बिजनेस स्टैंडर्ड - जीएसटी दर: एकल बहुल नहीं सर्वश्रेष्ठ का सवाल
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जीएसटी दर: एकल बहुल नहीं सर्वश्रेष्ठ का सवाल

कराधान
सुकुमार मुखोपाध्याय /  July 18, 2018

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) में एक या एक से अधिक दरें रखने के बारे में चर्चा गरम है। प्रधानमंत्री का कहना है कि दूध और मर्सिडीज पर कर की समान दर नहीं हो सकती है। इससे पहले वित्त मंत्री ने भी कहा था कि चप्पलों पर कर की वही दर नहीं हो सकती जो एयर कंडीशनर पर है। इन लोगों को आशंका है कि अगर ऐसा हुआ तो जीएसटी प्रतिगामी होगा। यहां तक कि मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यन ने भी जीएसटी में कई दरों और उपकर का समर्थन किया है। इसलिए मैं एकल बनाम एक से अधिक दरों के इस विवाद में अपनी राय रख रहा हूं। मेरा मानना है कि हमें न तो एकल दर व्यवस्था अपनानी चाहिए और न ही बहुल, बल्कि हमें दुनिया की सर्वश्रेष्ठï व्यवस्था अपनानी चाहिए।  

 
अंतरराष्ट्रीय अनुभव
 
आइए दुनिया के कुछ देशों में विभिन्न दरों के बारे में जानते हैं। बेल्जियम में दरें 21, 12 और 6 फीसदी हैं तो ब्राजील में 25, 18, 12 और 7 फीसदी। कनाडा में केंद्रीय जीएसटी की दर 5 फीसदी है जबकि क्यूबेक प्रांत में 9.975 फीसदी है। लेकिन देश में सात अलग-अलग राज्यों में बिक्री कर की दरें 13 से 15 फीसदी तक हैं। चीन में ये दरें 17, 11 और 6 फीसदी, फ्रांस में 20, 10, 5.5 और 2.1 फीसदी, जर्मनी में 19 और 7 फीसदी और इटली में 22, 10, 5 और 4 फीसदी हैं। इसी तरह न्यूजीलैंड में 33, 28, 15 और 10.5 फीसदी, रूस में 18 और 10 फीसदी, स्वीडन में 25, 12 और 6 फीसदी, स्विटजरलैंड में 7.7 और 3.7 फीसदी तथा ब्रिटेन में 20 और 5 फीसदी हैं। इन देशों में कई दरें हैं और साथ ही कई तरह के सामान पर छूट भी है। यहां तक कि जिन देशों में कर की एक ही दर है वहां भी छूट का प्रावधान है। इसके अलावा हर देश में निर्यात के लिए छूट दी जा रही है। कुछ देशों में जीएसटी की एकल दर है। इनमें जापान (8), ऑस्ट्रेलिया (10), सिंगापुर (7), डेनमार्क (25) और कुछ अफ्रीकी देश शामिल हैं। लेकिन ये देश भारत की तरह नहीं हैं। भारत में करीब 40 फीसदी गरीब आबादी है जिसे ध्यान में रखने की जरूरत है। बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के अपने वैट (शून्य दर के अलावा) में कई दरों की व्यवस्था को अपनाने की वजह यह है कि इससे विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक लक्ष्यों के साथ तालमेल बिठाने का मौका मिलता है। जरूरी चीजों पर कर की दर कम रखी जाती है जबकि विलासितापूर्ण वस्तुओं पर उच्च या मानक दर रखी जाती है। एकल दर क्षैतिज रूप से न्यायसंगत है लेकिन लंबवत रूप से नहीं क्योंकि इसमें अमीरों और गरीबों पर कर का बोझ समान होता है। 
 
अर्थशास्त्रियों की राय
 
शुद्धतावादी अर्थशास्त्रियों का मानना है कि सभी अप्रत्यक्ष करों की तरह वैट/जीएसटी भी प्रतिगामी कदम है। अगर कोई छूट देकर और कई तरह की दरें अपनाकर इसे अग्रगामी बनाना चाहता है तो फिर वह कुत्ते की पूंछ सीधी करने के पुराने जाल में फंस जाएगा। उनकी दलील है कि छूट अर्थव्यवस्था को विकृत करती है और इससे वर्गीकरण की समस्या होती है। यह सच है लेकिन पूरा सच नहीं।
 
व्यापक दृष्टिकोण
 
जीएसटी को अलग-थलग करके नहीं बल्कि संयोजन में देखा जाना चाहिए। मतलब इसे विलासिता और अहितकर वस्तुओं पर उपकर, आयकर और व्यय नीति (फसलों के लिए समर्थन मूल्य और किसान कर्ज माफी जैसी सब्सिडी नीति सहित) के साथ कुल कर ढांचे के हिस्से के रूप में देखने की जरूरत है। इस बात का आकलन किया जाना चाहिए कि पूरा कर ढांचा प्रतिगामी है या नहीं। सभी करों की सर्वश्रेष्ठï खूबियों से यह संजोयन बनाया जा सकता है। जीएसटी की ताकत राजस्व बढ़ाने की इसकी क्षमता में है। विभिन्न करों के संयोजन से एक मजबूत कर ढांचा बनेगा जो विभिन्न दरों से विकृत से गड़बड़ जीएसटी से ज्यादा कल्याणकारी साबित होगा। इसलिए सामान्य तौर पर प्रतिगामी हो सकता है लेकिन दूसरे करों के साथ संयोजन में इसे प्रतिगामी होने की जरूरत नहीं है। 
 
निष्कर्ष 
 
मेरा सुझाव है कि हमें एक सपाट दर की जरूरत नहीं है लेकिन हमारी दरें 5 फीसदी, 16 फीसदी और 28 फीसदी तथा कुछ उपकर होने चाहिए। अब जबकि जीएसटी परिषद ने 5, 12, 18 और 28 फीसदी की दरों और कुछ उपकरों को मंजूरी दे दी है तो फिर 12 और 18 फीसदी के वर्गीकरण को लेकर सबसे ज्यादा विवाद होंगे। अगर इन दोनों को मिलाकर 16 फीसदी कर दिया जाए तो फिर कोई विवाद नहीं होगा। अगर 5 फीसदी और 28 फीसदी कर श्रेणी वाले सामान को सूचीबद्घ कर दिया जाए तो बाकी सामान 16 फीसदी के तहत आएंगे और उत्पाद कर अनावश्यक हो जाएगा। इस तरह हमारे पास कर की तीन श्रेणियां होंगी। आम आदमी के सामान के लिए 5 फीसदी, मध्य वर्ग के सामान लिए 16 फीसदी और अमीरों के सामान के लिए 28 फीसदी। 
 
अर्थशास्त्र की भाषा में कहें तो बुनियादी सामान के लिए 5 फीसदी, उपभोक्ता सामान के लिए 16 फीसदी और अमीरों के उपभोग के सामान पर 28 फीसदी और विलासिता तथा अहितकर सामान पर अतिरिक्त उपकर। यह अलग-अलग दुनिया की सर्वश्रेष्ठï व्यवस्थाओं का संयोजन होगा। 
 
(लेखक केंद्रीय उत्पाद एवं सीमा शुल्क बोर्ड के सेवानिवृत्त सदस्य हैं) 
Keyword: GST, वस्तु एवं सेवा कर, जीएसटी,,
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