बिजनेस स्टैंडर्ड - दावों के निपटान में देरी पर जुर्माना!
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दावों के निपटान में देरी पर जुर्माना!

संजीव मुखर्जी / नई दिल्ली 07 08, 2018

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत दावों के निपटान में देरी पर जुर्माना लगाने पर विचार
अपने हिस्से का प्रीमियम देने में राज्यों की लेटलतीफी से दावों के निपटान में देरी
दावों के त्वरित निपटान के लिए बैंकों के सेवा शुल्क में हो सकता है बदलाव
कृषि मंत्रालय का 30 फीसदी बजट प्रधानमंत्री फसल बीमा के प्रीमियम पर हो रहा है खर्च
दावों का निपटान 60 दिन में करना अनिवार्य लेकिन इसमें लगते हैं औसतन 5 से 6 महीने

बिजनेस स्टैंडर्ड दावों के निपटान में देरी पर जुर्माना!केंद्र सरकार अपनी बहुचर्चित प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) के तहत दिशानिर्देशों के उल्लंघन के लिए राज्यों, बैंकों और यहां तक कि बीमा कंपनियों पर भी किसी तरह के वित्तीय जुर्माने लगाने के बारे में विचार कर रही है। इस योजना की औपचारिक शुरुआत को करीब दो साल बीत चुके हैं। अधिकारियों ने कहा कि केंद्र सरकार उन राज्यों को प्रोत्साहन भी देने की योजना बना रही है, जो तुरंत अपने हिस्से का प्रीमियम चुकाते हैं, नुकसान के आकलन की खातिर फसलों की कटाई के लिए तकनीक इस्तेमाल करते हैं और किसानों को समय पर दावों का भुगतान करते हैं।

केंद्र राज्यों पर जुर्माना बकाया प्रीमियम राशि पर लेवी के रूप में लगा सकता है या उन्हें प्रीमियम का ज्यादा हिस्सा वहन करने को कह सकता है। इस समय केंद्र और राज्य आधा-आधा प्रीमियम देते हैं। वहीं सरकार बैंकों पर जुर्माने के लिए उन्हें मिलने वाला 4 फीसदी सेवा शुल्क कम कर सकती है, जो बैंकों को किसान के हिस्से के प्रीमियम में से दिया जाता है। वहीं बैंकों के बेहतर प्रदर्शन करने पर इस सेवा शुल्क को बढ़ाया जा सकता है। 

अधिकारियों ने कहा कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत दावों का निपटान दो महीनों में करना जरूरी है, लेकिन सरकार ने पाया है कि योजना के शुरुआती दो वर्षों में दावों के निपटान में औसतन 5 से 6 महीने लिए गए हैं। पहले भी केंद्र ने राज्यों और अन्य भागीदारों को चेतावनी दी थी कि अगर उन्होंने दावों के निपटान में देरी की तो उन पर वित्तीय जुर्माने लगाए जाएंगे। लेकिन असल में ये जुर्माने लगाए नहीं गए। अधिकारियों ने कहा कि हालांकि इस बार यह मामला शीर्ष अधिकारियों तक पहुंच गया है और इस पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।

जुर्मानों और प्रोत्साहनों का एक बड़ा मकसद राज्यों को अपने हिस्से का प्रीमियम समय पर चुकाने के लिए बढ़ावा देना है, जिसे योजना के तहत किसानों के दावों के निपटान में देरी का सबसे प्रमुख कारण पाया गया है। किसानों की आय 2022 तक दोगुनी करने पर बनी सरकारी की दलवाई समिति ने भी अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि इस बीमा योजना के लिए शुरुआती दो वर्षों में सबसे बड़ी बाधा दावों के भुगतान में देरी या भुगतान न होना रहे हैं। इसकी वजह राज्यों का अपने हिस्से का प्रीमियम नहीं चुकाना थी। 

फसल बीमा योजना के तहत किसान द्वारा चुकाए जाने वाले प्रीमियम और वास्तविक प्रीमियम के अंतर के लिए सरकार सब्सिडी देती है। यह सब्सिडी केंद्र और राज्य आधी-आधी वहन करते हैं। आम तौर पर केंद्र अपने हिस्से के प्रीयिमम का भुगतान समय पर करता है, लेकिन राज्य ऐसा नहीं करते हैं। इससे दावों के निपटान में देरी होती है। राज्य फसल में नुकसान का आकलन भी समय पर नहीं करते हैं, जिससे भी दावों के निपटान में देरी होती है। लेकिन सरकार के एक समूह का यह भी मानना है कि वित्तीय जुर्माने के कारण राज्य इस कार्यक्रम को ठीक से चलाने को लेकर हतोत्साहित हो सकते हैं। बिहार इस योजना को पहले ही अपना चुका है, लेकिन पंजाब इससे नहीं जुड़ा है।

पूर्व कृषि सचिव शिराज हुसैन ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया, 'मुझे नहीं लगता कि राज्यों या अन्य किसी पर वित्तीय जुर्माना लगाने से कोई फायदा होगा। अगर राज्य राजकोषीय अनुशासन को नहीं अपना रहे हैं और उनमें से ज्यादातर में केंद्र की सत्तारूढ़ पार्टी का शासन है तो जुर्माने क्या करेंगे।' उन्होंने कहा कि योजना आयोग के समय भी उन राज्यों के फंड घटाने की कोशिश की गई, जिन्होंने बिजली के लिए एनटीपीसी को भुगतान में डिफॉल्ट किया था। लेकिन यह प्रयास सफल नहीं रहा।

अधिकारियों ने कहा कि ताजा आंकड़ों के मुताबिक 2017 के खरीफ सीजन के लिए अब तक करीब 194 अरब रुपये का प्रीमियम संग्रहित किया गया है, जबकि 166 अरब रुपये के दावे स्वीकार किए गए हैं और 110 अरब रुपये के दावे निपटाए जा रहे हैं या निपटाए जा चुके हैं। इनमें से 54 अरब रुपये के दावे अकेले मध्य प्रदेश से खरीफ 2017 में खराब हुई फसल के लिए आए। यह देश में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत सबसे बड़ा फसल बीमा दावा निपटान है।

मध्य प्रदेश में अगले कुछ महीनों में चुनाव होने हैं। इस बीच केंद्र सरकार राज्यों को योजना के तहत ज्यादा स्वतंत्रता देने की योजना बना रही है। इसके अलावा योजना के तहत सीसीई और दावों के निपटान के वितरण जैसे कार्यों में तकनीक और ड्रोन के इस्तेमाल को अनिवार्य बनाने की योजना है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना नरेंद्र मोदी सरकार की सबसे महत्त्वाकांक्षी योजनाओं में से एक है। यह योजना उपज पर आधारित है, जिसमें किसानों से सभी खरीफ फसलों के लिए 2 फीसदी, रबी की फसलों के लिए 1.5 फीसदी और वाणिज्यिक एवं बागवानी फसलों के लिए 5 फीसदी प्रीमियम लिया जाता है। हर साल कृषि मंत्रालय का 30 फीसदी या एक-तिहाई बजट प्रधानमंत्री फसल बीमा के प्रीमियम पर खर्च हो रहा है।

Keyword: PMFBY, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई,
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