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प्रधानमंत्री आवास योजना में ब्याज रियायत नहीं आसां

तिनेश भसीन /  July 15, 2018

प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई) के तहत ब्याज पर रियायत की योजना यानी क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी स्कीम (सीएलएसएस) के नियम खासे पेचीदे हैं और अक्सर ये कर्ज देने वाली संस्था या बैंक को भी गफलत में डाल देते हैं। इसका नतीजा यह होता है कि जो व्यक्ति इसके लिए योग्य होता है, उसकी सब्सिडी भी डूबने की नौबत आ सकती है। जब सुहास जोशी ने मकान खरीदने के लिए आवास ऋण लेने की बात की तो बैंक के कर्मचारी ने उन्हें बताया कि उन्हें इस योजना के तहत ब्याज पर रियायत नहीं मिल पाएगी क्योंकि वह 23 साल के लिए कर्ज ले रहे हैं। जोशी को पता चला कि नियमों के मुताबिक केवल 20 साल तक की अवधि वाले आवास ऋण पर ही सीएलएसएस के तहत सब्सिडी दी जाती है। लेकिन फुलर्टन इंडिया होम फाइनैंस कंपनी के पूर्ण स्वामित्व वाली गृहशक्ति के मुख्य कार्य अधिकारी राकेश मक्कड़ इसे अधूरी जानकारी बताते हैं। वह बताते हैं, 'अगर वह ग्राहक अर्हता की अन्य कसौटियों पर खरा उतरता है तो उसे सब्सिडी मिल सकती है। ऐसे मामलों में सब्सिडी की गणना करने के लिए कर्ज की पूरी अवधि में से केवल 20 साल लिए जाएंगे।'

 
यह मामला सुलझ भी जाए तो मालिकाना हक का मुद्दा सामने आता है। नियमों के मुताबिक अगर सब्सिडी हासिल करनी है तो परिवार के किसी भी सदस्य के नाम पर कोई मकान नहीं होना चाहिए। नियमों में परिवार की व्याख्या करने के लिए जिस भाषा का इस्तेमाल किया गया है, उससे भी आवेदक की अर्हता के बारे में भ्रम हो सकता है। उसमें कहा गया है कि परिवार का अर्थ है - पति, पत्नी और अविवाहित संतान। लेकिन उस संतान का क्या होगा, जो वयस्क है, अविवाहित है और कमाऊ भी है? इंडिया इन्फोलाइन हाउसिंग फाइनैंस के मुख्य कार्य अधिकारी मोनू रात्रा कहते हैं, 'अगर कोई व्यक्ति वयस्क है, अविवाहित है और कमा रहा है तो माता-पिता के पास मकान होने के बाद भी वह ब्याज में सब्सिडी के लिए आवेदन कर सकता है।' लेकिन अगर पिता और पुत्र दो अलग-अलग मकान खरीदते हैं और दोनों ही सब्सिडी के लिए आवेदन करते हैं तो दोनों को सब्सिडी मिलेगी या नहीं मिलेगी, यह बात स्पष्टï नहीं है।
 
घर खरीदारों को वे नियम खास तौर पर समझ लेने चाहिए, जो सीधे उन पर लागू होते हैं। सीएलएसएस को दो श्रेणियों में बांट दिया गया है - पहली आर्थिक रूप से दुर्बल वर्ग (ईडब्ल्यूएस) तथा कम आय वालों की श्रेणी है और दूसरी मझोली आय वर्ग-1 (एमआईजी-1) तथा मझोली आय वर्ग-2 (एमआईजी-2) की श्रेणी है। इन दोनों श्रेणियों के लिए ज्यादातर नियम एक जैसे ही हैं, लेकिन कुछ नियम अलग-अलग भी हैं। ईडब्ल्यूएस या एलआईजी की श्रेणी में महिला आवेदक का होना जरूरी है। वह घर की अकेली मालकिन भी हो सकती है और मकान पर उसका संयुक्त मालिकाना हक भी हो सकता है। मगर एमआईजी-1 और एमआईजी-2 श्रेणी में महिला आवेदक होना अनिवार्य नहीं है। इसी तरह ईडब्ल्यूएस या एलआईजी श्रेणी में मकान के आकार पर किसी तरह की बंदिश नहीं है। यह बात अलग है कि सब्सिडी की गणना पहले से निर्धारित आकार (30 वर्ग मीटर और 60 वर्ग मीटर) पर ही की जाएगी। मगर एमआईजी-1 और एमआईजी-2 श्रेणी में सरकार ने मकान के आकार की सीमा तय कर दी है। एमआईजी-1 मकान के लिए यह सीमा 160 वर्ग मीटर (1,722 वर्ग फुट) और एमआईजी-2 के लिए 200 वर्ग मीटर (2,153 वर्ग फुट) है।
 
अलबत्ता अच्छी खबर यह है कि नियमों के जाल में फंसकर भ्रम का शिकार होने के कारण या कर्ज देने वाली संस्था के कर्मचारी की अधकचरी जानकारी के कारण अगर आप इस योजना का फायदा उठाने से चूक गए हैं तो भी आपके लिए मौका बाकी है। एस्सेल होम फाइनैंस की कार्यकारी निदेशक और मुख्य कार्य अधिकारी मिनी नायर का कहना है, 'यदि कोई व्यक्ति इस योजना की सभी कसौटियों पर खरा उतर रहा है, लेकिन मकान खरीदते समय वह सब्सिडी का फायदा नहीं उठा पाया है तो वह कर्ज देने वाली संस्था के जरिये बाद में भी उसके लिए आवेदन कर सकता है।' 
Keyword: real estate, property, PMAY, प्रधानमंत्री आवास योजना पीएमएवाई,
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