बिजनेस स्टैंडर्ड - दूरसंचार की गड़बड़ी
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Monday, August 20, 2018 11:58 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विशेष खबर

दूरसंचार की गड़बड़ी

संपादकीय /  July 16, 2018

देश के दूरसंचार क्षेत्र की गड़बड़ी उस समय एक बार फिर सामने आ गई जब टाटा टेलीसर्विसिज ने वित्त वर्ष 2017-18 में 275 अरब रुपये का नुकसान होने की घोषणा की। यह नुकसान आंशिक तौर पर इसलिए हुआ क्योंकि उसने भारती एयरटेल को हस्तांतरित वायरलेस कारोबार के बाद घाटे की बात कही।

यह अपनी तरह का एक अनूठा रिकॉर्ड है क्योंकि वर्ष 2017-18 में ऐसा दूसरा सबसे बड़ा नुकसान भी दूरसंचार क्षेत्र को हुआ था जब मार्च में समाप्त वित्त वर्ष के लिए रिलायंस कम्युनिकेशंस ने 239 अरब रुपये का नुकसान होने की बात कही थी। ये दोनों परिणाम बताते हैं कि यह क्षेत्र संकट में है। यकीनन कंपनियों को भी दोष अपने सिर पर लेना होगा। उदाहरण के लिए टाटा समूह सन 1990 के दशक में बटाटा (बिरला-एटीऐंडटी और टाटा) नामक एक उपक्रम से बाहर निकल गया जिसमें उसकी 48 फीसदी हिस्सेदारी थी। उस वक्त कंपनी सीडीएमए तकनीक को लेकर मुग्ध थी। आगे चलकर बटाटा आइडिया सेल्युलर बनी जो राजस्व के मामले में देश की तीसरी सबसे बड़ी दूरसंचार सेवा प्रदाता है। वहीं सीडीएमए आधारित टाटा टेलीसर्विसिज बुरी तरह पिछड़ गई। 

कई अन्य कारोबारी इस क्षेत्र से बाहर निकल गए। इससे बड़ी संख्या में लोग बेरोजगार हुए। वोडाफोन और आइडिया बेहतरी के लिए विलय की प्रक्रिया में हैं। भारती एयरटेल अभी भी कर्ज में है। केवल एक ही कंपनी की वित्तीय स्थिति बेहतर है और वह है क्षेत्र की नई कंपनी रिलायंस जियो। डेटा को सस्ता बनाने की होड़ का लाभ उपभोक्ताओं को मिला है लेकिन यह भी स्पष्टï है कि पिछली गलतियों और मौजूदा प्रतिस्पर्धा ने बाजार में विसंगति पैदा की है और वृद्घि संबंधी निवेश को प्रभावित किया है। 

यह याद रखना होगा कि संचार क्षेत्र ने अतीत में देश की वृद्घि को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जबरदस्त गति प्रदान की है। अगर भारत को एक बार फिर दो अंकों में वृद्घि हासिल करनी है तो इसमें संचार क्षेत्र की केंद्रीय भूमिका होना जरूरी है। बहरहाल, इस क्षेत्र की समग्र नीति ने न तो वृद्घि को गति दी है और न ही यह उपभोक्ताओं के हित में रहा है। इस क्षेत्र में हर स्तर पर अनिरंतरता और सरकार का मनमानापन देखने को मिला है।

जब अदालतों ने बड़ी संख्या में दूरसंचार क्षेत्र में लाइसेंस रद्द किए थे तब कई ऐसी कंपनियों को भी खमियाजा उठाना पड़ा था जो नेक इरादे से कारोबार में उतरी थीं। यही वजह है कि अब इस क्षेत्र में नया पूंजी निवेश करने से पहले निवेशक ठोस तरीके से तसल्ली करना चाहते हैं। ऐसे में नकदी की बहुलता वाले कारोबारियों के लिए दबदबा कायम करना आसान हो जाता है। अतीत में नियामकीय निर्णयों पर भी सवालिया निशान लगे हैं। नई कंपनियों की चिंताओं की अनदेखी नहीं की जा सकती है। अगर देश के दूरसंचार क्षेत्र को मजबूत रखना है तो मौजूदा कंपनियों को भी निवेश बढ़ाना होगा। 

इस क्षेत्र को लेकर सरकार का नजरिया पूरी तरह गैर कर राजस्व मुहैया कराने की इसकी क्षमता पर टिक गया है जबकि इसे वृद्घि के इंजन के रूप में देखा जाना चाहिए था। दूरसंचार को लेकर ऐसा विचार एकदम गलत है। इससे गतिरोध उत्पन्न होना लाजिमी है। कुछ सवालों के जवाब जरूरी हैं: एक प्रतिस्पर्धी बाजार कैसे तैयार किया जाए? कंपनियों को सेवा गुणवत्ता में सुधार के लिए कैसे प्रोत्साहित किया जाए? प्रशासनिक विवेकाधिकार और भ्रष्टाचार के अवसरों को कैसे सीमित किया जाए? एक बार दूरसंचार क्षेत्र को लेकर सरकार का रुख सुधर गया और मौजूदा संकट खत्म हुआ तो संभव है कि एक बार फिर दूरंसचार क्षेत्र देश की वृद्घि का वाहक बने और देश के लोगों को बेहतर सेवाएं मिलें।
Keyword: टाटा टेलीसर्विसिज, वायरलेस कारोबार, telecom, sector, reliance communications, bharti airtel,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या आरबीआई को मिलनी चाहिए थी नामित निदेशकों को हटाने की अनुमति?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.