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विदेशी और घरेलू हालात तय करेंगे बाजार की दिशा

बाजार संकेतक
देवांग्शु दत्ता /  July 10, 2018

चीन से आयात किए जाने वाले उत्पादों पर अमेरिका में शुल्क लगाए जाने और उसके बाद चीन के पलटवार ने व्यापार युद्ध में तेजी के संकेत दे दिए हैं। अगर अमेरिका अन्य उत्पादों पर भी शुल्क लगाने का फैसला करता है तो चीन की तरफ से भी जवाबी कार्रवाई का दायरा बढऩे के आसार हैं। यह देखना होगा कि अमेरिका आयात शुल्क लगाने के मामले में क्या यूरोपीय संघ और कनाडा के खिलाफ अपनाई गई राह पर ही चलेगा? भारत ने भी कुछ प्रतिकारी शुल्कों की सूची जारी की है लेकिन वे तभी लागू होंगे जब मौजूदा विवाद हल करने के लिए प्रस्तावित बैठक नाकाम हो जाती है।

 
उभरते हुए बाजारों से बड़ी संख्या में लोग निकल रहे हैं और मुद्रा की स्थिति भी डांवाडोल है। वैसे पिछले हफ्ते से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (एफपीआई) लौटने लगे हैं और रुपये में इक्विटी की खरीदारी कर रहे हैं।   वैश्विक मांग पर नकारात्मक असर की आशंकाओं से धातुओं की कीमतों में नरमी आई है। ईरान पर प्रतिबंधों की अमेरिकी मांग के चलते कच्चा तेल भी ऊंचे स्तर पर बना हुआ है। अगर अमेरिका अपने रुख को नरम करता है तो जिंस बाजार में बड़ी उथल-पुथल हो सकती है। तब धातु में तेजी आ सकती है जबकि कच्चे तेल के भाव गिर सकते हैं। फिर भी दुर्लभ मुद्रा की उपलब्धता में कमी इस वित्त वर्ष जारी रहेगी और जोखिम-रहित रवैया एवं सुरक्षित परिसंपत्तियों की खरीद जारी रहेगी।
 
अगर कच्चा तेल ऊंचे स्तर पर रहता है और अंतरराष्ट्रीय हालात के चलते वैश्विक कारोबार प्रभावित होता है तो भारत के चालू खाते का घाटा बढ़ सकता है। इस आशंका के चलते रुपये के भाव में फिसलन देखी जा रही है। भारतीय रिजर्व बैंक रुपये को संभालने के लिए काफी कोशिश कर रहा है। बहरहाल 415 अरब डॉलर का मुद्रा भंडार होने से बाहरी भुगतान संतुलन की स्थिति काफी हद तक आरामदायक है। यह भंडार करीब 10-11 महीनों के आयात का बिल भरने के लिए काफी है। लेकिन एफपीआई रुपया-आधारित परिसंपत्तियों में 190 अरब डॉलर लगाए हुए हैं और यह एक बड़ी राशि है। विदेशी ऋण का कुल आकार करीब 529 अरब डॉलर है जिसका 40 फीसदी यानी 222 अरब डॉलर इसी वित्त वर्ष में परिपक्व होने वाला है। ऐसी स्थिति में अगर चालू खाते का घाटा जीडीपी के तीन फीसदी से अधिक रहता है तो रुपये पर दबाव बढ़ेगा। अगर भारतीय तेल आयात का औसत मूल्य 73 डॉलर प्रति बैरल से अधिक रहता है तो ऐसा होना लाजिमी है। साल की पहली तिमाही में भारतीय तेल आयात का औसत भाव 72.8 डॉलर प्रति बैरल रहा था।
 
गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव थोड़ा कम है लेकिन वे भी कच्चे तेल की तरह ऊपर का रुख कर सकते हैं। कई शहरों में गैस वितरण के लिए इसी सप्ताह निविदा जारी होने वाली है। इसके तहत लंबी अवधि के एकाधिकार लाइसेंस दिए जाने हैं। हालांकि आर्थिक वृद्धि में तेजी की खबर अच्छी है। जून के खरीदारी प्रबंधक सूचकांक (पीएमआई) बताते हैं कि सेवा और विनिर्माण क्षेत्रों में गतिविधियां बढ़ी हैं।  खरीफ फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में अच्छी-खासी बढ़ोतरी किए जाने से केंद्र सरकार पर बोझ बढ़ेगा और इससे महंगाई भी बढ़ सकती है। अगर एमएसपी बढऩे से ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंचने वाली अधिक रकम तनावग्रस्त ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार देने में सफल रहती है तो उससे उपभोग भी बढ़ेगा। कृषि क्षेत्र से संबंधित उत्पाद, एफएमसीजी, ट्रैक्टर और दोपहिया वाहन क्षेत्र में इसी आधार पर निवेश बढ़ा है।
 
टिसेनक्रुप के साथ प्रस्तावित संयुक्त उद्यम से टाटा स्टील के बैलेंस शीट में कर्ज की बड़ी मात्रा कम हो जाएगी। टिसेनक्रुप के मुख्य कार्याधिकारी हेनरित हेसिंगर के इस करार पर हस्ताक्षर के फौरन बाद अचानक इस्तीफा देने से कुछ अनिश्चितता हो सकती है लेकिन जर्मन कंपनी का निदेशक मंडल इस सौदे से आश्वस्त है। आईसीआईसीआई बैंक को नया चेयरमैन मिलने और आरोपों से घिरीं चंदा कोछड़ को जवाब देने के लिए समयसीमा बढ़ाने से थोड़ी राहत मिली है। आईडीबीआई बैंक को एलआईसी को बेचने का फैसला इस रूप में देखा जा रहा है कि सरकार अपनी हिस्सेदारी को अपने नियंत्रण वाली एक दूसरी इकाई को हस्तांतरित कर रही है। इस सौदे को लेकर जताई जा रही आपत्तियों की एक वजह यह है कि बीमा पॉलिसी के प्रीमियम के तौर पर आम लोगों से जुटाई गई राशि का इस्तेमाल आईसीयू में पहुंच चुके एक सरकारी संस्थान को बचाने के लिए किया जा रहा है। 
 
रुपया कमजोर होने से सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों पर ध्यान बढ़ा है। नैशनल स्टॉक एक्सचेंज का आईटी सूचकांक काफी बढ़त पर रहा है। पिछले महीने यह 4.5 फीसदी और पिछले एक साल में 39 फीसदी से भी अधिक चढ़ा है। आईटी फंड में निवेशकों की रुचि काफी बढ़ गई है। रुपये में थोड़ी और गिरावट आने पर आईटी फंडों के कुछ अधिक रिटर्न देने की संभावना है। तकनीकी स्तर पर बाजार में फैलाव जारी है। घरेलू संस्थागत निवेशकों का समर्थन मिलने से बड़े शेयर अपने दायरे में कारोबार कर रहे हैं जबकि पिछले छह महीनों में छोटे शेयरों में गिरावट देखने को मिली है। अगर विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) जुलाई भर सकारात्मक रहते हैं तो बड़े सूचकांकों में कुछ तेजी आ सकती है। निफ्टी कुछ समय से 10,400-10,900 अंकों के दायरे में रहा है। अगर निफ्टी इस दायरे को तोड़ता है तो वह 4-5 फीसदी की बढ़त या नुकसान पर रह सकता है। ऐसी सूरत में निफ्टी या तो 9,900 या फिर 11,400 तक जा पहुंच सकता है। बाजार का ऊपरी दायरा नई ऊंचाई तक जा सकता है वहीं निफ्टी का निचला दायरा बाजार में बड़ी गिरावट का संकेत हो सकता है।
Keyword: america, china, trade,,
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