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'समर्थन मूल्य बढ़ा, मगर अभी भी कम'

टी ई नरसिम्हन / चेन्नई July 05, 2018

देश में हरित क्रांति के जनक एम एस स्वामीनाथन का कहना है कि ऊंचा न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) कृषि संकट से मुकाबले की प्रक्रिया में पहला स्वागत योग्य कदम है। लेकिन इसके साथ साथ खासकर खरीद और भंडारण के क्षेत्र में में कई और बदलाव की जरूरत होगी। उन्होंने कहा कि घोषित एमएसपी ऊंचा है, लेकिन यह सुझाए गए स्तर से अभी भी नीचे है। अधिक एमएसपी स्वागत योग्य है, लेकिन गेहूं और चावल को छोड़कर एमएसपी पर अपर्याप्त खरीद हो रही है।  सरकार ने कई खरीफ फसलों के एमएसपी में भारी वृद्घि को मंजूरी दी है जिससे राजकोषीय खजाने पर 150 अरब रुपये से अधिक का बोझ पड़ेगा।

 
स्वामीनाथन ने कहा है कि कृषि की आर्थिक और पारिस्थितिक स्थिति अच्छी नहीं है और इसका अंदाजा किसान संगठनों के लगातार विरोध और किसान आत्महत्याओं के घटनाओं से लगाया जा सकता है। किसान आंदोलन की दो मुख्य मांगें कर्ज माफी और उचित कीमतों से संबंधित हैं।  मॉनसून और बाजार कृषि में आय की स्थिरता में अहम योगदान देते हैं। केंद्र ने फसल बीमा में सुधार लाने के लिए कई कदम उठाए हैं, लेकिन कवरेज और प्रदर्शन अभी भी संतोषजनक नहीं है और जोखिम बरकरार है जिससे ऊंची कीमतों और ऋण व्यवस्था में सुधार की मांग बढ़ रही है।
 
किसानों के लिए जरूरी विपणन मदद के संदर्भ में नीति में तीन एकीकृत घटक होने चाहिए जिनमें न्यूनतम समर्थन मूल्य  या सी 2 (सकल लागत, स्वामित्व वाली भूमि पर किराया और ब्याज शामिल) + 50 प्रतिशत के फॉर्मूले पर आधारित एमएसपी, किसानों के लिए एमएसपी सुनिश्चित करने के लिए अनुकूल खरीद नीति  और खाद्य सुरक्षा अधिनियम, स्कूल मिड-डे मील कार्यक्रम  के प्रभावी क्रियान्वयन के जरिये खपत वृद्घि आदि शामिल हैं।  उदाहरण के लिए, सामान्य धान का एमएसपी 1,550 रुपये से बढ़ाकर 1,750 रुपये प्रति क्विंटल किया गया है। पिछले साल (2017-18) की संपूर्ण लागत (सी2) को देखते हुए और सीएसीपी द्वारा इस्तेमाल इनपुट कॉस्ट इंडेक्स पर आधारित उत्पादन लागत में 3.6 प्रतिशत की वृद्घि के साथ इस साल के लिए अनुमानित सी2 लागत 1,524 रुपये है। 
 
इसलिए, नया एमएसी सी 2+15 है, न कि सी 2+50 है। रागी के मामले में नया एमएसपी सी 2+20 है। इसी तरह मूंग के लिए एमएसपी 5,575 रुपये से बढ़ाकर 6,975 रुपये किया गया है, इसलिए यह अब सी 2+19 है। अधिक एमएसपी स्वागत योग्य है, पर गेहूं और चावल को छोड़कर एमएसपी पर सार्वजनिक खरीदारी अपर्याप्त है। यह उन किसानों के अनुभव से स्पष्टï हुआ है जो अच्छी खरीद कीमत की उम्मीद में अधिक दलहनें उपजाते हैं, लेकिन बाजार कीमतों में गिरावट से उन्हें निराशा का सामना करना पड़ा है। उन्होंने कहा कि वास्तव में, उड़द, अरहर, मक्का, मूंगफली, सोयाबीन, बाजरा, सरसों जैसी कई फसलों के लिए औसत मंडी भाव मॉनसून से पहले एमएसपी से नीचे था। 
 
इसके अलावा नैशनल कमीशन ऑन फार्मर्स जैसे अन्य कदमों से आय में मजबूती के साथ साथ कृषि से कुल आय वृद्घि में मदद मिलेगी। साथ ही यह सुनिश्चित करने के लिए उपयुक्त कदम उठाए जाने की भी जरूरत है कि भूजल के अत्यधिक दोहन और पारस्थितिक रूप से नुकसानदायक गतिविधियों को नियंत्रित किया जाए।
Keyword: agri, farmer, crop, MSP, एमएसपी,
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