बिजनेस स्टैंडर्ड - पुरानी दिल्ली को मिले पूर्ण राज्य का दर्जा
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पुरानी दिल्ली को मिले पूर्ण राज्य का दर्जा

ऋत्विक शर्मा /  07 11, 2018

बीएस बातचीत

सर्वोच्च न्यायालय के एक संविधान पीठ ने उच्च न्यायालय के आदेश को पलट दिया और यह व्यवस्था दी कि केंद्र की ओर से नियुक्त किए गए दिल्ली के उपराज्यपाल दिल्ली सरकार की मंत्रिपरिषद की सलाह मानने को बाध्य हैं। सीमा सुरक्षा बल के पूर्व प्रमुख प्रकाश सिंह ने ऋत्विक शर्मा से बातचीत में कहा कि बेहतर प्रशासन के लिए दिल्ली के मुख्यमंत्री को केंद्र के प्रति सम्मानजनक रवैया रखना चाहिए और केंद्र को उसके प्रति उदार होना चाहिए

बिजनेस स्टैंडर्ड पुरानी दिल्ली को मिले पूर्ण राज्य का दर्जाहाल में सर्वोच्च न्यायालय के आदेश से प्रशासनिक नियंत्रण के मामले में दिल्ली की चुनी हुई सरकार के वर्चस्व को स्थापित कर दिया है हालांकि न्यायालय ने यह भी कहा है कि राजधानी को राज्य का दर्जा नहीं दिया जा सकता है। ऐसे में पूर्णराज्य के दर्जे की मांग कितना व्यावहारिक है जिसकी आम आदमी पार्टी (आप) मांग कर रही है?

दिल्ली के लिए पूर्ण राज्य की मांग लंबे वक्त से स्थगित रही है। मांग वैध है और बिना किसी राजनीति के इस मामले पर सर्वोच्च स्तर पर विचार किए जाने की जरूरत है। इसका सबसे आसान हल यह होगा कि पुरानी दिल्ली को एक अलग प्रशासनिक ढांचे के साथ पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जाए। पुरानी दिल्ली में पुलिस, सार्वजनिक व्यवस्था और जमीन को भी राज्य सरकार के नियंत्रण में दिया जाना चाहिए। पुरानी दिल्ली का एक अलग पुलिस आयुक्त हो सकता है। नई दिल्ली में मौजूदा व्यवस्था को बरकरार रखना चाहिए।

प्रशासनिक दृष्टि से देखें तो दिल्ली कौन सी अलग तरह की चुनौतियों का सामना करती है और यह दूसरे केंद्रशासित प्रदेशों से कैसे अलग है?

दिल्ली को विशेष तरह की चुनौतियों से जूझना पड़ता है जो इसे दूसरे केंद्रशासित प्रदेशों से अलग बनाती है। यह भारत सरकार की सत्ता का केंद्र है। सभी मंत्रालय यहां पर हैं। देश को प्रभावित करने वाले बड़े निर्णय यहां लिए जाते हैं। यहीं पर सारे विदेशी दूतावास हैं। दिल्ली में साल भर विदेशों से उच्चतम स्तर के गणमान्य यात्रा पर आते रहते हैं। गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस जैसे बड़े राष्ट्रीय कार्यकम दिल्ली में आयोजित होते हैं। वास्तव में देखें तो दिल्ली न केवल राजनीतिक राजधानी है बल्कि यह देश की सांस्कृतिक राजधानी भी है। यहां अंतरराष्ट्रीय मेलों का आयोजन किया जाता है। पूरे देश से लोग अपने-अपने काम से दिल्ली आते हैं। प्रशासनिक दृष्टि से उन जगहों के लिए एक अलग व्यवस्था जरूरी होता है जहां 'राष्ट्रीय' गतिविधि आयोजित होते हैं।  

आप सरकार और केंद्र की ओर से नियुक्त उपराज्यपाल के बीच जारी तकरार को देखते हुए क्या आपको लगता है कि नौकरशाहों और पुलिस की भूमिका को और अधिक स्पष्ट रूप से रेखांकित करने की जरूरत है?

हां, उच्चतम स्तर पर किसी भी प्रकार के टकराव को रोकने के लिए पुलिस अधिकारियों और नौकरशाहों की भूमिका और कार्यों की सीमा स्पष्ट तौर पर रेखांकित की जानी चाहिए।

सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के आधार पर सभी राजनीतिक दलों को दिल्ली के लिए पूर्ण राज्य की मांग को विधानसभा में कैसे उठाना चाहिए? 

सभी राजनीतिक दलों को पूर्ण राज्य की मांग को लोकतांत्रिक तरीके से उठाना चाहिए न कि धरना प्रदर्शन के माध्यम से।

हाल के वर्षों में दिल्ली में दो विरोधी दलों के शासन होने से केंद्र-राज्य संबंधों में जिस प्रकार की खटास आई है वह पहले नहीं देखा गया था। ऐसे में आप सरकार और केंद्र के बीच सामंजस्य सुनिश्चित करने के लिए क्या किया जाना चाहिए?  

दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार के बीच निश्चित तौर पर सामंजस्य होना ही चाहिए। हाल के दिनों जिस प्रकार के अप्रत्याशित तमाशे का प्रदर्शन हमलोगों ने देखा है उसकी मुख्य वजह राजनेताओं की मानसिकता है। अरविंद केजरीवाल का केंद्र सरकार के प्रति रवैया बहुत अहंकारपूर्ण रहा है। उन्होंने ऐसे-ऐसे बयान दिए हैं जिससे देश के राजनीतिक नेतृत्व को चोट पहुंची है। केंद्र सरकार ने उनकी हैसियत बताने के लिए उपराज्यपाल के माध्यम से उत्तर दिया है। नतीजतन इससे टकराव पैदा हुआ। शासन अवरुद्घ हुआ है। दिल्ली के मुख्यमंत्री को केंद्र सरकार के प्रति सम्मानजनक रवैया रखना चाहिए और केंद्र सरकार को दिल्ली सरकार के प्रति सहानुभूति रखते हुए सामंजस्यपूर्ण व्यवहार करना चाहिए। दोनों पक्षों को समझना चाहिए कि दिल्ली में कमजोर प्रशासन को पूरी दुनिया देख रही है और इससे देश की छवि दागदार होती है।   

यदि दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा मिलता है तो लोगों को इससे किस प्रकार के लाभ होंगे? 

यदि पुरानी दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जाता है तब लोगों को फायदा मिलेगा क्योंकि तब राज्य में एक जबावदेह सरकार होगी। इसका मतलब यह नहीं है कि इससे नई दिल्ली को कोई नुकसान होगा। यह अपनी रचना के आधार पर और इस क्षेत्र की समस्याओं की प्रकृति को देखते हुए मौजूदा व्यवस्था के तहत ही विकास करेगी।

दिल्ली के कुछ हिस्सों को केंद्र के नियंत्रण में और बाकी को राज्य के पास रहने देने की सलाह कितना व्यावहारिक है? 

नई दिल्ली के इलाकों को केंद्र के नियंत्रण में देने का विचार अधिक प्रासंगिक होना चाहिए। बल्कि केंद्र का नियंत्रण वहां पहले से ही है, हमारा सुझाव इसे केवल नई दिल्ली के इलाकों तक ही सीमित रखने कहा है।  

Keyword: supreme court, high court,,
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