बिजनेस स्टैंडर्ड - एमएसपी पर बिक्री का भी मिले हक
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एमएसपी पर बिक्री का भी मिले हक

संजीव मुखर्जी / नई दिल्ली 07 05, 2018

न्यूनतम समर्थन मूल्य

सरकार की इस कीमत निर्धारक समिति ने किसानों के एमएसपी पर बेचने के अधिकार को कानून बनाने का समर्थन किया
सीएसीपी वह संस्था है, जो 23 खरीफ एवं रबी फसलों का समर्थन मूल्य तय करती है

बिजनेस स्टैंडर्ड एमएसपी पर बिक्री का भी मिले हकसरकार फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में बढ़ोतरी का जोर-शोर से प्रचार-प्रसार कर रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि यह कैसे सुनिश्चित किया जाए कि किसानों को एमएसपी का लाभ मिल सके। अगर देश में एक नियमित खरीद व्यवस्था नहीं होगी तो संभवतया चावल को छोड़कर अन्य जिंसों के लिए एमएसपी एक काल्पनिक कीमत बना रहेगा। इस समस्या के समाधान के लिए कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (सीएसीपी) ने एक सुझाव दिया है। आयोग चाहता है कि 'एमएसपी पर बिक्री का अधिकार' नाम का एक कानून बनाया जाए, जिससे इसे कानूनी समर्थन मिलेगा। इससे यह सुनिश्चित होगा कि फसलें तय कीमत से कम पर नहीं खरीदी जाएंगी और किसानों में एमएसपी को लेकर भरोसा कायम होगा। सीएसीपी वह संस्था है, जो 23 खरीफ एवं रबी फसलों का समर्थन मूल्य तय करती है। हालांकि आयोग ने इस कानून की व्यापक रूपरेखा के बारे में कुछ नहीं कहा है। 

सीएसीपी की सिफारिशें सरकार के लिए बाध्यकारी नहीं हैं, लेकिन उसके इस सुझाव को समर्थन मिल सकता है। आगामी मॉनसून सत्र में किसान अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के बैनर तले एक निजी सदस्य विधेयक पेश करने जा रहे हैं, जिसमें उत्पादन लागत पर 50 फीसदी लाभ मार्जिन की एमएसपी गारंटी की कानूनी राहत की मांग की जाएगी। कृषि जिंसों के लिए गारंटीशुदा लाभकारी न्यूनतम समर्थन मूल्य विधेयक, 2018 का अग्रणी राजनीतिक दलों ने समर्थन किया है। केंद्र और राज्य सरकारों के लिए यह सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती है कि किसानों को एमएसपी का लाभ मिले। इस समय गेहूं और चावल की नियमित खरीद व्यवस्था है, लेकिन यह रागी और बाजरा जैसी फसलों के लिए नहीं है। वर्ष 2018-19 के लिए रागी और बाजरे जैसी फसलों के एमएसपी में भारी बढ़ोतरी की गई है। 

नेफेड ने वित्त वर्ष 2017-18 में करीब 32 लाख टन दलहन और तिलहन की खरीदारी की, जिस पर करीब 160 अरब रुपये खर्च हुए। यह खरीदारी कीमत समर्थन प्रणाली और कीमत स्थिरता कोष के तहत की गई। यह 2016-17 की कुल खरीदारी से बहुत अधिक थी। 2016-17 में महज 3.1 लाख टन की खरीदारी हुई थी। हालांकि वित्त वर्ष 2017-18 की कुल खरीद इस साल में उत्पादित कुल दलहन और तिलहन 551.4 लाख टन (245.1 लाख टन दलहन और 306.3 लाख टन तिलहन) का महज 6 फीसदी थी।

तिलहन और दलहन की इतनी मामूली खरीद के कारण मुश्किल से ही कीमतों की स्थिति पर कोई असर पड़ता है। इसके साथ ही एफसीआई ने भी किसानों से दलहन और तिलहनों की खरीदारी की। आयोग ने मध्य प्रदेश की भावांतर भुगतान योजना का समर्थन किया है, जिसमें कम लागत आती है। आयोग इसे देशभर में लागू करना चाहता है। सीएसीपी की रिपोर्ट में कहा गया है,'आयोग ने पाया है कि भावांतर भुगतान योजना के तहत मध्य प्रदेश सरकार की आने वाली लागत एमएसपी के तहत फसलों की खरीदारी की वर्तमान व्यवस्था के मुकाबले काफी कम है। इसलिए आयोग का मानना है कि सरकार को देशभर में योजना को लागू करने की संभावना तलाशनी चाहिए।' आयोग प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत दावे निपटान के कुछ तरीकों के भी खिलाफ है। उसका कहना है कि किसानों को भूमि की कीमत पर ऋण मिलना चाहिए, न कि फसल की कीमत पर ताकि वे ऋण के जाल में न फंसें। 

Keyword: agri, farmer, crop, MSP, एमएसपी,
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