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ब्रेक्सिट, भारी पूंजीगत खर्च से टाटा मोटर्स पर दबाव

राम प्रसाद साहू /  July 15, 2018

टाटा मोटर्स की शेयर कीमत विभिन्न चिंताओं की वजह से पिछले पखवाड़े के दौरान लगभग 12 फीसदी लुढ़की। इन चिंताओं में ब्रिटेन के यूरोपीय यूनियन से निकलने ('ब्रेक्सिट') का प्रभाव, अगले कुछ वर्षों के दौरान भारी निवेश और ब्रिटिश सहायक कंपनी जगुआर लैंड रोवर (जेएलआर) में सुस्त बिक्री मुख्य रूप से शामिल हैं।  इनमें त्वरिक बदलाव ब्रेक्सिट था। वैश्विक निवेश बैंकर गोल्डमैन सैक्स का मानना है कि इससे घरेलू मोर्चे तथा खरीदारी लागत दोनों के संदर्भ में जेएलआर पर प्रभाव पड़ सकता है। कंपनी के आठ वैश्विक संयंत्रों में तीन ब्रिटेन में हैं। अमेरिकी सरकार द्वारा यूरोप में निर्मित वाहनों पर लगभग 20 प्रतिशत सीमा शुल्क लगाए जाने से जेएलआर का अमेरिका में निर्माण आधार नहीं रह गया है।

 
अन्य अनिश्चितता बिक्री वृद्घि है। सिटी रिसर्च के विश्लेषकों का कहना है कि कंपनी अब ज्यादा वास्तविक हो गई है और उसने आंतरिक तौर पर 5 से 7 प्रतिशत सालाना बिक्री वृद्घि का अनुमान व्यक्त किया है जबकि पहले यह 10-12 प्रतिशत था। इसके पीछे कई कारक हैं। फोक्सवैगन डीजल उत्सर्जन घोटाले की वजह से उपभोक्ता रुझान नकारात्मक हुआ है। अधिक सख्त नियमन की आशंका को देखते हुए कंपनी के लिए चुनौती पैदा हुई है। तथ्य यह है कि यूरोप में बेचे जाने वाले जेएलआर के लगभग 85 प्रतिशत वाहन डीजल-संचालित होते हैं जिससे कंपनी पर दबाव बढ़ा है। यह भागीदारी एक साल पहले के लगभग 90 प्रतिशत से घटी है, लेकिन अभी भी पोर्टफोलियो में डीजल वाहनों का दबदबा बना हुआ है। बिक्री से संबंधित कुछ समस्याओं का असर जेएलआर के जून तिमाही के आंकड़ों में दिखा है। कंपनी ने सालाना आधार पर सिर्फ 0.9 प्रतिशत की वृद्घि दर्ज की है। जहां उसके यूरोपीय व्यवसाय ने चार फीसदी की गिरावट दर्ज की है, वहीं ब्रिटिश वृद्घि सपाट रही।
 
बाजार के नजरिये से अन्य समस्या निवेश का ऊंचा स्तर है। जेएलआर 2021 तक हर वर्ष 4.5 अरब पौंड का निवेश करेगी। इस लगभग 13 अरब पौंड के कुल पूंजीगत खर्च में से लगभग 50 प्रतिशत नए उत्पादों पर खर्च होगा। 20 प्रतिशत निवेश विद्युतीकरण और संबंधित कार्यों पर किया जाएगा, शेष खर्च क्षमता से संबंधित होगा। इसलिए वित्त वर्ष 2019 और वित्त वर्ष 2020 में कंपनी नकारात्मक नकदी प्रवाह दर्ज कर सकती है।  अल्पावधि में कंपनी बदलती ग्राहक जरूरतों के साथ स्वयं को ढालने पर तेजी से ध्यान केंद्रित कर रही है। क्लीनर इंटरनल कम्बश्चन इंजिंस (आईसीई), हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वाहनों के अलावा कंपनी का मुख्य जोर इन्फोटेनमेंट, कनेक्टिविटी और ऑटोनोमस ड्राइविंग पर रहेगा। मौजूदा 12 मॉडलों से कंपनी नए मॉडल की संख्या बढ़ाकर 16 करेगी जिसमें डिफेंडर और कंपनी का पहला फुली इलेक्ट्रिक व्हीकल आई-पेस (जल्द लॉन्च होगा) भी शामिल होगा। अपने मॉड्यूलर और लॉन्गीट्यूडिनल आर्कीटेक्चर से कंपनी को समान प्लेटफॉर्म से हाइब्रिड, आईसीई और किसी मॉडल के इलेक्ट्रिक वारंट को लॉन्च करने में मदद मिलेगी। 
 
डॉयचे बैंक के विश्लेषक इस शेयर के लिए दो उत्प्रेरक देख रहे हैं। उनका मानना है कि यदि आई-पेस को सालाना 25-30,000 यूनिट के ऑर्डर मिले तो इससे शेयर की मूल्य धारणा बदल सकती है और डीजल से जुड़ी चिंता कम हो सकती है। अन्य कारक लागत नियंत्रण और बेहतर मिश्रण की वजह से मार्जिन प्रदर्शन में सुधार है। चीन ने अपने आयात शुल्क में कटौती की है। परिचालन दक्षता और लागत नियंत्रण से जेएलआर को मार्जिन में 280 आधार अंक की वृद्घि दर्ज करने में मदद मिलनी चाहिए। कंपनी ने एबिटा के लिए 4 से 7 प्रतिशत और दीर्घावधि के लिए 7 से 9 प्रतिशत का अल्पावधि लक्ष्य रखा है। वित्त वर्ष 2018 के लिए एबिटा मार्जिन 3.2 प्रतिशत था। 
 
कंपनी के लिए अन्य सकारात्मक बदलाव भारत में मजबूत प्रदर्शन है। वाणिज्यिक और यात्री वाहनों दोनों ने शानदार बिक्री वृद्घि दर्ज की है। जहां भारतीय व्यवसाय में अच्छा सुधार शुभ संकेत है, वहीं बाजार जेएलआर में सुधार पर लगातार ध्यान बनाए रखेगा, क्योंकि राजस्व का बड़ा हिस्सा और लगभग पूरा मुनाफा इस ब्रिटिश सहायक कंपनी से आता है। हालांकि जेएलआर के लिए ब्रेक्सिट से जुड़ी चिंताओं और नए उत्पाद पेशकश में लगने वाले समय और अधिक पूंजीगत खर्च को देखते हुए अगली कुछ तिमाहियां चुनौतीपूर्ण होंगी।
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