बिजनेस स्टैंडर्ड - पूर्वी राज्यों में बिजली आपूर्ति पर पड़ेगा असर
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पूर्वी राज्यों में बिजली आपूर्ति पर पड़ेगा असर

श्रेया जय और शाइन जैकब / नई दिल्ली July 13, 2018

देश के पूर्वी हिस्से में बिजली की किल्लत पैदा होने की आशंका है। इसकी वजह यह है कि झारखंड की राजमहल खदान के आसपास के गांवों के लोग भूमि अधिग्रहण के एïवज में ज्यादा मुआवजे की मांग को लेकर विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। यह खदान इस क्षेत्र की सबसे बड़ी खदान है, जहां से पश्चिम बंगाल में फरक्का विद्युत संयंत्र (2,100 मेगावॉट) और बिहार में कहलगांव विद्युत संयंत्र (2,340 मेगावॉट) को कोयले की आपूर्ति होती है।  राजमहल कोयला खदान के आसपास के गांव ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) द्वारा जमीन अधिग्रहण के लिए दिए जाने वाले वर्तमान मुआवजे को लेकर विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। ईसीएल सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी कोल इंडिया की सहायक है। इस कोयला खदान में 70 करोड़ टन कोयले का भंडार है। यह पिछले दो दशकों से चालू है। इस खदान में से 60 फीसदी कोयले का खनन हो चुका है। 
 
खदान का विस्तार एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है और इस क्षेत्र (लालमटिया) में कोयले की भारी संभावनाएं हैं। लेकिन विस्तार की योजना में रोड़ा अटक गया है। ग्रामीणों ने ईसीएल द्वारा पेशकश किया गया मुआवजा लेने से इनकार कर दिया है। केंद्र सरकार ने झारखंड के मुख्यमंत्री रघुबर दास को राजमहल क्षेत्र में जमीन अधिग्रहण के मसले को सुलझाने के लिए तत्काल हस्तक्षेप करने को कहा है। केंद्र ने मुख्यमंत्री को आदिवासी इलाकों में जमीन अधिग्रहण का मसला तुरंत हल करने को कहा है क्योंकि ईसीएल को तत्काल उत्पादन शुरू करने की जरूरत है। कोयला मंत्रालय की तरफ से भेजे गए पत्र में चिंता जताई गई है कि एनटीपीसी के ताप विद्युत संयंत्रों को आगामी महीनों में कोयला आपूर्ति में कमी का सामना करना पड़ेगा। 
 
लालमटिया में ईसीएल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'मुआवजे की नई नीति के मुताबिक हम या तो जमीन खरीदने के लिए एकमुश्त राशि देते हैं या परिवार के एक व्यक्ति को नौकरी देते हैं और कम नकद मुआवजा देते हैं। यह सब उस अनिवार्य पुनर्वास के अलावा है, जो हम करते हैं। हम उन्हें राजी करने की कोशिश कर रहे हैं।'  अधिकारियों ने कहा कि ईसीएल को विस्तार योजना के मुताबिक कुल 30 हेक्टेयर जमीन की जरूरत है। कंपनी इस साल कम से कम 100 एकड़ खरीदने की योजना बना रही है, जिससे सालाना कोयला उत्पादन 7 करोड़ टन बढ़ जाएगा। वर्तमान खदान क्षेत्र में खनन का काम चालू है, लेकिन वहां केवल दो महीनों का भंडार बचा है। एक अधिकारी ने कहा, 'अगर एक और सप्ताह खनन में अवरोध रहा तो आपूर्ति प्रभावित होगी। दो सप्ताह में मॉनसून आ जाएगा, जिससे खनन परिचालन रुक जाता है। तब हम फरक्का और कहलगांव को आपूर्ति करने के लिए आरक्षित भंडार का इस्तेमाल करेंगे।'
 
इस बीच फरक्का और कहलगांव विद्युत संयंत्र को जरूरत से कम कोयले की आपूर्ति मिल रही है। फरक्का में एनटीपीसी के कार्याधिकारी ने कहा कि संयंत्र को करीब 1.5 लाख टन कोयला मिल रहा है, जो एक महीने पहले 4 लाख टन था। इस संयंत्र को 90 फीसदी क्षमता पर परिचालन के लिए करीब 30,000 टन कोयले की जरूरत होती है, इसलिए अब केवल 3 से 4 दिन का स्टॉक बच गया है। 
Keyword: power, electric, coal, बिजली,
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