बिजनेस स्टैंडर्ड - बैंक समस्या के समाधान पर दिखाई तेजी
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बैंक समस्या के समाधान पर दिखाई तेजी

अभिजित लेले /  07 08, 2018

सुर्खियों में : सुनील मेहता
सुनील मेहता फंसे कर्ज की समस्या दूर करने की योजना लेकर आए हैं पर यह
उनके बड़े काम की महज शुरुआत है

बिजनेस स्टैंडर्ड बैंक समस्या के समाधान पर दिखाई तेजीसुनील मेहता का पिछले एक महीने से अधिक समय से दो राजधानियों-वित्तीय राजधानी मुंबई और राजनीतिक राजधानी दिल्ली के बार-बार आना जाना हो रहा है। उनकी इस यात्रा का एक मकसद था। उन्हें बैंकों के फंसे कर्ज के समाधान के लिए जल्द से जल्द रिपोर्ट सौंपनी थी।  ऐसा लगता है कि सरकार ने वित्तीय क्षेत्र की समस्या को और विकराल होने से रोकने और इसके समाधान की दिशा में कदम उठाने की तत्काल जरूरत को भांपते हुए उनकी मदद ली है। मेहता निजी क्षेत्र के एक पुराने और अनुभवी बैंकर हैं। पहले उन्हें पंजाब नैशनल बैंक के बोर्ड की अध्यक्षता करनी थी। अब उन्हें राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण के काम से इतर फंसे कर्ज के समाधान की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्हें वर्ष 2017-18 के प्रारंभ में भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के बोर्ड के निदेशक पद छोड़ना पड़ा क्योंकि सरकार ने उन्हें दिल्ली स्थित पंजाब नैशनल बैंक के चेयरमैन की जिम्मेदारी सौंप दी थी। 

पीएनबी में 2 अरब डॉलर का घोटाला सामने आने के बाद इस बैंक की प्रतिष्ठा दांव पर लग गई थी। इस घोटाले में ज्वैलर नीरव मोदी का नाम आया है। घोटाले के बाद जांच-पड़ताल शुरू हुई और उद्योग में नियामकीय बदलाव हुए। इसके चलते हुए उन्हें बैंक में परिचालन को बेहतर बनाने और जोखिम नियंत्रण व्यवस्था एवं प्रक्रियाओं को मजबूत करने की दिशा में कदम उठाने पड़े। हालांकि इस मोर्चे पर काम अभी जारी है, लेकिन अब इस काम में उनका कम समय खर्च होता है क्योंकि शुरुआती झटके के बाद अब सब कुछ सामान्य होने लगा है और प्रबंधन ने कामकाज संभाल लिया है। 

अब वह अगले बड़े काम पर पूरी तरह ध्यान दे सकते हैं। यह काम है- वित्तीय क्षेत्र में फंसे कर्जों की समस्या का समाधान, जहां उनका काम अभी शुरू ही हुआ है। फंसे कर्जों के समाधान की समस्या से उनका जुड़ाव केवल इतना ही नहीं है कि उन्हें कुछ दिनों में रिपोर्ट देनी है। आने वाले दिनों में उन्हें रिपोर्ट के पांच सूत्री समाधान के लिए सिस्टम और प्रक्रियाओं को समन्वित करने के बारे में भी सुझाव देने हैं।  मेहता अपने इस काम को लेकर बेहद उत्साहित हैं। जब उनसे यह पूछा कि क्या इस काम से उनका समय जाया नहीं होगा और वे अपने उद्यमिता के काम पर ध्यान नहीं दे पाएंगे तो उन्होंने कहा, 'भारत का एक नागरिक होने के नाते देश के प्रति मेरी एक जिम्मेदारी है। मैं वह काम करूंगा, जो मुझे करना चाहिए। मैं इस काम को उस रूप में नहीं देखता हूं कि मैं यह अन्य किसी व्यक्ति के लिए कर रहा हूं। मैं अपनी इस भूमिका को लेकर बेहद उत्साहित हूं। इससे मुझे संतुष्टि मिलती है कि मैं अपना समय अहम समस्याओं को हल करने में इस्तेमाल कर रहा हूं।'

