बिजनेस स्टैंडर्ड - घर का कराएं बीमा तो संग करा लें पड़ोस का भी बीमा
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घर का कराएं बीमा तो संग करा लें पड़ोस का भी बीमा

प्रियदर्शिनी माजी /  07 08, 2018

आपका निवेश

बिजनेस स्टैंडर्ड घर का कराएं बीमा तो संग करा लें पड़ोस का भी बीमापिछले महीने मुंबई के वर्ली इलाके में एक बड़ी इमारत में आग लग गई। इस इमारत में हिंदी फिल्म तारिका दीपिका पडुकोणे भी रहती थीं। इस आग से आसपास की इमारतों को भी अच्छा खासा नुकसान पहुंचा। ऐसी परिस्थितियों में घर का बीमा बहुत कारगर साबित होता है। ज्यादातर गृह बीमा योजनाओं में तूफान, चक्रवात, विस्फोट, दंगों, किसी घटना के असर से होने वाले नुकसान अथवा दुर्भावना के तहत किए गए नुकसान जैसे जोखिमों को शामिल किया जाता है। लेकिन इन पॉलिसियों की भी कुछ सीमा होती हैं। इसलिए पॉलिसी खरीदने से पहले यह समझना बहुत जरूरी है कि इनमें किस-किस हादसे का बीमा कवर मिलता है।

गृह बीमा कवर में मकान के ढांचे का भी बीमा होता है और उसमें मौजूद सामान का भी बीमा होता है। रॉयल सुंदरम जनरल इंश्योरेंस के मुख्य उत्पाद अधिकारी निखिल आप्टे का कहना है, 'हरेक घर के ढांचे और उसमें मौजूद सामान का बीमा सबसे पहले कराना चाहिए। भवन बीमा के कवर में मकान के क्षतिग्रस्त हुए हिस्सों को दोबारा बनाने का खर्च भ्भरने का ही प्रावधान होता है। यदि सामान का भी बीमा कराया जाता है तो फर्नीचर, दूसरे सामान और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के नुकसान की भरपाई भी हो जाती है।'

अगर आपके घर में आग लग जाती है और आप बीमा के तहत दावा करना चाहते हैं तो जितनी जल्दी हो सके, उतनी जल्दी बीमा कंपनी को सूचित करें। बेहतर होगा कि मकान के जिस हिस्से को नुकसान पहुंचा है, उसकी तस्वीरें भी आप खींच लीजिए। इससे दावे की प्रक्रिया में बहुत मदद मिलती है। बीमा कंपनी आपसे कुछ और दस्तावेजों की मांग कर सकती है, जो आपको दावे के फॉर्म के साथ वे सब भी देने पड़ेंगे।

पॉलिसीबाजार डॉट कॉम में सामान्य बीमा के मुख्य कारोबार अधिकारी तरुण माथुर की सलाह है, 'अपने मकान के निर्माण में आई कुल लागत यानी उसके मूल्य और उसमें रखे सामान की कीमत का खुलासा बीमा पॉलिसी खरीदते वक्त ही कर दें। अगर मकान के ढांचे को कोई नुकसान पहुंचा है तो आपको नुकसान का सही आकलन करने के लिए किसी अधिकृत वास्तुकार यानी आर्किटेक्ट के हाथ से बनी रिपोर्ट जमा करनी पड़ेगी।'

अगर हादसे के बाद अपने घर की मरम्मत आप खुद ही करा रहे हैं तो आपको सभी जरूरी बिल और रसीदें संभालकर रखनी चाहिए क्योंकि दावा करते समय आपको बीमा कंपनी के सामने सभी रसीदें पेश करनी होंगी। यदि नुकसान बहुत ज्यादा हुआ है तो बीमा कंपनी नुकसान का पता लगाने के लिए किसी सर्वेयर को भेज सकती है। अगर दावा सही करार दिया जाता है तो बीमा कंपनी तय रकम आपको दे देगी। अब सबसे अहम बात पर आते हैं। अगर आपके घर में लगी आग से आपके पड़ोसी या किसी अन्य व्यक्ति (थर्ड पार्टी) को नुकसान हो जाता है तो बीमा कंपनी उस नुकसान की भरपाई भी करेगी। बीमा पॉलिसी के देनदारी के प्रावधान के मुताबिक आपकी इमारत में मौजूद होने के कारण या आपके कारण किसी अन्य व्यक्ति को किसी भी तरह की चोट लगती है या नुकसान होता है तो बीमा कंपनी उसकी भी भरपाई करेगी।

