखवाड़ा मनाया गया। बाद में इसे आगे भी बढ़ाया गया। विशिष्टï शिविरों और रिफंड सेल के गठन की बात आगे आई, ताकि लंबित मामलों, निर्यात से जुड़े रिफंड दावों को निपटाया जा सके। डाइरेक्टर जनरल सिस्टम्स ने इनवॉयस मिसमैच के मामलों में लंबित आईजीएसटी रिफंड की सूची और आयात-निर्यात कोड की सूची बनानी शुरू की जो सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन सिस्टम्स की मंजूरी के लिए लंबित थे। मार्च तक आईजीएसटी रिफंड के लंबित दावों की तादाद बहुत कम हो गई थी। 
 
कुछ रिफंड दावे इसलिए भी लंबित थे क्योंकि जीएसटीएन से संबंधित डेटा प्राप्त नहीं हुआ था। जाहिर सी बात है कि बिना केंद्रीय उत्पाद एवं सेवा कर पोर्टल के स्वचालन में सुधार और समीक्षा के रिफंड देना संभव नहीं। जोनल सदस्यों को कहा गया कि वे दैनिक आधार पर इसकी निगरानी करें और जल्दी ही इस तरह के लंबित मामले शून्य हो गए। 1 जून, 2018 को घोषणा की गई कि 31 मई से 14 जून, 2018 तक विशेष रिफंड पखवाड़ा आयोजित किया गया था। इस दौरान 30 अप्रैल, 2018 तक जमा आवेदनों का रिफंड निपटाना था। 
 
तीन और बातें हैं जिन पर ध्यान दिया जाना चाहिए। पहली, अधिकारियों से कहा गया कि वे करदाताओं की मदद के लिए प्रक्रिया तेज करें। इससे विभाग की कारोबारियों के अनुकूल छवि बनाने में मदद मिलेगी। दूसरा, अधिकारियों और कर्मचारियों से कहा गया कि वे इस विषय में, आने वाले बदलावों, नियम एवं प्रक्रिया में तब्दीली आदि को लेकर आलेख प्रकाशित कराएं। यह एक निरंतर प्रक्रिया है जो भागीदारी बढ़ाती और मुद्दों को स्पष्टï करती है।  तीसरी और सबसे अहम बात यह है कि चेयरमैन ने करदाताओं का आकलन करते वक्त अत्यधिक ईमानदारी बरतने को कहा। देश भर में अधिकारियों और कर्मचारियों ने ईमानदारी की शपथ ली। सीबीआईसी ने 30 अक्टूबर से 4 नवंबर, 2017 तक सतर्कता जागरूकता सप्ताह का आयोजन भी किया। लब्बोलुआब यह कि पहले वर्ष के दौरान उपभोक्ताओं पर ध्यान देने का काम जोरशोर से किया गया। जाहिर है इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि हकीकत में यह जमीनी अधिकारियों और उनके कामकाज को कितना प्रभावित करती है। 
Keyword: GST, वस्तु एवं सेवा कर, जीएसटी,,
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