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भूषण पावर के लिए टाटा बनाने लगी योजना

ईशिता आयान दत्त / कोलकाता July 15, 2018

दिवालिया प्रक्रिया का सामना कर रही भूषण पावर ऐंड स्टील के अधिग्रहण की बाजी किसके हाथ लगेगी, यह अभी तय नहीं हो पाया है, लेकिन टाटा स्टील ने इसके लिए तैयारी शुरू कर दी है। भूषण स्टील के सौदे की तरह टाटा स्टील ने रकम तैयार रखी है और भूषण पावर ऐंड स्टील के लिए अपने संगठन के भीतर बातचीत शुरू कर दी है। सूत्रों ने कहा कि भूषण पावर ऐंड स्टील के सौदे का ढांचा भूषण स्टील की तरह बनाया जाएगा और टाटा स्टील पहले से ही इसकी तैयारी कर रही है। जहां तक रकम का सवाल है, टाटा स्टील अल्पावधि का कर्ज लेगी और बाकी नकदी संग्रह आदि और होल्डिंग कंपनी के स्तर पर कुछ इंतजाम किया जा सकता है। यह पूछे जाने पर कि अगर टाटा स्टील के हाथ बाजी लगती है तो भूषण पावर ऐंड स्टील के लिए रकम का इंतजाम वह कैसे करेगी, टाटा स्टील के प्रवक्ता ने कहा, चूंकि मामला आईबीसी की प्रक्रिया के दायरे में है, लिहाजा भूषण पावर ऐंड स्टील के मसले पर हम टिप्पणी करने की स्थिति में नहीं हैं। 

 
टाटा स्टील को हाल में 90 अरब रुपये के वाणिज्यिक प्रतिभूति कार्यक्रम के लिए इक्रा से रेटिंग मिली है। क्या इस रकम का इस्तेमाल भूषण पावर के लिए किया जाएगा, प्रवक्ता ने कहा कि वाणिज्यिक प्रतिभूति की रेटिंग सामान्य कार्यशील पूंजी व अन्य जरूरतों के लिए है। टाटा स्टील ने वाणिज्यिक प्रतिभूति जारी करने करने के समय पर टिप्पणी नहीं की। भूषण पावर ऐंड स्टील के लिए टाटा स्टील ने शायद वित्तीय लेनदारों को 175 अरब रुपये के अग्रिम भुगतान की पेशकश की है। बोली की कुल कीमत 245 अरब रुपये रहने की संभावना है। सूत्रों ने कहा, टाटा स्टील इस कंपनी में 70 अरब रुपये निवेश करेगी। नई इक्विटी जारी की जाएगी और इसका इस्तेमाल भविष्य के विस्तार के लिए पूंजीगत खर्च के तौर पर किया जाएगा। सूत्रों ने कहा, टाटा स्टील मंजूरी मिलने के बाद वक्त नहीं गंवाना चाहती।
 
टाटा स्टील ने एनसीएलटी की मंजूरी मिलने के 48 से 72 घंटे मेंं ही भूषण स्टील का नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया था। इसके लिए कंपनी ने छह महीने तक जमकर काम किया था। सूत्रों ने कहा, संगठन के भीतर कुछ लोगोंं ने भूषण पावर ऐंड स्टील पर बातचीत की है। भूषण पावर ऐंड स्टील के लिए लेनदारों की समिति तरजीही बोलीदाता को अंतिम रूप दे सकती है और समाधान योजना पर वोटिंग कर सकती है। क्योंकि नैशनल कंपनी लॉ अपीली ट्रिब्यूनल ने लिबर्टी हाउस की याचिका पर कंपनी के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। लिबर्टी हाउस की बोली टाटा स्टील के मुकाबले करीब 10 अरब रुपये ज्यादा है। पिछली बैठक में लेनदारों की राय अलग-अलग थी, लेकिन ज्यादातर लेनदार टाटा स्टील के हक में थे।
Keyword: bhusan steel, NCLT, tata steel,,
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