बिजनेस स्टैंडर्ड - क्या रहा आयात शुल्क में बढ़ोतरी का असर
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क्या रहा आयात शुल्क में बढ़ोतरी का असर

ए के भट्टाचार्य /  July 08, 2018

1 फरवरी, 2018 को पेश आम बजट में 43 से अधिक तरह की वस्तुओं पर सीमा शुल्क में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की घोषणा की। वर्ष 2016-17 में इन वस्तुओं का कुल आयात 86 अरब डॉलर से अधिक था जो उस साल देश के कुल आयात का करीब 22 फीसदी था।  2 फरवरी से आयात शुल्क बढ़ाने के पीछे सरकार का तर्क यह था कि इसका मकसद स्थानीय उद्योग को संरक्षण देना, स्थानीय स्तर पर मूल्य संवद्र्घन को उत्साहित करना, मेक इन इंडिया कार्यक्रम को बढ़ावा देना और शुल्कों को व्यावहारिक बनाना है। इससे विभिन्न वस्तुओं पर आयात शुल्क मौजूदा दर से एक तिहाई से दोगुना तक बढ़ गया। अगर यह वास्तव में संरक्षणवादी कदम है तो यह करीब एक दशक तक आयात शुल्क नियमित रूप से कम करने के रूझान के एकदम उलट है। लेकिन अब तक यह साफ नहीं हो पाया है कि इससे स्वदेशीकरण को बढ़ावा देने, घरेलू मूल्य संवद्र्घन या फिर मेक इन इंडिया पहल के हिस्से के रूप में विनिर्माण क्षेत्र को मदद मिली है या नहीं। अलबत्ता यह बात साबित हो चुकी है कि केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) के आयात शुल्क बढ़ाने के बारे में अधिसूचना जारी करने के बाद 3 महीने में इन वस्तुओं का आयात प्रभावित हुआ। हालांकि वस्तुओं की कुछ श्रेणियों में इसके प्रभाव की प्रकृति काफी अलग है। जब इन 43 वस्तुओं पर सीमा शुल्क बढ़ाया गया तो 2017-18 के अंतिम 2 महीने में इनके कुल आयात में मामूली गिरावट दर्ज की गई। जनवरी 2018 तक उनके कुल आयात का मूल्य 95.65 अरब डॉलर था। अगर फरवरी और मार्च में भी यह तेजी बरकरार रहती तो वर्ष 2017-18 के लिए इनका कुल आयात 115 अरब डॉलर तक पहुंच सकता था। अलबत्ता यह 113.76 अरब डॉलर रहा। अप्रैल, 2018 में इन वस्तुओं के आयात में और गिरावट आ गई। अप्रैल 2017 से जनवरी 2018 में 10 महीने की अवधि में इनका औसत मासिक आयात 9.56 अरब डॉलर रहा। फरवरी से अप्रैल 2018 के दौरान 3 महीनों में इन वस्तुओं का मासिक आयात 8.9 अरब डॉलर रहा। इससे इस बात की पुष्टिï होती है कि अप्रैल में आयात की गति धीमी रही। 

 
अगर आयात के आंकड़ों का वस्तु-वार विश्लेषण किया जाए तो फिर एक अलग तस्वीर उभरकर आती है। वस्तु-वार आयात के केवल अप्रैल, 2018 तक के आंकड़े ही उपलब्ध हैं। सीमा शुल्क बढ़ाए जाने के बाद केवल 3 महीने के आंकड़ों के आधार पर किसी अंतिम निर्णय पर पहुंचना जल्दबाजी हो सकती है। लेकिन ये ऐसे संकेत हैं जिन्हें नीति निर्माता नजरअंदाज नहीं कर सकते। फरवरी-अप्रैल, 2018 के दौरान 21 तरह की वस्तुओं का औसत मासिक आयात 2017-18 के पहले 10 महीने के औसत मासिक आयात की तुलना में 5 से 55 फीसदी गिरा है। 3 वस्तुओं के आयात में 3 फीसदी से कम की मामूली गिरावट दर्ज की गई जबकि 3 वस्तुओं का आयात सपाट रहा।  लेकिन बाकी 16 वस्तुओं का औसत मासिक आयात 2017-18 के पहले 10 महीने यानी अप्रैल से जनवरी की अवधि की तुलना में फरवरी-अप्रैल, 2018 के दौरान 2 से 70 फीसदी बढ़ा। सीमा शुल्क बढऩे के बावजूद इन वस्तुओं का आयात बढ़ा। जिन 21 वस्तुओं के आयात में उल्लेखनीय गिरावट आई, 2017-18 में उनका मूल्य 96 अरब डॉलर यानी कुल 43 वस्तुओं के कुल आयात का करीब 85 फीसदी था। इनमें सेल्युलर मोबाइल फोन, उनसे जुड़ी एक्सेसरीज, एलसीडी और एलईडी टेलीविजन सेट, नकली गहने, परिष्कृत रत्न एवं हीरे, ट्रकों और बसों के टायर, फुटवियर, फुटवियर के हिस्से, कलाई घडिय़ां, दीवार घडिय़ां, फर्नीचर के हिस्से, लैंप, मनोरंजन का सामान, मोमबत्ती, पतंग, सिगरेट लाइटर, डिऑडरेंट, शेविंग से जुड़ा सामान, रेशम के कपड़े और क्रैनबेरी जूस शामिल है। तो क्या इसका मतलब यह है कि इन क्षेत्रों में घरेलू विनिर्माण या मूल्य संवद्र्घन में तेजी आई है। 
 
