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जीएसटी प्रणाली में सुधार के लिए सिंगापुर से सीखें सबक

दिल्ली डायरी
ए के भट्टाचार्य /  July 11, 2018

सिंगापुर की सरकार ने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की दर को सात फीसदी से बढ़ाकर नौ फीसदी करने का 19 फरवरी, 2018 को ऐलान किया। इस द्वीपीय देश में जीएसटी के 1994 में पहली बार लागू होने के बाद से कर की दर में बढ़ोतरी का यह चौथा मौका होगा। सिंगापुर ने शुरुआत में जीएसटी की दर तीन फीसदी ही रखी थी। पिछली बढ़ोतरी 2007 में हुई तो दर पांच फीसदी से बढ़ाकर सात फीसदी कर दी गई। कर वृद्धि के नए प्रस्ताव के लिए यह दलील दी गई है कि इससे सरकार को स्वास्थ्य, ढांचागत विस्तार और सुरक्षा के लिए संसाधन जुटाने में मदद मिलेगी।

 
सिंगापुर सरकार की इस घोषणा में भारत की सरकार और जीएसटी परिषद की आखिर क्या रुचि हो सकती है? दरअसल सिंगापुर में कर की नई दर को वर्ष 2021 से 2025 के बीच लागू करने की वित्त मंत्री हेंग स्वी कीत की घोषणा भारत की रुचि का मामला हो सकती है। केंद्रीय वित्त मंत्री की अगुआई में बनी जीएसटी परिषद के सदस्यों को सिंगापुर सरकार के इस ऐलान की एक बात अचंभित कर सकती है। आखिर कर की दरों में बढ़ोतरी को चार साल के भीतर क्यों अंजाम दिया जाने वाला है? और उसकी घोषणा भी सरकार ने तीन साल पहले ही कर दी है? जरा कल्पना कीजिए कि अगर भारत में इसी तरह का कदम उठाया गया होता तो उद्योग जगत की लॉबी कितनी सक्रिय हो जाती और विपक्षी राजनीतिक दल उस मौके का इस्तेमाल प्रस्तावित कर वृद्धि के खिलाफ नया प्रदर्शन करने के लिए करते। 
 
हमें यह भी ध्यान में रखना होगा कि सिंगापुर में जनवरी 2021 से पहले आम चुनाव होंगे। इसका मतलब है कि सिंगापुर में जीएसटी की बढ़ी दर चुनाव संपन्न हो जाने और नई सरकार के वजूद में आ जाने के बाद ही लागू होंगी। भारत में आम चुनावों के पहले कर की दरों में कटौती तो मुमकिन है लेकिन चुनाव के पहले कर बढ़ाना तो वह फैसला लेने वाली सरकार के लिए अक्सर चुनावी शिकस्त का एक मुकम्मल नुस्खा ही है। फिर भी सिंगापुर की जीएसटी प्रणाली का यह पक्ष अपनाने के बारे में भारत को सोचना चाहिए। मौजूदा परिपाटी के उलट नई कर दरों को लागू करने के पहले ही उसका खाका पेश करने के काफी लाभ हैं। अप्रत्यक्ष कर दरों की घोषणा और उनके क्रियान्वयन के बीच कोई फासला नहीं रखना काफी हद तक उस पुरानी सोच की जड़ता की उपज है जो लाइसेंस-परमिट राज के दौरान नजर आती थी। आर्थिक सुधार लागू होने के कई दशक बाद भी उस रवायत को जारी रखने का कोई कारण नहीं है।
 
अगर शुल्क दरों में बदलाव की जानकारी पहले ही दे दी जाती है तो असल में उद्योग जगत को उससे लाभ ही होगा। उद्योग अपने उत्पादन और बिक्री के बारे में कोई भी फैसला नई कर दरों को ध्यान में रखते हुए करेगा। अचानक किए जाने वाले फैसलों का बोझ उठाना जरूरी नहीं है। पूर्व सूचना होने से नई दरों के बारे में तर्कसंगत बहस एवं चर्चा की गुंजाइश बनती है और अगर प्रस्तावित दरों में कुछ बदलाव करना जरूरी लगे तो उन्हें भी किया जा सकता है। जीएसटी प्रणाली के तहत शुल्क में बदलाव की पहले घोषणा करने का एक और लाभ भी है। कर दरों के बारे में कोई भी फैसला जीएसटी परिषद ही लेती है जिसमें केंद्र के अलावा सभी राज्यों के प्रतिनिधि भी शामिल होते हैं। सामूहिक निर्णय करने वाली जीएसटी परिषद अगर कर बढ़ाने का कोई फैसला करती है तो उसका ठीकरा किसी एक सरकार पर नहीं फोड़ा जा सकता है। इस तरह केंद्र एवं राज्यों की सरकारें एक हद तक राजनीतिक हमलों से बच जाएंगी।
 
निश्चित रूप से सिंगापुर में जीएसटी की एकल दर व्यवस्था को भारत फिलहाल अपने यहां लागू नहीं कर सकता है। मौजूदा समय में जीएसटी की कई दरों को किसी एक दर में समाहित कर पाना उतना आसान नहीं होगा। भारत के लिए 28 फीसदी की उच्चतम दर को खत्म करना, 18 फीसदी वाली दर को संशोधित कर कुछ कम करना और निम्नतम कर दर को उसी अनुपात में बढ़ाना सरकार के लिए मध्यम अवधि का लक्ष्य होना चाहिए। इससे कर दरों में दोहराव कम होगा और दो तरह की ही दरें रह जाएंगी। 
 
भारतीय जीएसटी प्रणाली की एक बड़ी उपलब्धि यह रही है कि इसके चलते महंगाई नहीं बढ़ी है। लिहाजा यह सुनिश्चित करने की भरसक कोशिश की जानी चाहिए कि समाज के विपन्न तबकों के अधिक इस्तेमाल वाले उत्पादों पर ऊंची दर पर कर न लगे। दो दरों वाली व्यवस्था की तरफ कदम एक समयावधि में चरणबद्धï तरीके से बढ़ाए जाने चाहिए। इससे उपभोक्ताओं के लिए उस बदलाव के असर को झेल पाना आसान होगा और मुद्रास्फीति भी काबू में रहेगी। जीएसटी की नई दर प्रणाली को लागू करने की योजना का खुलासा और चर्चा उसके क्रियान्वयन के काफी पहले ही कर दिया जाना चाहिए। इसी तरह पेट्रोल, डीजल, कच्चा तेल, विमान ईंधन और प्राकृतिक गैस को जीएसटी के दायरे में लाने और उन पर कर लगाने की समयसीमा पहले ही बता दी जानी चाहिए ताकि उद्योग जगत को इतने बड़े बदलावों के लिए तैयारी का वक्त मिल सके।
 
सिंगापुर की इकलौती दर वाली जीएसटी व्यवस्था भारत के लिए मॉडल नहीं हो सकती है। लेकिन क्रियान्वयन के काफी पहले कर दरों की घोषणा कर देने की परंपरा का अनुसरण भारत को जरूर करना चाहिए। जीएसटी परिषद की 21 जुलाई को होने वाली बैठक में इस दिशा में पहल की जा सकती है।
Keyword: singapore, GST, वस्तु एवं सेवा कर, जीएसटी,,
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