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इंटरनेट समानता

संपादकीय /  July 12, 2018

दूरसंचार आयोग ने नेट निरपेक्षता के नियमों को स्वीकार कर लिया है। इसका देश में इंटरनेट के भविष्य पर दूरगामी प्रभाव होगा। यह एक खुला मंच बना रहेगा और इंटरनेट सेवा प्रदाता (आईएसपी) सामग्री को ब्लॉक करने, इंटरनेट की गति कम करने, किसी खास सामग्री को धीमी गति से दिखाने अथवा अलग-अलग सामग्री के लिए अलग-अलग गति देने जैसे काम नहीं कर पाएंगे।  नेट निरपेक्ष व्यवस्था में छोटे कारोबारियों और व्यक्तियों को अपनी सामग्री बनाने और प्रस्तुत करने की सुविधा रहेगी। उन्हें यह आशंका नहीं रहेगी कि बड़े प्रतिस्पर्धी उनकी सामग्री को दबा देंगे या आईएसपी उसका दम घोंट देंगे। उस दृष्टिï से देखें तो नेट निरपेक्षता समूची डिजिटल व्यवस्था में नवाचार को बढ़ावा देने में मददगार होगी। नेट निरपेक्षता सुनिश्चित करने की जरूरत उन क्षेत्रों में अधिक है जहां सीमित आईएसपी काम कर रहे हैं। देश के ग्रामीण इलाकों में कई ऐसी जगहें हैं जहां कवरेज बहुत सीमित है। यह निर्णय अमेरिका द्वारा अपने नेट निरपेक्षता नियमों को रद्द करने के एक महीने के भीतर आया है। यह बिना गैर भेदभाव वाली नेट व्यवस्था को लेकर भारत की प्रतिबद्घता को दोहराता है। 

 
तकनीकी ढंग से देखें तो इसके लिए अनुपालन की निगरानी करनी होगी तथा उपभोक्ताओं की शिकायतों को स्वीकार करना और नियम उल्लंघन करने वालों को दंडित करना होगा। अतीत में दूरसंचार कंपनियों ने अक्सर यह दलील दी है कि सख्ती वाली नेट निरपेक्षता व्यवस्था से नवाचार की राह बाधित हो सकती है। परंतु इस दलील को स्वीकार करना मुश्किल है क्योंकि बीते दो दशक से अधिक वक्त से इंटरनेट निरपेक्ष रहा है और इस दौरान हमें ढेरों नवाचार देखने को मिले हैं। बहरहाल नेट निरपेक्ष व्यवस्था निश्चित तौर पर दूरसंचार सेवा प्रदाताओं की उस आजादी को बाधित करता है जिसके तहत वे खास सामग्री प्रस्तुत करने वालों या ऐप डेवलपर के लिए अनुकूल परिस्थितियां बना सकते थे। यह राजस्व कमाने के नए जरियों की भी राह रोकने वाली बात है। भारत एक अत्यधिक प्रतिस्पर्धी बाजार है। यहां दूरसंचार सेवा प्रदाता अपने कर्ज चुकाने की खातिर राजस्व जुटाने के फेर में रहते हैं। नेट निरपेक्षता की सख्ती को प्रतिबंधात्मक रुख माना जा सकता है। उदाहरण के लिए नेट निरपेक्षता के अधीन दूरसंचार सेवा प्रदाता जीरो रेटिंग सेवाओं की पेशकश नहीं कर सकते। इन सेवाओं के लिए वे उपभोक्ताओं से अपने साझेदारों द्वारा प्रस्तुत वेबसाइट या सामग्री की सर्फिंग के लिए कम शुल्क वसूल करते हैं। वे अपने डिजिटल भुगतान बैंक को अन्य प्रतिस्पर्धियों पर तरजीह भी नहीं दे सकते। अब फेसबुक के फ्री बेसिक्स जैसी कोई चीज भी नहीं पेश कर सकते। सोशल मीडिया की इस दिग्गज कंपनी ने विभिन्न दूरसंचार सेवा प्रदाताओं के साथ मिलकर फेसबुक तक नि:शुल्क पहुंच मुहैया कराई गई थी। 
 
नेट निरपेक्षता का एक अन्य प्रमुख तत्त्व यह है कि कुछ अहम सेवाओं को इससे रियायत दी जा सकती है। अब यह सरकार को तय करना है कि किन सेवाओं को नियामक अपवाद स्वरूप प्राथमिकता दे सकता है। ऐसे में यह जरूरी है कि अपवादों का इस्तेमाल बड़ी इंटरनेट कंपनियों द्वारा अपने फायदे के लिए न किया जाए। कुछ मामलों में ये अपवाद उचित हो सकते हैं। उदाहरण के लिए आपातकालीन दूरवर्ती इलाज और टेलीमेडिकल सेवाओं को तेज गति की आवश्यकता हो सकती है। यही बात आपदा प्रबंधन पर या श्रद्घालुओं आदि की भीड़ के प्रबंधन पर भी लागू हो सकती है। स्मार्ट पावर ग्रिड के प्रबंधन जैसी हाई टेक सेवाओं को भी प्राथमिकता की जरूरत हो सकती है। इसके अलावा स्वायत्त कार संचार या ड्रोन परिचालन को भी प्राथमिकता की जरूरत हो सकती है। कुल मिलाकर इस नीति से नवाचार को बढ़ावा ही मिलना चाहिए। यह छोटे कारोबारियों से लेकर कलाकारों तक सबको बिना भय के अपनी सामग्री प्रस्तुत करने का अवसर देगी।
Keyword: net neutrality, data, internet, नेट निरपेक्षता,
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