जो लोग उन्हें जानते हैं, वे एक चीज यह कहते हैं कि वह एक समय में कई काम करने की क्षमता रखते हैं, लेकिन फिर भी इस पर नजर रखते हैं कि उनके लिए क्या महत्त्वपूर्ण है। भारतीय स्टेट बैंक के एक वरिष्ठ कार्याधिकारी ने उन्हें एक केंद्रित व्यक्ति मानते हैं, जो किसी बड़े काम से अपना ध्यान नहीं हटाते हैं। वह कहते हैं, 'वह अपने काम को ठंडे दिमाग और पूरी दृढ़ता से करते हैं और यह चीज उन्हें अन्य से अलग करती है।' वर्ष 1978 में दिल्ली के प्रतिष्ठित श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स से स्नातक करने बाद उन्होंने चार्टर्ड अकाउंटेंट बनने के लिए पढ़ाई की। उन्हें कॉरपोरेट बैंकिंग का अनुभव सिटी बैंक में अपने कार्यकाल के दौरान मिला। वह सिटी बैंक में 18 वर्षों तक विभिन्न वरिष्ठ पदों पर रहे। इस बैंक में अपने कार्यकाल के आखिरी वर्षों में वह भारत के लिए कॉरपोरेट हेड और वरिष्ठ ऋण अधिकारी के पद पर थे। उन्होंने देश में सिटीग्रुप के कॉरपोरेट बैंकिंग और जोखिम प्रबंधन कारोबार के विकास और क्रियान्वयन की अगुआई की। 

वर्ष 2000 में वह अमेरिका की एक बड़ी वित्तीय कंपनी एआईजी में चले गए, जिसमें उन्होंने 12 वर्षों तक काम किया। उनके पास भारत में एआईजी के पूरे कारोबार का जिम्मा था, जिसमें बीमा, वित्तीय सेवाएं और निवेश आदि शामिल थे। एआईजी के टाटा के साथ संयुक्त बीमा कंपनी बनाने में उनकी अहम भूमिका रही। जीवन एवं गैर-जीवन बीमा, निजी इक्विटी, ऐसेट मैनेजमेंट और रियल एस्टेट समेत 10 कारोबारों में एआईजी की मौजूदगी दर्ज करने में मेहता का योगदान रहा।  वह 2013 में एसपीएम कैपिटल एडवाइजर्स स्थापित कर उद्यमी बने। यह कंपनी एक सलाह एवं परामर्श कंपनी है, जो रणनीति एवं नीति के मामलों में बड़ी कंपनियों के साथ काम करती है।

मेहता उद्योग के एक सक्रिय सदस्य हैं और उन्हें आम तौर पर कारोबारी संगठनों द्वारा आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में देखा जाता है। वह उनमें से कई की अगुआई भी कर चुके हैं। वह पहले भारत में अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स के चेयरमैन भी रह चुके हैं। मेहता अमेरिका-भारत कारोबार परिषद से भी जुड़े रहे हैं। इसके अलावा वह एशिया सोसाइटी इंडिया के संस्थापक बोर्ड सदस्य हैं और एक्शन फॉर एबिलिटी डेवलपमेंट ऐंड इनक्लूजन के पूर्व चेयरमैन भी रहे हैं। मेहता की वित्त के अलावा सामाजिक उद्यमिता में भी रुचि है। वह यूनाइटेड वे ऑफ इंडिया के पिछले चेयरमैन थे, जो मुंबई में लोगों के जीवन स्तर में सुधार के लिए काम करती है। 

लेकिन फिर भी कई मायनों में उनका बड़ा काम अब शुरू हुआ है। उन्होंने अपने अगले कदम के बारे में कहा कि बैंक 5 अरब रुपये से अधिक के ऋणों के प्रबंधन के लिए आस्ति प्रबंधन कंपनी के ढांचे, अंतर-ऋणदाता समझौतो को मजबूत करने पर निगरानी समिति और छोटी आस्तियों पर एक ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के लिए काम शुरू करेंगे। इन ढांचों को लेकर अभी कुछ साफ नहीं है। इनका कितना जल्द समाधान होता है और इन्हें लेकर स्पष्टता आती है, उससे उनके काम का नतीजा तय होगा। सितंबर, 2018 तक 3.8 लाख करोड़ रुपये की संपत्तियां समधान के लिए आ रही हैं, इसलिए विचार करने के लिए मामूली समय बचा है। उनके साथ काम कर चुके निजी क्षेत्र के एक शीर्ष बैंकर ने कहा, 'मेहता अपने काम को लेकर गंभीर है। अब उनके प्रयासों को सरकारी मदद की जरूरत है।'
Keyword: bank, पंजाब नैशनल बैंक,
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