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आईड़ीबीआई में निवेश को अंतिम रूप आज

श्रीमी चौधरी / मुंबई July 15, 2018

बीमा क्षेत्र की दिग्गज जीवन बीमा निगम (एलआईसी) फंसे हुए सरकारी बैंक आईडीबीआई बैंक के आमूल चूल परिवर्तन की रणनीति को अंतिम रूप देने को तैयार है। एलआईसी बोर्ड की बैठक 16 जुलाई को है। इसमें बैंक में हिस्सेदारी बढ़ाकर 51 प्रतिशत करने के प्रस्ताव को मंजूरी मिल सकती है। इस समय आईडीबीआई बैंक में सरकार की हिस्सेदारी 80.96 प्रतिशत और एलआईसी की हिस्सेदारी 10.82 प्रतिशत है।  एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक बोर्ड बैंक को पुनर्जीवित करने के खाके पर चर्चा करेगा और उसके मुताबिक अंतिम फैसला करेगा। सूत्रों ने कहा कि एलआईसी ने इस मसले पर आईडीबीआई बैंक से कई दौर में बात की है। बैंक के नए प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी बी श्रीराम ने एलआईसी के शीर्ष प्रबंधन से बैंक के पुनर्जीवन, कर्ज की स्थिति, बैलेंस शीट और मौजूदा देनदारियों आदि पर चर्चा की है। 
 
उपरोक्त उल्लिखित अधिकारी ने कहा कि बोर्ड की बैठक के बाद एलआईसी और आईडीबीआई बैंक दोनों ही भारतीय रिजर्व बैंक  और प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी सहित नियामकीय प्राधिकरणों से मंजूरी की मांग करेंगी।  एलआईसी ने ताजा इक्विटी शेयरों के तरजीही आवंटन के माध्यम से आईडीबीआई बैंक में 100 से 130 अरब रुपये के बीच निवेश की योजना बनाई है। बहरहाल यह सिर्फ रणनीतिक निवेश होगा और बीमाकर्ता का बैंक प्रबंधन पर नियंत्रण नहीं होगा। पूंजी डालने पर अंतिम फैसला सोमवार को मुंबई में होने वाली एआईसी बोर्ड की बैठक में लिया जाएगा।
 
इसके अलावा एलआईसी इस सौदे के बाद बैंक बोर्ड में अपने दो निदेशक भी नामित करने की सिफारिश करेगी। सूत्रों ने कहा कि एलआईसी बोर्ड आईडीबीआई बैंक में अल्पांश साझेदारों के लिए खुली पेशकश करने संबंधी मसले पर भी चर्चा करेगा। सेबी की अधिग्रहण संहिता के मुताबिक किसी भी सूचीबद्ध कंपनी में 25 प्रतिशत से ज्यादा अधिग्रहण की स्थिति में खुली पेशकश की जरूरत होती है। इस मामले में अल्पांश हिस्सेदारी 8.22 प्रतिशत है। बहरहाल इस पेशकश में सरकार के हिस्सेदारी लेने की संभावना नहीं है। 
 
पिछले महीने भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण ने आईडीबीआई बैंक में 51 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदने की एलआईसी की योजना को मंजूरी दे दी थी। इस कदम से आईडीबीआई में सरकार की हिस्सेदारी 51 प्रतिशत से नीचे हो जाएगी।  एक अन्य अधिकारी के मुताबिक इस सौदे से बीमाकर्ता द्वारा उसके विभिन्न उत्पादों की बैंकों के माध्यम से बिक्री के लिए माहौल तैयार होगा। इसके अलावा एलआईसी के वितरण नेटवर्क और बैंक की शाखाओं के बीच तालमेल से भी जमा बढ़ाने और परिचालन लागत घटाने में मदद मिलेगी। 
Keyword: IDBI bank, LIC, NPA,,
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