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भाजपा से क्यों छिटक रहे हैं प्रवासी भारतीय

अर्चिस मोहन /  July 13, 2018

दक्षिण अफ्रीका में भारतीय मूल के लोगों की अच्छी खासी आबादी है। इस अफ्रीकी देश में करीब 15 लाख भारतवंशी रहते हैं जो वहां की आबादी का 3 फीसदी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25 से 27 जुलाई तक दक्षिण अफ्रीका की यात्रा करेंगे लेकिन 2016 के अपने पिछले दौरे की तरह इस बार वह भारतीय समुदाय को संबोधित नहीं करेंगे। मोदी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए दक्षिण अफ्रीका जा रहे हैं और 3 दिन जोहानिसबर्ग में रहेंगे। लेकिन इस दौरान उनका वहां भारतीय समुदाय के लोगों को संबोधित करने का कोई कार्यक्रम नहीं है। सरकार के कर्ताधर्ताओं को आशंका है कि जोहानिसबर्ग में लंदन की पुनरावृत्ति हो सकती है। अप्रैल में मोदी के लंदन दौरे में भारतीय मूल के कुछ वर्गों ने जबरदस्त विरोध प्रदर्शन किया था। 

 
दक्षिण अफ्रीका जाते हुए मोदी 24 जुलाई को युगांडा की यात्रा करेंगे। वहां उनका भारतीय मूल के प्रभावशाली लोगों को संबोधित करने का कार्यक्रम है। इसे लेकर युगांडा में भारतीय मूल के विभिन्न संगठनों के बीच विवाद चल रहा है। मामला इतना गहरा गया है कि 15 संगठनों ने कार्यक्रम का बहिष्कार करने की धमकी दी है। भारतीय उच्चायोग और भाजपा नेताओं के हस्तक्षेप के बावजूद यह मामला शांत नहीं हुआ है।  वर्ष 2014 के लोकसभा चुनावों में भाजपा की जीत में प्रवासी भारतीयों ने अहम भूमिका निभाई थी। मोदी दुनिया में जहां भी गए, वहां प्रवासी भारतीयों और भारतीय मूल के लोगों ने उनका जोरदार स्वागत किया। लेकिन भारतवंशियों को संभालना अब भाजपा के लिए सिरदर्द बनता जा रहा है। धर्म, जाति और भाषाई पहचान को लेकर उपजे घरेलू झगड़ों और भाजपा के राजनीतिक विरोधियों की कारगर पहल से अब प्रवासियों का मोदी से मोह भंग होता जा रहा है। 
 
मोदी द्वारा विदेशों खासकर कनाडा में भारतीय मूल के लोगों के आयोजनों में जुटाए गए धन को लेकर कुप्रबंधन के आरोप लगे हैं। साथ ही इस तरह की शिकायतें भी आई हैं कि किसी खास भाषाई समूह की ही मोदी सरकार और विदेशों में भारतीय मिशनों तक पहुंच है जबकि दूसरे क्षेत्रों के कारोबारियों की बात नहीं सुनी जा रही है।  विदेशों में भारतीय मूल के लोगों से संपर्क की जिम्मेदारी संभाल रहे कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (आप) के कार्यकर्ताओं का दावा है कि भारतवंशियों के एक बड़े वर्ग का भाजपा से मोह भंग हो चुका है। लेकिन विदेशों में भारतवंशियों से संपर्क स्थापित करने के लिए गठित भाजपा के संगठन द ओवरसीज फ्रेंड्स ऑफ बीजेपी के प्रमुख विजय चौथाईवाले इससे सहमत नहीं हैं। उनका कहना है कि दुनिया में भारत की बढ़ रही प्रतिष्ठïा के खिलाफ यह दुष्प्रचार किया जा रहा है। अलबत्ता पार्टी अब विदेशों में भारतवंशियों से संपर्क करने के बजाय सोशल मीडिया पर निर्भरता बढ़ा सकती है। आप के सोशल मीडिया प्रमुख और पार्टी के अमेरिकी चैप्टर के प्रभारी अंकित लाल का दावा है कि विदेशों में भारतवंशियों के बीच भाजपा को लेकर गहरी निराशा है। उन्होंने कहा, '2014 और उसके बाद के विदेशी दौरों में मोदी ने विदेशों में रहने वाले भारतीयों से वादा किया था कि भारतीय की अर्थव्यवस्था बढऩे से उन्हें फायदा होगा। लेकिन यह एक जुमला साबित हुआ।'
 
अमेरिका, कनाडा और इंग्लैंड में बसे पंजाबी मूल के लोगों के बीच आप की अच्छी पैठ है। भाजपा का दावा है कि आप के समर्थकों में अधिकांश वे लोग हैं जो खालिस्तान के समर्थक हैं। लेकिन आप का कहना है कि विदेशों में उसके समर्थकों में उत्तर भारतीय राज्यों के लोगों की भी अच्छी खासी संख्या है। सैम पित्रोदा और मिलिंद देवड़ा जैसे नेताओं के मार्गदर्शन में कांग्रेस ने पिछले एक साल के दौरान विदेशों में भारतीय मूल के लोगों के बीच पैठ बनाने के लिए बेहद सक्रियता के साथ काम रही है। तेलुगु देशम पार्टी और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी ने विदेशों में तेेलुगुभाषी लोगों से संपर्क साधा है जबकि ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस ने विदेशों में रह रहे बांग्ला समुदाय को साधने की कोशिश की है। माकपा ने भी अमेरिका और पश्चिमी यूरोप में शिक्षाविदों के बीच सोशल मीडिया मौजूदगी बढ़ाई है। 2019 के आम चुनाव नजदीक आ रहे हैं और विदेशों में विभिन्न भारतीय संगठनों के बीच संघर्ष बढ़ता जा रहा है। आप और कांग्रेस का मानना है कि इन चुनावों में एक कारक के रूप में मोटे तौर पर अनिवासी भारतीयों की भूमिका तटस्थ है।
Keyword: BJP, NRI, दक्षिण अफ्रीका,
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