पॉलिसीएक्स डॉट कॉम के मुख्य कार्य अधिकारी और संस्थापक निखिल गोयल बताते हैं, 'घर का बीमा कराया जाए तो बीमाधारक के परिसर में मौजूद होने पर या उनके कारण किसी अन्य व्यक्ति अथवा संपत्ति को किसी भी तरह का नुकसान होने पर कानूनी देनदारी का जिम्मा बीमा कंपनी का होता है।'

मगर कुछ गृह बीमा पॉलिसियों में थर्ड पार्टी बीमा का सीधा प्रावधान नहीं होता। इसे अलग से यानी ऐड-ऑन कवर के तौर पर खरीदना पड़ता है। ऐसी पॉलिसियों में किसी अन्य व्यक्ति को चोट लगने या किसी अन्य संपत्ति को नुकसान पहुंचने पर मुआवजा तभी मिलता है, जब पब्लिक लायबिलिटी ऐड-ऑन कवर खरीदा जाता है। गृह बीमा के साथ मिलने वाले अन्य ऐड-ऑन कवर में घायल ड्राइवर, रसोइये अथवा सुरक्षा गार्ड के लिए कर्मचारी को मुआवजे का कवर, ठहरने के वैकल्पिक स्थान और आवाजाही का खर्च उठाने के लिए अस्थायी पुनर्वास कवर, एटीएम निकासी के समय लूटपाट का कवर, बटुआ और चाबी खोने पर बीमा कवर आदि शामिल हैं।

बजाज आलियांज जनरल इंश्यारेंस के मुख्य तकनीकी अधिकारी शशिकुमार आदिदामू कहते हैं, 'जिस मकान में सबसे पहले आग लगी है, उसके मालिक केे खिलाफ पड़ोसी मुकदमा भी कर सकते हैं। ऐसी सूरत में गृह बीमा पॉलिसी के तहत आने वाले पब्लिक लायबिलिटी कवर से आसपास के मकानों में हुए नुकसान की भरपाई कर दी जाती है।' गृह बीमा पॉलिसी के लिए प्रीमियम की दरें बहुत सारे कारकों पर निर्भर करती हैं। इनमें निर्माण का तरीका, मकान में मौजूद सुरक्षा प्रणालियां और दावे का इतिहास आदि शामिल हैं। मकान के ढांचे के लिए अगर 50 लाख रुपये का और उसमें मौजूद सामान के लिए 10 लाख रुपये का बीमा कराया जाता है तो सालाना प्रीमियम बमुश्किल 3,000 से 5,000 रुपये बैठता है।

मुआवजे की राशि इस बात पर निर्भर करती है कि मकान का पर्याप्त बीमा कराया गया है या नहीं। कोटक जनरल इंश्यारेंस के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्य अधिकारी महेश बालसुब्रमण्यन कहते हैं, 'इमारत को तथा कॉमन एरिया को होने वाले नुकसान की भरपाई या तो बाजार मूल्य के आधार पर की जाती है अथवा इमारत को पहले जैसा बनाने में लगे खर्च के आधार पर की जाती हैं। इन दोनों में से किसी एक को बीमा खरीदते समय ही चुनना होगा।'

जब किसी दावे को बाजार मूल्य के आधार पर निपटाया जाता है तो नियुक्त किया गया सर्वेक्षक सबसे पहले यह देखता है कि मरम्मत करने पर कितना खर्च होने जा रहा है। इसके बाद वह मूल्यह्रïास का गणित लगाता है, जो इस बात पर निर्भर करता है कि इमारत कितनी पुरानी है। इसके बाद ही दावे की रकम तय की जाती है। अगर इमारत को पहले जैसा बनाने में आने वाले खर्च के आधार पर दावा निपटाया जाता है तो मूल्यह्रïास पर ध्यान देने की कोई जरूरत ही नहीं होती।

बहुत से लोगों को लगता है कि 'मेरे साथ ऐसा नहीं होगा' यानी उनके साथ किसी तरह का हादसा नहीं होगा। इसीलिए वे अपने घर के लिए गृह बीमा योजना खरीदने की जरूरत भी नहीं समझते। लेकिन दुर्घटना पहले से कहकर नहीं आती। इसीलिए सही समय पर बीमा पॉलिसी खरीद लीजिए और किसी भी हादसे से सुरक्षित रहिए।
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