बिजनेस स्टैंडर्ड - 'बढ़ती महंगाई भारतीय इक्विटी बाजार के लिए जोखिम'
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'बढ़ती महंगाई भारतीय इक्विटी बाजार के लिए जोखिम'

पुनीत वाधवा / नई दिल्ली July 16, 2018

कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना, चुनाव का समय करीब आना और बढ़ती महंगाई के चलते खाद्य पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी के चलते भारतीय रिजर्व बैंक की तरफ से ब्याज दरों में की जाने वाली बढ़ोतरी भारतीय इक्विटी के मुख्य जोखिमों में शामिल है। ये बातें मॉर्गन स्टैनली इंडिया इक्विटी स्ट्रैटिजी रिपोर्ट द अपहिल क्लाइंब में कही गई है।

सोमवार को थोक मूल्य पर आधारित महंगाई की दर जून के लिए बढ़कर साढ़े चार महीने के उच्चस्तर 5.77 फीसदी पर पहुंच गई, जो मई 2018 में 4.43 फीसदी रही थी। सब्जियों की महंगाई दर जून में बढ़कर 8.12 फीसदी हो गई, जो इससे पूर्व माह में 2.51 फीसदी रही थी।

ईंधन व बिजली के बास्केट में भी महंगाई की दर बढ़कर जून में 16.18 फीसदी हो गई, जो मई में 11.22 फीसदी रही थी। इसकी वजह यह है कि देसी र्ईंधन की कीमत माह के दौरान वैश्विक कच्चे तेल की दरों में हुई बढ़ोतरी के साथ चढ़ गई।

ज्यादातर विशेषज्ञों ने कहा कि आरबीआई ब्याज दरों में इजापा कर सकता है और यह इस पर निर्भर करेगा कि मॉनसून किस तरह का रहता है। बीएनपी पारिबा के एशियाई इक्विटी रणनीतिकार मनीषी रायचौधरी का मानना है कि साल 2018 में आरबीआई दो बार दरें बढ़ा सकता है और इसमें से एक बार जून में बढ़ोतरी की जा चुकी है।

उन्होंने कहा, हमें लगता है कि बाजार का अनुमान अभी और अनुकूल है, लेकिन मुख्य महंगाई के लगातार चढ़ते क्रम में रहने से आम तौर पर अनुमान यह है कि दरें और बढ़ाई जा सकती है जब और आंकड़े उपलब्ध हो जाएंगे।

ऊपर वर्णित जोखिम के अलावा मिडकैप का अपेक्षाकृत उच्च मूल्यांकन, इक्विटी की बढ़ती आपूर्ति और बाजार की तरफ से पहले से ही बढ़त में हो रहे सुधार को समाहित किए जाने से भी भारतीय इक्विटी के सामने जोखिम पैदा हो सकता है। ये बातें उस रिपोर्ट में कही गई है जिसे भारतीय शोध प्रमुख व इक्विटी रणनीतिकार रिधम देसाई ने शीला राठी के साथ तैयार की है।

एसऐंडपी बीएसई सेंसेक्स के जून 2019 का उनका लक्ष्य 36,000 पर बरकरार है, वहीं तेजी के परिदृश्य में 30 शेयरों वाला सूचकांक 44,000 पर पहुंच सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है, भारतीय शेयर कमजोर उभरते बाजारों, तेल की उच्च कीमतों, चुनावी वर्ष और मिडकैप के अपेक्षाकृत उच्च मूल्यांकन को आगे बढ़ा रहे हैं। लार्जकैप सूचकांक को बढ़त चक्र में सुधार, मजबूत आर्थिक स्थिति और इक्विटी के प्रति स्थानीय रुझान का समर्थन मिला हुआ है।

दूसरी ओर रिपोर्ट में कहा गया है कि छह कारक अभी भारतीय इक्विटी के हक में काम कर रहे हैं, जिनमें मजबूत आर्थिक स्थिति (जो सकारात्मक भुगतान संतुलन में स्पष्ट है) और वास्तविक दरों को सकारात्मक रखने की आरबीआई की प्रतिबद्धता शामिल है। साथ ही प्रतिफल में तेजी (इक्विटी के कमजोर वैश्विक माहौल में बेहतर), भारत की बढ़त की रफ्तार (जो उभरते बाजारों के मुकाबले तेज रह सकती है), मजबूत देसी निवेश और कमजोर विदेशी पोर्टफोलियो की स्थिति इसमें शामिल है।

पोर्टफोलियो की रणनीति के तौर पर मॉर्गन स्टैनली ने मिडकैप के मुकाबले लार्जकैप के साथ बने रहने को प्राथमिकता दी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि हमें बैंक (सरकारी व निजी), उपभोग क्षेत्र, औद्योगिक व देसी मैटीरियल पसंद हैं जबकि हम स्वास्थ्य सेवा, यूटिलिटीज, वैश्विक मैटीरियल व ऊऊर्जा क्षेत्र के शेयरों से दूरी रख रहे हैं। 
Keyword: crude oil, rbi, morgan stenely, equity,
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