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रिलायंस इंडस्ट्रीज: सात साल में राजस्व दोगुना करने की चुनौती

विशाल छाबडिय़ा /  July 15, 2018

रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने 5 जुलाई को शेयरधारकों की सालाना आम बैठक (एजीएम) में कहा था, 'चूंकि भारत ने वर्ष 2025 तक अपनी अर्थव्यवस्था का आकार दोगुना करने की यात्रा पर शुरुआत की है, इसलिए मुझे विश्वास है कि हमारा आकार समान अवधि में दोगुना से भी ज्यादा हो जाएगा।' हालांकि उनका मुख्य संकेत बदलते राजस्व और उत्पाद मिश्रण के अलावा प्रमुख पेट्रोरसायन व्यवसाय में मूल्य वृद्घि को मजबूत बनाना था।  आरआईएल को भारत की दूसरी सबसे मूल्यवान कंपनी बनाने में सक्षम रहे इस व्यक्ति ने अपनी गणनाएं स्वयं की होंगी। सात वर्षों में दोगुने राजस्व का मतलब है कि आरआईएल को 10.4 प्रतिशत की सालाना चक्रवृद्घि दर से वृद्घि दर्ज करने की जरूरत होगी। इसके अलावा, अपनी बिक्री (राजस्व या कारोबार) और कच्चे तेल की कीमतों (वित्त वर्ष के लिए औसत) के बीच मजबूत सह-संबंध से भी यह संकेत मिलता है कि अंबानी सही साबित हो सकते हैं। 

 
वित्त वर्ष 2002 और वित्त वर्ष 2013 के बीच, जब कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का रुझान था, आरआईएल की शुद्घ बिक्री लगातार बढ़ रही थी और यह वित्त वर्ष 2002 के 421 अरब रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2014 में 4,345 अरब रुपये हो गई थी। जैसे ही वित्त वर्ष 2016 के बाद तेल कीमतों में गिरावट आई, शुद्घ बिक्री भी दो वर्षों के दौरान 37 प्रतिशत गिरकर वित्त वर्ष 2016 में 2,740 अरब रुपये रह गई। भले ही, क्षमता विस्तार और उत्पाद मिश्रण में लचीलापन आया हो, लेकिन साथ ही राजस्व भी प्रभावित हुआ होगा। 2016 में कई वर्षों के निचले स्तर के बाद पिछले दो वर्षों में तेल कीमतें बढऩे से आरआईएल को राजस्व में वृद्घि के तौर पर फायदा हुआ है। क्षमता वृद्घि और उत्पाद मिश्रण से आरआईएल का शुद्घ लाभ पिछले 15-16 वर्षों (दो अवसरों को छोड़कर) में मजबूत रहा है। 
 
आरआईएल कितनी बार राजस्व दोगुना करने में कामयाब रही है। इसके लिए यदि पिछले समय पर विचार करें तो पता चलता है कि अंबानी ने आगामी लक्ष्य के बारे में सही गणना की है। इसके लिए वित्त वर्ष 2006 और वित्त वर्ष 2014 के बीच के तीन से चार वर्षों पर विचार किया गया। राजस्व दोगुना हेाने की अनुमानित अवधि तलाशने के लिए पिछले वर्षों के आधार पर गणना की गई है। वित्त वर्ष 2006-2014 की अवधि वह समय था जब तेल कीमतें भी मजबूत हो रही थीं। वित्त वर्ष 2014 के बाद जैसे ही इन कीमतों में गिरावट शुरू हुई, रिलायंस को कारोबार दोगुना करने में लंबा समय लगा। मौजूदा समय में उद्योग के जानकार तेल कीमतें 75-77 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 100 डॉलर पर पहुंच जाने का अनुमान जता रहे हैं। यदि ऐसा होता है तो आरआईएल के राजस्व में अच्छी तेजी आ सकती है। 
 
मुनाफे की स्थिति
 
महत्त्वपूर्ण सवाल यह है कि शुद्घ लाभ और बाजार मूल्य में किस तरह से सुधार आएगा। कुछ वर्षों को छोड़कर, खासकर वित्त वर्ष 2012-15 के दौरान जब मुनाफे का रुझान सपाट था तो आरआईएल की बाजार वैल्यू ने उसकी आय में इस रुझान को दोहराया। हालांकि तेल और पेट्रोरसायन कीमतों का भी मुनाफे पर असर पड़ा है, लेकिन मुनाफे और बाजार मूल्य के बीच सह-संबंध मजबूत हआ है। वित्त वर्ष 2010 के बाद भी आरआईएल को मुनाफा दोगुना करने में सात वर्ष लगे। अब 2.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक का उसका दूरसंचार निवेश नए राजस्व विकल्प मुहैया करा रहा है। आरआईएल की एजीएम के बाद 6 जुलाई की एक रिपोर्ट में कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज ने अनुमान व्यक्त किया कि दूरसंचार व्यवसाय का शुद्घ लाभ वित्त वर्ष 2018 के 7 अरब रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2021 में 121 अरब रुपये और वित्त वर्ष 2025 में 284 अरब रुपये हो जाएगा। अन्य प्रमुख उपभोक्ता व्यवसाय भी तेज रफ्तार से बढ़ रहा है। पिछले महीने एक रिपोर्ट में मॉर्गन स्टैनली ने अनुमान व्यक्त किया था कि आरआईएल का समेकित शुद्घ लाभ 361 अरब रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2021 में 623 अरब रुपये हो जाएगा। दूरसंचार लाभ में तेजी को देखते हुए, खासकर वित्त वर्ष 2021 के बाद, समेकित आंकड़ा वित्त वर्ष 2025 तक काफी मजबूत हो जाएगा।
 
एजीएम में, अंबानी ने कहा था कि उपभोक्ता व्यवसाय- जियो और रिटेल- कुल परिचालन आय में 13 प्रतिशत का प्रतिनिधित्व करते हैं जो पिछले साल (वित्त वर्ष 2017) के महज दो फीसदी से अधिक है। यह वृद्घि ऐसे समय में हुई है जब हाइड्रोकार्बन व्यवसाय तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने कहा, 'मैं विश्वास के साथ यह कह सकता हूं कि रिलायंस एक आकर्षक मोड़ पर पहुंची है। गोल्डन डिकेड (आरआईएल ने अपने आईपीओ के बाद 50वां वर्ष मनाया है) के साथ हमारा उपभोक्ता व्यवसाय कंपनी की कुल आय में उसी तरह से अहम योगदान देगा जैसा कि हमारे ऊर्जा और पेट्रोरसायन व्यवसायों का योगदान रहा है।'  
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