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दुग्ध क्षेत्र में बहेगी निवेश की नदियां

दिलीप कुमार झा / मुंबई July 12, 2018

भारत के डेयरी क्षेत्र में दुग्ध संग्रहण केंद्रों से लेकर वितरण और उत्पाद पोर्टफोलियो समेत विभिन्न सुविधाओं के लिए अगले तीन वर्षों में 130-140 अरब रुपये का निवेश होने की संभावना है।  रेटिंग एजेंसी क्रिसिल के एक ताजा अध्ययन में अनुमान व्यक्त किया गया है कि काफी हद तक संगठित क्षेत्र की कंपनियों के वर्चस्व वाले डेयरी क्षेत्र में वर्ष 2021 तक लगभग 140 अरब रुपये का निवेश होगा। दुग्ध प्रसंस्करण क्षमता सालाना 25-30 प्रतिशत तक बढ़ाने और दुग्ध खरीद ढांचे को दुरुस्त बनाने के लिए डेयरी क्षेत्र की कंपनियों ने पिछले तीन वर्षों के दौरान भी समान मात्रा में निवेश किया। 
 
मूल्यवर्धित सेगमेंट में अपनी उपस्थिति मजबूत बनाने की कोशिश कर रहे भारतीय डेयरी उद्योग द्वारा अगले तीन वर्षों में लगभग 50 प्रतिशत या 14-15 प्रतिशत की सालाना चक्रवृद्घि दर से वृद्घि दर्ज किए जाने का अनुमान है। जहां मूल्यवर्धित उत्पादों पर ध्यान केंद्रित करने वाल कंपनियां शानदार प्रदर्शन कर रही हैं, वहीं थोक में दुग्ध बिक्री करने वाली डेयरी कंपनियां अधिक आपूर्ति की वजह से धीमी वृद्घि के साथ दबाव में बनी रहेंगी।   क्रिसिल रेटिंग्स की सहायक निदेशक पूनम उपाध्याय का कहना है, 'संगठित डेयरी व्यवसाय में प्रसंस्करण क्षमता वृद्घि और दुग्ध खरीद ढांचे को मजबूत बनाए जाने के लिए अगले तीन वित्त वर्षों के दौरान 140 अरब रुपये खर्च होने का अनुमान है।'
 
इस नए निवेश के लिए पूंजी की व्यवस्था सरकार के डेयरी प्रोसेसिंग ऐंड इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड से उदार ऋणों के अलावा सार्वजनिक तथा निजी इक्विटी के जरिये किए जाने की  संभावना है।  क्रिसिल ने लगभग 100 डेयरी कंपनियों पर शोध किया। इन 100 कंपनियों का संगठित क्षेत्र के राजस्व में लगभग 60 प्रतिशत का योगदान है। दुग्ध बिक्री में तेज वृद्घि से डेयरी क्षेत्र में वित्त वर्ष 2021 तक 7,500 अरब रुपये का राजस्व हासिल होने का अनुमान है जो वित्त वर्ष 2018 में 5,700 अरब रुपये रहा। 
 
ब्रांडेड डेयरी उत्पादों की निर्माता और रिटेलर गुजरात को-ऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन लिमिटेड ने अपनी प्रसंस्करण क्षमता और वितरण नेटवर्क का विस्तार करने के लिए वर्ष 2022 तक 50 अरब रुपये के निवेश की घोषणा की है। फेडरेशन मुख्य रूप से अमूल ब्रांड के डेयरी उत्पादों की बिक्री करता है। घरेलू बाजारों और प्रवासी भारतीय समुदाय से अमूल ब्रांड के उत्पादों की बढ़ती मांग की वजह से फेडरेशन ने वित्त वर्ष 2017-18 के लिए 295 अरब रुपये का कारोबार दर्ज किया और अब उसने 500 अरब रुपये के कारोबार का लक्ष्य रखा है। 
 
अमूल के प्रबंध निदेशक आर एस सोढी का कहना है कि कंपनी ने वर्ष 2022 तक 50 अरब रुपये के निवेश की रूपरेखा तैयार की है।  अपनी भौगोलिक पहुंच मजबूत बनाने के लिए रिलायंस डेयरी के अधिग्रहण के बाद हेरिटेज फूड्स ने उत्तर भारतीय राज्यों में विस्तार की योजना बनाई है। इन राज्यो में व्यावसायिक अवसरों की संभावनाएं मौजूद हैं। हेरिटेज ने तेलंगाना में शाह मोतीलाल फूड्स और पंजाब की वामन मिल्क फूड्स का 12 करोड़ और 20 करोड़ रुपये में अधिग्रहण किया है। 
 
हेरिटेज फूड्स ने अब दही, पनीर और योगर्ट जैसे सेगमेंट में व्यापक विस्तार की अपनी योजनाओं को साकार करने के लिए बड़े पूंजीगत खर्च की योजना बनाई है।  भारत का दुग्ध उत्पादन वित्त वर्ष 2017-18 के लिए 16.55 करोड़ टन पर अनुमानित है जो पूर्ववर्ती वर्ष के मुकाबले 3.8 प्रतिशत की वृद्घि है। 
Keyword: milk, production, डेयरी उद्योग में दूध आपूर्ति,
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