अगर यह रुझान जारी रहता है तो फिर इसे इस दिशा में संकेत कहा जा सकता है। इस सूची में केवल 3 ही वस्तुएं ऐसी हैं जिनके आयात में 3 फीसदी से कम की गिरावट आई है। इनमें गद्दे, टेलीकॉम ऑप्टिक फाइबर में काम आने वाला सिलिका का प्रिफॉर्म तथा वाहनों की एक्सेसरीज शामिल है। 2017-18 में इन वस्तुओं का कुल आयात 9 अरब डॉलर था जिसमें वाहनों की एक्सेसरीज की कीमत 7.8 अरब डॉलर थी। ऐसा लगता है कि वाहनों के हिस्सों का आयात भी प्रभावित हुआ है लेकिन यह असर बेहद मामूली है।  आयात शुल्क बढऩे के बावजूद जिन 16 वस्तुओं का आयात बढ़ा है, सरकार को उनका गहराई से अध्ययन करने की जरूरत है। 2017-18 में इनके आयात का मूल्य करीब 8 अरब डॉलर था। इनमें मोबाइल फोन चार्जर और एडेप्टर, स्मार्ट घडिय़ां और पहने जाने वाले उपकरण, पुर्जों के रूप में वाहनों का आयात यानी सीकेडी, सीट, खेलों के लिए ट्राइसाइकल, वीडियो गेम कंसोल, मछली पकडऩे की बंसी, झूले, धूप के चश्मे, इत्र, टॉयलेट वाटर, ब्यूटी या मेक अप प्रीपेरेशन, ऑरेंज फ्रूट जूस और वनस्पति खाद्य तेल शामिल है। इनमें से अधिकांश वस्तुएं उपभोक्ताओं के इस्तेमाल की हैं और शहरी मध्य वर्ग में इनकी बड़ी मांग है। ऐसा लगता है कि आयात शुल्क बढऩे के बावजूद इन वस्तुओं का आयात बढ़ा है क्योंकि ऊंची कीमत के बावजूद उनकी मांग प्रभावित नहीं हुई है। उदाहरण के लिए स्मार्ट घडिय़ों और पहने जाने वाले उपकरणों (इसमें ऐप्पल की घडिय़ां शामिल हैं) का आयात 2017-18 में 4 अरब डॉलर से ऊपर पहुंच गया जबकि 2016-17 में यह 2.39 अरब डॉलर था। सीमा शुल्क बढऩे के 3 महीने बाद ऐसी वस्तुओं के औसत मासिक आयात में 2017-18 के पहले 10 महीने की तुलना में 55 फीसदी बढ़ोतरी हुई।
 
कुछ वस्तुओं के आयात में कमी और दूसरी वस्तुओं के आयात में तेजी इसलिए अहम है क्योंकि आयात शुल्क बढऩे के अलावा इन 3 महीनों के दौरान भारतीय रुपये में भी करीब 7 फीसदी गिरावट आई है। अगर डॉलर के महंगा होने और आयात शुल्क में बढ़ोतरी से कुछ वस्तुओं का आयात में गिरावट आई है तो फिर ये कारण दूसरे वस्तुओं के आयात में तेजी को रोकने में नाकाम रहे। ऐसा लगता है कि सरकार ने 2017-18 में इन 43 वस्तुओं के आयात के रुझानों को देखते हुए उन पर आयात शुल्क बढ़ाने का कदम उठाया। यह उसके उलट है जो 2016-17 में हुआ। तब इन वस्तुओं का आयात करीब 3 फीसदी घटकर 86 अरब डॉलर रह गया था। 2017-18 के पहले 10 महीने में ही इन वस्तुओं का आयात 95 अरब डॉलर को पार कर गया था। शायद यही वजह थी कि सरकार ने इन वस्तुओं पर आयात शुल्क बढ़ाया। 
Keyword: budget, revenue, आम बजट,
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