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वेलस्पन सौदा: मिस्त्री ने नहीं किया प्रोटोकॉल का पालन

शैली सेठ मोहिले / मुंबई July 16, 2018

नैशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल के मुंबई पीठ ने अपने आदेश में कहा है कि साइरस मिस्त्री ने कुछ मामलों पर जरूरी प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया, जो टाटा संस की बहुलांश शेयरधारक टाटा ट्रस्ट के हितों के लिए महत्वपूर्ण थे। वेलस्पन के साथ टाटा पावर के 90 अरब रुपये के सौदे से पहले मिस्त्री ने टाटा संस की बोर्ड बैठक नहीं बुलाई। यह टाटा संस के अनुच्छेद 21 ए के प्रावधानों का उल्लंघन है। टाटा संस ने 12 जून को ऐलान किया ता कि वह 92.49 अरब ररुपये में वेलस्पन का अधिग्रहण करेगी और सितंबर में इस अधिग्रहण को पूरा कर लिया। जेएम फाइनैंशियल ने इस लेनदेन के लिए टाटा पावर की सलाहकार के तौर पर काम किया।

इस अनुच्छेद में कहा गया है, होल्डिंग कंपनी में टाटा ट्रस्ट की शेयरधारिता को प्रभावित करने वाले किसी भी मामले की चर्चा कंपनी के निदेशक मंडल में की जानी चाहिए, अगर समूह की कंपनियां 1 अरब रुपये से ज्यादा निवेश का फैसला लेती हो और जो सालाना कारोबारी योजना का हिस्सा न हो।

आदेश में कहा गया है, ऐसे मामले कंपनी के निदेशक मंडल के सामने टाटा पावर की तरफ से ऐसी परियोजनाओं के अधिग्रहण से पहले रखे जाने चाहिए क्योंकि कंपनी को अधिग्रहण के लिए कर्ज मुहैया कराना होता है। हालांकि दस्तावेज बताते हैं कि कागजात ट्रस्ट के नामांकित निदेशकों को भेजे गए थे, लेकिन मिस्त्री ने टाटा पावर कंपनी की तरफ से वेलस्पन के साथ करार पर हस्ताक्षर से पहले बोर्ड बैठक नहीं बुलाई।

अपनी याचिका में मिस्त्री ने आरोप लगाया था कि ट्रस्ट का अत्यधिक हस्तक्षेप होता है। इसके तहत मिस्त्री ने रतन टाटा व सूना वाला पर ट्रस्ट के नामांकित निदेशकों पर वीटो अधिकार लगाने का आरोप लगाया था।

इस लेनदेन पर नजर डालने के बाद यह स्पष्ट हो जाता है कि टाटा संस ने टाटा पावर कंपनी की तरफ से 12 जून 2016 को लेनदेन पर आगे बढऩे से पहले बोर्ड बैठक नहीं बुलाई और इस तरह से अकेले ही अनुच्छेद 21 ए के तहत दी गई शक्तियों का इस्तेमाल किया जबकि ऐसे लेनदेन में निवेश का बड़ा हिस्सा टाटा संस की तरफ से दिया जाना था।

एनसीएलटी के आदेश में ये बातें कही गई है। इस आदेश में ट्रस्ट के नामांकित निदेशकों नितिन नोहारिया और विजय सिंह की तरफ से प्रस्ताव पर आगे बढ़े जाने से पहले रतन टाटा से की गई बातचीत को सही ठहराया गया है। आदेश में कहा गया है, क्या ट्रस्ट के नामांकित निदेशकों को प्रस्ताव पर आगे बढऩे का निर्देश देना कंपनी की गतिविधियों में हस्तक्षेप होता है? ट्रस्ट या इसके नामांकित निदेशकों की सहमति के बिना मिस्त्री ने प्रस्ताव को आगे बढ़ाया और इस तरह से उनका कदम कंपनी के हितों के लिए हानिकारक है।
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