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घट सकता है कुछ वस्तुओं पर कर

दिलाशा सेठ / नई दिल्ली July 17, 2018

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद शनिवार को होने वाली बैठक में सैनिटरी नैपकिन पर कर 12 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर सकती है। एक साल तक चली लॉबीइंग के बाद इस मामले में सरकार का रुख नरम दिख रहा है। 

इसके अलावा बैठक में हस्तशिल्प, हैंडलूम, ई-बुक के अलावा कुछ अन्य सामान पर भी कर कम किया जा सकता है, जिनसे कम राजस्व आता है। बैठक की अध्यक्षता वित्त मंत्री पीयूष गोयल करेंगे। 

एक सरकारी अधिकारी ने कहा, 'आगामी बैठक में छोटे सामान पर कर की दरों को तर्कसंगत बनाने के मसले का समाधान होगा, जिनसे कम राजस्व आता है, लेकिन इसका लोग सामान्य रूप से इस्तेमाल करते हैं। बहरहाल हम अभी सबसे ज्यादा कर ढांचे वाले सामान पर विचार नहीं कर रहे हैं।'

तीन महीने से ज्यादा समय के अंतराल के बाद परिषद की पूर्ण बैठक होने जा रही है। सैनिटरी नैपकिन, हैंडलूम और हस्तशिल्प पर इस समय 12 प्रतिशत और ई-बुक पर 18 प्रतिशत कर लगता है। 

सैनिटरी नैपकिन पर 12 प्रतिशत कर लगाए जाने को लेकर महिला समूह आक्रामक अभियान चला रही थीं।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने पिछले साल सरकार से पूछा था कि सैनिटरी नैपकिन को वस्तु एवं सेवा कर से मुक्त क्यों नहीं किया गया है, जबकि यह अनिवार्य जरूरत है जबकि बिंदी, सिंदूर और काजल जैसे सामान जीएसटी के दायरे से बाहर रखे गए हैं। 

एक सरकारी अधिकारी ने कहा, 'समिति के सामने सैनिटरी नैपकिन पर कर की दरें घटाकर 5 प्रतिशत करने का प्रस्ताव रखा जाएगा क्योंकि शून्य कर लगने पर घरेलू विनिर्माताओं को इनपुट टैक्स क्रेडिट नहीं मिलेगा। इससे घरेलू उत्पादकों को नुकसान होगा और आयात बढ़ेगा।' 

पिछली कुछ बैठकों में हैंडलूम पर कर कम करने को लेकर चर्चा हुई थी, लेकिन परिषद किसी ऐसी परिभाषा पर नहीं पहुंच सकी, जो सभी राज्यों के लिए स्वीकार्य हो। अधिकारी ने कहा, 'इस बात पर चर्चा केंद्रित है कि क्या कपड़े पर दर कम की जाएगी या हैंडलूम से तैयार किए गए उत्पादों पर।

इसमें ऐसे उत्पाद शामिल किए जा सकते हैं, जिनमें कम से कम 50 प्रतिशत हैंडलूम का इस्तेमाल होता है।' हस्तशिल्प के मामले में कीमतों की सीमा तय की जा सकती है यह सीमा 500 रुपये या 1000 रुपये हो सकती है, जिस पर दरें कम होंगी। 

परिषद ई-बुक्स पर भी कर घटाने के मसले पर भी विचार कर सकती है। सामान्य पुस्तकों पर जहां कोई कर नहीं लगता, ई-बुक्स पर 18 प्रतिशत कर लगाया गया है।

पीडब्ल्यूसी में पार्टनर प्रतीक जैन ने कहा, 'सामान्य पुस्तकों पर छूट मिली हुई है। ई-बुक कुछ और नहीं बल्कि किताब ही है, जिसकी डिलिवरी ऑनलाइन होती है। ऐसे में कोई भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए। दुनिया में किसी भी कर प्रणाली या जीएसटी व्यवस्था में सामान्य पुस्तक और ई-बुक में कोई भेदभाव नहीं किया गया है।' 

वस्तु एवं सेवा कर व्यवस्था में 5 व्यापक कर ढांचे- 5 प्रतिशत, 12 प्रतिशत, 18 प्रतिशत और 28 प्रतिशत तय किए गए हैं। इसके अलावा दो विशेष दरों की श्रेणी है। कच्चे हीरे पर 0.25 प्रतिशत और सोने पर 3 प्रतिशत कर लगता है। 
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