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खरीफ की बुआई ने पकड़ी रफ्तार

संजीव मुखर्जी / नई दिल्ली July 06, 2018

खरीफ फसलों की बुआई लगातार सुस्त बनी हुई है। अभी तक जितनी बुआई हुई है, वह पिछले साल इस समय तक हुई बुआई के मुकाबले कम है। इसकी मुख्य वजह यह है कि जून में मॉनसून दस्तक देने के बाद लंबे समय तक गायब रहा। हालांकि पिछले सप्ताह से बुआई में कुछ सुधार आया है क्योंकि देश के मध्य, उत्तरी और पश्चिमी हिस्सों में फिर से बारिश शुरू हुई है।  कृषि विभाग के ताजा आंकड़ों के मुताबिक शुक्रवार तक खरीफ फसलों की बुआई करीब 333.7 लाख हेक्टेयर में हुई है, जो पिछले साल इस समय तक हुई बुआई से करीब 14.17 फीसदी कम है। यह अंतर पिछले सप्ताह तक करीब 22 फीसदी था। यह पिछले कुछ वर्षों के दौरान जून में रकबे में सबसे अधिक गिरावट थी। पिछले सप्ताह और इस सप्ताह के बीच बुआई में कुछ सुधार हुआ है। 
 
बुआई के सामान्य रकबे के मुकाबले 2018 में बुआई 6 जुलाई तक करीब 10 फीसदी कम हुई है। बुआई का सामान्य रकबा पिछले पांच वर्षों का औसत है। अधिकारियों ने कहा कि देश के मध्य, पश्चिमी और उत्तरी हिस्सों के तिलहन, दलहन, मोटे अनाज और कपास उत्पादक क्षेत्रों में मॉनसून फिर से सक्रिय हो रहा है, जिससे बुआई में तेजी आने की संभावना है।  इस साल 5 जुलाई तक दक्षिण-पश्चिम मॉनसून सामान्य से करीब 7 फीसदी कम रहा है। हालांकि इस बार मॉनसून पूरे देश में जून के अंत तक यानी अपने सामान्य समय से करीब एक पखवाड़े पहले पहुंच गया था। लेकिन देश के जिन 653 जिलों के आंकड़े उपलब्ध हैं, उनमें से 40 फीसदी में 4 जुलाई तक सामान्य से कम बारिश हुई है। शेष जिलों में सामान्य बारिश हुई है। 
 
इस साल मॉनसून 2017 की तरह सामान्य रहने का अनुमान है। इस साल जून में मॉनसून की अच्छी शुरुआत हुई, लेकिन 13 जून के बाद लंबे समय तक बारिश नहीं हुई। इससे बुआई का रकबा घटा है।  हालांकि जून के अंत से बारिश फिर होने लगी है, इसलिए कमी की भरपाई हो सकती है क्योंकि अभी ज्यादातर फसलों की बुआई के लिए समय है। प्रमुख फसलों में कपास की बुआई सबसे ज्यादा प्रभावित हुई है। आंकड़ों से पता चलता है कि इसका रकबा पिछले साल की तुलना में करीब 24 फीसदी कम है। 
 
दलहन फसलों की बुआई पिछले साल की तुलना में 19.36 फीसदी कम रकबे में हुई है। वहीं तिलहन औरर मोटे अनाजों का रकबा भी पिछले साल से 13.4 फीसदी कम है।  चावल खरीफ सीजन में उगाया जाने वाला सबसे मुख्य खाद्यान्न है। इसकी बुआई 5 जुलाई तक पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले करीब 15 फीसदी कम हुई है क्योंकि पूर्वी भारत में मॉनसून देरी से आया।  केंद्र सरकार ने इस सप्ताह खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में भारी बढ़ोतरी की है। इनमें धान और कपास सबसे ज्यादा बढ़ोतरी वाली फसलों में शामिल हैं। विशेषज्ञों ने कहा कि एमएसपी में बढ़ोतरी से किसानों को ज्यादा बुआई के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। लेकिन किसानों के लिए बुआई की प्राथमिकता में एमएसपी से ज्यादा मॉनसून की भूमिका होती है। 
Keyword: agri, farmer, crop, monsoon, kharif, MSP, खरीफ एमएसपी,
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