बिजनेस स्टैंडर्ड - टाटा संस के मामले में मिस्त्री की याचिका खारिज
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टाटा संस के मामले में मिस्त्री की याचिका खारिज

शैली सेठ मोहिले / मुंबई 07 09, 2018

एनसीएलटी ने कहा

टाटा संस के बोर्ड को कार्यकारी चेयरमैन हटाने का पूरा अधिकार
मिस्त्री को चेयरमैन पद से इसलिए हटाया गया क्योंकि बोर्ड और बहुलांश शेयरधारकों का उन पर भरोसा खत्म हो गया था
कंपनी कानून की धारा 241 के तहत लगाए गए किसी भी आरोप का आधार सही नहीं
रतन टाटा और एन ए सोनावाला पर लगाए आरोप का भी कोई आधार नहीं

मिस्त्री के पास विकल्प
एनसीएलटी के आदेश को एनसीएलएटी में चुनौती दे सकते हैं साइरस मिस्त्री

बिजनेस स्टैंडर्ड टाटा संस के मामले में मिस्त्री की याचिका खारिजनैशनल कंपनी लॉ पंचाट (एनसीएलटी) के मुंबई पीठ ने साइरस मिस्त्री और उनके परिवार की याचिका खारिज करते हुए टाटा संस के पक्ष में आज फैसला सुनाया। पंचाट के फैसले से दिसंबर 2016 से ही टाटा संस और मिस्त्री के बीच चली आ रही कानूनी लड़ाई के पहले चरण का पटाक्षेप हो गया। कानून के एक विशेषज्ञ ने कहा कि याचिका खारिज होना मिस्त्री के लिए बड़ा झटका है क्योंकि दूसरे चरण में जब यह मामला नैशनल कंपनी लॉ अपीलीय पंचाट में पहुंचेगा तो उनके लिए अपनी पात्रता साबित करना काफी कठिन होगा। 

बीएसवी प्रकाश कुमार और वी नलसेनापति के दो सदस्यीय एनसीएलटी पीठ ने कहा, 'अल्पांश शेयरधारक द्वारा याचिका में कंपनी कानून, 2013 की धारा 241 और 242 के तहत उठाए गए मामले में हमें कोई उचित आधार नहीं मिला।' मिस्त्री ने अपनी निवेश इकाई साइरस इन्वेस्टमेंट्स और स्टर्लिंग इन्वेस्टमेंट के जरिये एनसीएलटी में याचिका दायर की थी। जिस धारा के तहत याचिका दायर की गई थी, वह उत्पीड़न और कुप्रबंधन से जुड़ी है। मिस्त्री ने अपनी याचिका में उन्हें टाटा संस के चेयरमैन पद से हटाए जाने के तरीके को चुनौती दी थी। एनसीएलटी ने कहा कि मिस्त्री को चेयरमैन पद से इसलिए हटाया गया क्योंकि टाटा संस के बोर्ड और उसके बहुलांश शेयरधारकों का उन पर से भरोसा उठ गया था। 

एनसीएलटी ने कहा, 'निदेशक मंडल के पास चेयरमैन को हटाने का अधिकार है और इसके लिए चयन समिति की जरूरत नहीं होती है।' मिस्त्री द्वारा अपने समूह का टाटा संस के बोर्ड में समानुपातिक प्रतिनिधित्व देने के प्रस्ताव को भी पीठ ने खारिज कर दिया और कहा कि रतन टाटा का आचरण कंपनी के प्रति पक्षपात पूर्ण नहीं था।

लॉ फर्म अद्वय लीगल के मैनेजिंग पार्टनर रमेश वैद्यनाथन ने कहा, 'फैसला उम्मीद के अनुरूप है।' उन्होंने कहा, 'एनसीएलएटी में लड़ाई मिस्त्री खेमे के लिए काफी मुश्किल होगी।' एनसीएलटी ने करीब चार महीने तक सुनवाई के बाद अपना फैसला सुनाया है। मिस्त्री को 24 अक्टूबर, 2016 को टाटा संस के चेयरमैन पद से बेदखल किया गया था। 

मिस्त्री ने याचिका में आरोप लगाया था कि उन्हें टाटा संस के चेयरमैन और फिर निदेशक पद से हटाना गैर-कानूनी था और यह टाटा ट्रस्ट्स के इशारे पर किया गया। मिस्त्री ने याचिका में टाटा संस के निदेशक मंडल द्वारा कुप्रबंधन तथा अल्पांश शेयरधारकों के उत्पीडऩ का भी आरोप लगाया था। शपूरजी पलोनजी परिवार की टाटा संस में 18 फीसदी हिस्सेदारी है। उन्होंने कारोबारी प्रशासन और टाटा ट्रस्टï्स द्वारा अत्यधिक हस्तक्षेप का भी आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि रतन टाटा 'सुपर बोर्ड' की तरह व्यवहार करते थे और टाटा समूह की कंपनियों के परिचालन पर नियंत्रण रखते थे और उनके इशारे और प्रभाव में ही टाटा संस बोर्ड ने मिस्त्री को हटाया था। 

न्यायाधीश कुमार ने सभी आरोपों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, 'इस मामले में कोई भी कानूनी आधार नहीं है। सी शिवशंकरन, टाटा टेली, नैनो कार, एयर एशिया का मसला सभी कंपनी कानून के दायरे में था।' इसके साथ ही टाटा और नोशिर सूनावाला द्वारा दिया गया नोटिस या सुझाव कंपनी के मामलों में हस्तक्षेप के आरोप को भी पीठ ने खारिज कर दिया। मिस्त्री ने आरोप लगाया था कि टाटा ट्रस्ट्स के न्यासी टाटा और सूनावाला कंपनी के निदेशक मंडल के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करते रहते थे।

टाटा संस के कार्यकारी चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने अपने बयान में एनसीएलटी के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा, 'साइरस मिस्त्री की याचिका खारिज करने का आदेश समूह के रुख की पुष्टि करता है। समूह की कंपनियों ने हमेशा निष्पक्ष तरीके से और शेयरधारकों के बेहतर हित में काम किया है।' उन्होंने कहा कि टाटा समूह हमेशा से पारदर्शिता और बेहतर कारोबारी प्रशासन एवं वैश्विक मानदंड को लेकर प्रतिबद्ध रहा है और यह प्रतिबद्धता बनी रहेगी। टाटा ट्रस्ट्स के न्यायी वीआर मेहता ने फैसले को बड़ी राहत बताया।

उन्होंने कहा, 'पंचाट ने हमारे सभी निवेदन को स्वीकार किया और सभी आरोपों को खारिज कर दिया।' मिस्त्री के वकील सोमशेखर सुंदरेशन ने कहा, 'हम इस मामले के सभी पहलुओं को लेकर अपील करेंगे।' मिस्त्री कार्यालय की ओर से जारी बयान में इस फैसले को निराशाजनक बताया लेकिन कहा कि यह हैरान करने वाला नहीं है। बयान में कहा गया, 'हम बहुलांश हिस्सेदारी वालों के क्रूर शासन से टाटा संस के सभी हितधारकों और अल्पांश शेयरधारकों के हितों के संरक्षण को सुनिश्चित करने के लिए प्रयास जारी रखेंगे।'

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