बिजनेस स्टैंडर्ड - जेम पर नीलामी के खिलाफ उद्योग
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जेम पर नीलामी के खिलाफ उद्योग

जयजित दास / भुवनेश्वर 07 19, 2018

कपड़ा मंत्रालय ने गवर्नमेंट ई-मार्केट प्लेस (जेम) पोर्टल पर प्रतिस्पर्धी बोलियों के जरिये जूट की बोरियों की खरीदारी शुरू करने का प्रस्ताव रखा है, जिसका जूट उद्योग ने दबी आवाज में विरोध करना शुरू कर दिया है।  कपड़ा मंत्रालय की हाल में उद्योग के भागीदारों के साथ बैठक हुई थी, जिसमें नीलामी के जरिये जूट की बोरियों की खरीद की संभावना पर विचार-विमर्श किया गया। इस बैठक के बाद कपड़ा मंत्रालय इस विचार पर गंभीरता से विचार कर रहा है। शुरू में यह विचार केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय की तरफ से रखा गया था।

 

हालांकि जूट की बोरियों की नीलामी की योजना अपने शुरुआती चरण में ही है, लेकिन इससे उद्योग में नाराजगी है। इस प्रस्ताव को लेकर अपनी असहमति जताते हुए जूट उद्योग ने कहा कि प्रतिस्पर्धी नीलामियों के जरिये जूट बोरियों की खरीदारी में अनिश्चितताएं हैं, जो उद्योग के लिए नुकसानदेह होंगी। जूट बोरियों के लिए कीमत अनुबंध व्यवस्था शुरू करने के लिए पहले किए गए प्रयास भी तीन बार नाकाम रहे हैं क्योंकि जूट उद्योग ने इस योजना का पुरजोर विरोध किया। वर्ष 2013 में भी केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय ने जूट को एक संवेदनशील उत्पाद बताया था। अनाज और चीनी को भरने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली जूट की बोरियों को जूट पैकेजिंग मैटेरियल ऐक्ट (जेपीएमए) के तहत संरक्षण मिला हुआ है। खरीद की वर्तमान व्यवस्था के मुताबिक जूट आयुक्त कार्यालय जूट मिल मालिको के अनुमानों के आधार पर उत्पादन नियंत्रण और आपूर्ति के आदेश जारी करता है। जूट बोरियों की खरीद भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) और अन्य सरकारी एजेंसियां करती हैं। 

 

उद्योग को डर है कि यदि खरीद की वर्तमान प्रणाली की जगह प्रतिस्पर्धी नीलामी लेती है तो जूट आयुक्त की कीमत प्रभावी नहीं रह जाएगी। उद्योग के एक सूत्र ने कहा, 'प्रतिस्पर्धी बोली की स्थिति में कम कीमत की कोई सीमा नहीं होगी। ऐसी व्यवस्था से उद्योग को नुकसान होगा। यह जूट मिलों पर तगड़ी चोट होगी, जिस पर पहले ही कीमत तय किए जाने के तरीके की मार पड़ रही है। जेम पोर्टल के जरिये प्रतिस्पर्धी बोली से जूट उद्योग के हितों के प्रतिकूल होगी।' सरकार हर साल जूट उद्योग को 35 से 40 अरब रुपये के अनुपात में सब्सिडी देती है। यह आंकड़ा 2 लाख औद्योगिक कामगारों के मेहनताने के बराबर है। करीब 40 लाख किसान जूट की फसल उगाते हैं और अनिवार्य कानून- जेपीएमए का लाभ उठाते हैं।

 

जूट पर स्थायी सलाहकार समिति की हाल में हुई 26वीं बैठक में जूट बोरियों को जेम के दायरे में लाने की योजना पर चर्चा हुई। वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि ई-खरीद विकल्प केवल प्लास्टिक के बोरों के लिए उपलब्ध था। केंद्रीय कपड़ा मंत्रालय के कुछ अधिकारियों ने बताया कि जूट बोरियों की कुछ प्रतिशत खरीद प्रतिस्पर्धी बोली के जरिये हो सकती है। कपड़ा, वाणिज्य और खाद्य मंत्रालयों के अधिकारियों का एक 7 सदस्यीय समूह इस प्रस्ताव की व्यवहार्यता की पड़ताल कर रहा है। इस बात की चिंताएं हैं कि अगर जेम सफल नहीं रहा तो इससे पूरी जूट आपूर्ति शृंखला प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा एक नियंत्रित कीमत प्रणाली में जेम मॉडल की सफलता संदेहास्पद है। 

Keyword: textiles, export, कपड़ा परिधान,
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