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'रेगिस्तान का जहाज' दिखाएगा दुग्ध उत्पादन में नई दिशा

खेती-बाड़ी
सुरिंदर सूद /  July 15, 2018

ऊंटनी के दूध में अलग तरह की खासियत और औषधीय गुण होने से यह जल्द ही एक अहम दुधारू पशु के तौर पर उभर सकता है। यूरोप और कुछ अन्य देशों में ऊंटनी के दूध को पहले से ही फंक्शनल फूड के तौर पर महंगे दाम पर बेचा जा रहा है। बीकानेर स्थित राष्ट्रीय ऊंट अनुसंधान केंद्र (एनआरसीसी) के वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर भारत में भी ऊंटनी का दूध टाइप-1 डायबिटीज और उच्च रक्तचाप जैसी बीमारियों के इलाज में सुपरफूड के तौर पर स्वीकृत हो जाता है तो यहां के भी ऊंट पालकों को 250 रुपये प्रति लीटर का ऊंचा भाव मिल सकता है। ऊंटनी के दूध को पीलिया, तपेदिक, दमा और कालाजार जैसी खतरनाक बीमारियों की रोकथाम एवं इलाज में उपयोगी माना जाता है। इसके अलावा बच्चों में ऑटिज्म एवं मानसिक विक्षिप्तता जैसी स्थिति से निपटने में भी इसका दूध फायदेमंद माना जाता है। नए अनुसंधानों से पता चला है कि ऊंटनी के दूध में कैंसर-रोधी गुण भी होते हैं।

 
दूध का कारोबार करने वाली अमूल जैसी कुछ बड़ी कंपनियां अहमदाबाद, मुंबई और दिल्ली में ऊंटनी के दूध की बिक्री करने की भी योजना बना रही हैं। कई स्टार्टअप भी ऊंटनी के दूध और उससे बने उत्पादों की ऑनलाइन बिक्री के लिए आगे आ रही हैं। इस दूध के गुणों के बारे में धीरे-धीरे जागरूकता फैलने से इसकी मांग भी बढऩे लगी है। ऐसी स्थिति में कई उद्यमी ऊंटपालन केंद्रों के संचालन और उसके दूध के प्रसंस्करण एवं कारोबार में कदम रखने की सोच सकते हैं।  भारत में ऊंट को परंपरागत तौर पर रेगिस्तानी एवं बंजर इलाकों में आवागमन और कृषि कार्यों के लिए उपयोगी मवेशी माना जाता रहा है। लेकिन मोटर-चालित वाहनों की संख्या बढऩे और खेती में मशीनी उपकरणों का इस्तेमाल बढऩे से रेगिस्तान में भी ऊंट की मांग कमजोर पडऩे लगी है। हालत यह हो गई है कि पिछले चार दशकों में ऊंटों की संख्या 10 लाख से गिरकर चार लाख के करीब आ चुकी है। दूध उत्पादक के तौर पर इसकी भूमिका को समुचित मान्यता नहीं मिलने से भी इनकी संख्या में गिरावट आई है।
 
ऊंटनी के दूध का आर्थिक मूल्य अधिक होने की बात को सबसे ज्यादा नजरअंदाज किया गया है। यह रेगिस्तान एवं बंजर इलाकों के प्रतिकूल मौसम में भी बाकी मवेशियों की तुलना में कहीं अधिक समय तक दुधारू बना रहता है। असल में, यह एक इकलौता जानवर है जो सूखे की बेहद प्रतिकूल स्थिति में भी जिंदा बचा रहता है जबकि दूसरे पालतू पशु पानी एवं चारे की कमी के चलते दम तोडऩे लगते हैं। ऊंट की यह खूबी इसके मालिकों को भी विपरीत स्थितियों में भी जिंदा रहने में मदद करती है क्योंकि यह तीन हफ्ते तक भी पानी नहीं मिलने पर दूध देना जारी रखता है और केवल घासफूस खाकर काम चला सकता है। ऊंटनी का दूध कमरे में 37 डिग्री सेल्सियस के तापमान पर करीब आठ घंटे तक सुरक्षित रखा जा सकता है। वहीं रेफ्रिजरेटर में चार से छह डिग्री सेल्सियस के तापमान में इसे तीन सप्ताह से भी अधिक समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है। इसके अलावा बच्चे को जन्म देने के बाद लंबे समय तक ऊंटनी दूध देती रहती है। यह अवधि आठ महीने से लेकर दो साल तक भी हो सकती है जबकि औसत समय 16 महीने का होता है। इसके उलट गाय बछड़े के जन्म के बाद आठ-दस महीने तक ही दूध देती है। वहीं ऊंटनी रोजाना औसतन चार से छह लीटर दूध देती है और बढिय़ा नस्ल वाली ऊंटनी तो 10 लीटर दूध भी दे सकती है। यह काफी हद तक साधारण नस्ल वाली देसी गायों के दूध उत्पादन के बराबर है लेकिन संकर नस्ल वाली गायों के दैनिक दूध उत्पादन से थोड़ा कम है। संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) का मानना है कि ऊंटनी की दूध देने की क्षमता को समुचित चारे एवं उन्नत देखभाल के जरिये 20 लीटर रोजाना के स्तर तक पहुंचाया जा सकता है। पाकिस्तान एवं अफगानिस्तान में ऊंटों की कुछ नस्लें रोजाना 30 लीटर तक दूध दे सकती हैं।
 
एनआरसीसी भारतीय ऊंटों की दूध देने की क्षमता को बढ़ाने के लिए लगातार कोशिश कर रहा है। इसके अलावा इस दूध से मूल्यवान उत्पाद तैयार करने की तकनीक के विकास की भी कोशिश चल रही है। एनआरसीसी ने बीकानेरी, कच्छी और मेवाड़ी नस्ल वाली ऊंटनियों को दुग्ध उत्पादन के मामले में बेहतर बताया है। शोध केंद्र के निदेशक एन पाटील बताते हैं कि बढिय़ा नस्ल वाले 102 नर ऊंटों को ऊंट-बहुल क्षेत्रों में प्रजनन के लिए भेजा गया है। ऊंट रखने वाले पशुपालकों को स्वयं-सहायता समूह बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। 
 
इसके अलावा दूध की खरीद-बिक्री में लगी सहकारी समितियों और कंपनियों को भी ऊंटनी के दूध और उससे बने उत्पादों के कारोबार के लिए उत्साहित किया जा रहा है। भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ने हाल ही में ऊंटनी के दूध की बेहतर मार्केटिंग के लिए मानक निर्धारित कर दिए हैं। इस तरह भारतीय परिवेश में ऊंट की भूमिका और छवि को नया आयाम देने की जमीन तैयार हो चुकी है। 
Keyword: camel, rajsthan, milk ,,
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