बिजनेस स्टैंडर्ड - आइडिया और भारती को नुकसान होने के आसार
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आइडिया और भारती को नुकसान होने के आसार

राम प्रसाद साहू /  July 08, 2018

छोटी कंपनियों की विदाई और दूरसंचार क्षेत्र में समेकन से ग्राहकों की संख्या में वृद्घि के बावजूद प्रमुख सूचीबद्घ कंपनियों भारती एयरटेल और आइडिया सेल्युलर को जून तिमाही में 20 अरब रुपये से अधिक का नुकसान होने की आशंका है। हालांकि भारती एयरटेल को टेलीनॉर के समेकन की वजह से राजस्व के मोर्चे पर कुछ बढ़त हासिल होगी, पर जून तिमाही में उसे 5 अरब रुपये से अधिक का नुकसान होने का अनुमान है। भारती एयरटेल के लिए कई तिमाहियों में यह पहला परिचालन नुकसान होगा। कंपनी ने एक साल पहले की समान तिमाही में 3.67 अरब रुपये का समेकित मुनाफा दर्ज किया था।

 
आइडिया के लिए नुकसान 16 अरब रुपये पर अनुमानित है, जो एक साल पहले की तिमाही में दर्ज नुकसान के मुकाबले दोगुना है। जहां प्रतिस्पर्धी दरों की वजह से पैदा हुए दबाव से कंपनी का राजस्व प्रभावित होगा, वहीं अपने टावरों की एटीसी को बिक्री किए जाने से भी राजस्व में कमी आएगी। आइडिया के लिए प्रति उपभोक्ता औसत राजस्व प्रति (एआरपीयू) में 30 प्रतिशत की गिरावट आई है जिसमें बड़ा योगदान ग्रामीण ग्राहकों का है। दूरसंचार क्षेत्र में दरों को लेकर लड़ाई शुरू होने के बाद यह पहली बार है कि आइडिया को जून तिमाही में 100 रुपये से कम का एआरपीयू दर्ज करना पड़ सकता है। 
 
भारती के लिए एआरपीयू सालाना आधार पर 31 प्रतिशत गिर कर 107 रुपये रह जाने का अनुमान है। इसमें मूल्य निर्धारण दबाव और टेलीनोर के कम एआरपीयू ग्राहक आधार की वजह से कमी आई है। अपने भारतीय वायरलेस व्यवसाय के परिचालन लाभ पर दबाव बरकरार रहने की आशंका है। हालांकि समेकित स्तर पर, परिचालन स्तर पर दबाव कम है और मुनाफे में अफ्रीकी व्यवसाय की सुधरती स्थिति (कम से कम पांच तिमाहियों में सर्वाधिक परिचालन लाभ) और टावर, डायरेक्ट-टु-होम तथा ब्रॉडबैंड सेवाओं जैसे अन्य व्यवसायों में मजबूत प्रदर्शन को देखते हुए सालाना आधार पर गिरावट 15 प्रतिशत तक सीमित रहने का अनुमान है। 
 
भारती और आइडिया सेल्युलर, दोनों पर इंटरकनेक्ट यूसेज चार्ज (आईयूसी) में कटौती से प्रभावित होंगी। आईयूसी को फरवरी 2018 में अमल में लाया गया है। अन्य दबाव रिलायंस जियो के प्रवेश के बाद पोस्ट-पेड एआरपीयू पर पैदा हुए चुनौती की वजह से दिखेगा। रिलायंस जियो ने मई में आकर्षक योजनाएं शुरू की थीं।  कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के विश्लेषकों का कहना है कि हालांकि सुधार की संभावना फिलहाल नहीं दिख रहा है, लेकिन एआरपीयू में गिरावट की रफ्तार नरम पडऩे का अनुमान है। ब्रोकरेज फर्म ने कहा है, 'स्मार्टफोन का चलन तेज होने की वजह से कई प्रतिस्पर्धी रियायती प्लान बरकरार हैं, हालांकि इस रियायतों की पेशकश में नरमी आ रही है।'  
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